Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागछी और जस्टिस वी. मोहना की तीन-सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं और वकीलों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है।
जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाई जानी चाहिए: अदालत
श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान (चढ़ावे) की कथित हेराफेरी, चोरी और गबन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सौंपी गई स्थिति रिपोर्ट (Status Report) को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि मामले की जांच के लिए एक नए और वरिष्ठ अधिकारियों वाले विशेष जांच दल (SIT) का पुनर्गठन किया जाए। अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की बिल्कुल कोशिश न करें। यह आपराधिक कानून (Penal Law) के तहत साधारण और स्पष्ट रूप से अपराध किए जाने का मामला है। इसकी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाई जानी चाहिए।
सुनवाई के मुख्य बिंदु और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
“राजनीति से दूर रहें, यह केवल एक आपराधिक मामला है”
सुनवाई की शुरुआत में जब याचिकाकर्ताओं की ओर से अलग-अलग दलीलें दी जाने लगीं, तो सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग न दिया जाए। अदालत का ध्यान केवल यह सुनिश्चित करने पर है कि श्रद्धालुओं के दान के साथ हुए अपराध की निष्पक्ष और ठोस जांच हो।
SIT के पुनर्गठन और वरिष्ठ अधिकारियों को जांच सौंपने के निर्देश
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि राज्य पुलिस मामले की जांच कर रही है और अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पर सीजेआई की पीठ ने कहा कि शुरुआती जांच करने वाली एसआईटी (जिसमें दो सीनियर आईएएस और एक सीनियर आईपीएस अधिकारी शामिल थे) को ही अब मुख्य जांच सौंपने के लिए निर्देशों के साथ पुनर्गठित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि जांच किसी स्थानीय थाने के बजाय एक जिम्मेदार और उच्च-स्तरीय एसआईटी के हाथों में होनी चाहिए।
वेबसाइट पर रसीदें सार्वजनिक करना व्यावहारिक नहीं, लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त हो
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मांग की कि मंदिर निर्माण के दौरान देश भर के श्रद्धालुओं से लिए गए दान की रसीदों और सोने-चांदी के सामान का ब्योरा एक सार्वजनिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।
कोर्ट का रुख: सीजेआई सूर्यकांत ने इस विचार को खारिज करते हुए कहा कि इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना संभव नहीं है, क्योंकि कल को कोई भी व्यक्ति आकर दावा करने लगेगा कि उसने हीरा या सोना दान किया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “जहां भी रसीद दी गई है, उसका खाता और लेजर (Account & Ledger Book) पूरी तरह से व्यवस्थित और सुरक्षित होना चाहिए।
डिजिटल साक्ष्य और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की सुरक्षा
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि दान की गिनती के समय के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड्स मिटाए जा सकते हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी डिजिटल साक्ष्य और फुटेज को सुरक्षित रखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर मुख्य याचिकाओं का ब्योरा
शीर्ष अदालत में दान में गबन को लेकर कई अलग-अलग जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई हैं।
नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका: मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के खातों का कैग (CAG) से ऑडिट कराने की मांग।
अजय कुमार राय व दिनेश कुमार यादव की याचिका: दानदाताओं और श्रद्धालुओं के हितों की रक्षा के लिए समयबद्ध स्वतंत्र जांच की मांग।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की याचिका: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच, वित्तीय रिकॉर्ड्स के फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) और जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को कोई भी बड़ा वित्तीय या संविदात्मक निर्णय लेने से रोकने की मांग।
हिन्दू धर्म परिषद की याचिका: सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में समग्र जांच की मांग।
निर्मोही अखाड़ा का आवेदन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ढांचे को पुनर्गठित कर एक सार्वजनिक ट्रस्ट बनाने की मांग, ताकि अधिक जवाबदेही तय हो सके।
केस मैट्रिक्स: सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर दान चोरी मामला (2026)
| कानूनी और प्रक्रियात्मक बिंदु | सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान स्थिति |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ (Bench) | CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागछी और जस्टिस वी. मोहना |
| अब तक की कार्रवाई | उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा FIR दर्ज; 8 आरोपी गिरफ्तार |
| एसआईटी (SIT) की स्थिति | सीजेआई ने एसआईटी को पुनर्गठित कर वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में जांच सौंपने के निर्देश दिए। |
| पारदर्शिता पर निर्देश | वेबसाइट पर रसीदें डालने का प्रस्ताव खारिज; लेकिन सभी खातों/रसीदों का ब्योरा सुरक्षित रखने के निर्देश। |
| अगली सुनवाई की तिथि | मामला अगले सोमवार (27 जुलाई 2026) के लिए सूचीबद्ध। |

