Friday, September 18, 2026
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Forum Verdict:एटीएम से निकले ₹25,000 पर खाते से कटे ₹50,000…जानिए यूनियन बैंक के ग्राहक को किस तरह मिली राहत, पढ़ें फैसला

Forum Verdict: हरियाणा राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एटीएम (ATM) से पैसे निकालते समय होने वाली तकनीकी गड़बड़ी और उसके बाद बैंकों के ढुलमुल रवैये को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

पानीपत के रहने वाले सुरिंदर कुमार की 11 साल लंबी कानूनी लड़ाई

आयोग के न्यायिक सदस्य एस. पी. सूद और सदस्य सुरेश चंद्र कौशिक की पीठ ने यूनियन बैंक की अपील को पूरी तरह से मेरिटहीन (Devoid of Merit) बताते हुए खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही पानीपत के रहने वाले सुरिंदर कुमार की 11 साल लंबी कानूनी लड़ाई का सफल अंत हुआ है। अदालत ने एक ग्राहक के खाते से दोगुना पैसा काटने के मामले में य्यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) को तगड़ा झटका देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें बैंक को पीड़ित उपभोक्ता को पैसे रिफंड करने और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

क्या था पूरा मामला? (ATM की तकनीकी खराबी और डबल डेबिट)

कई ट्रांजैक्शन रहे असफल: यह मामला 27 नवंबर 2015 का है, जब पानीपत के राम लाल चौक पर एटीएम नेटवर्क की गड़बड़ी के कारण एक आम उपभोक्ता परेशान हुआ। सुरिंदर कुमार, जिनका खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में था, पानीपत के राम लाल चौक पर स्थित आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक और एचडीएफसी (HDFC) बैंक के एटीएम से नकद निकालने गए थे। उन्होंने कई प्रयास किए, लेकिन कई बार पैसे नहीं निकले (Transaction Failed), जबकि उनके खाते से पैसे कटने के मैसेज आ रहे थे।

मिले ₹25,000, कटे ₹50,000: बार-बार प्रयास करने के बाद आखिरकार उनके हाथ में कुल ₹25,000 की नकदी आई। लेकिन जब उन्होंने अपना बैंक अकाउंट स्टेटमेंट चेक किया, तो वे हैरान रह गए, उनके खाते से कुल ₹50,000 की कटौती दिखाई जा रही थी।

बैंकों ने झाड़ा पल्ला: सुरिंदर ने उसी दिन यूनियन बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई और संबंधित एटीएम संचालित करने वाले बैंकों से भी संपर्क किया। लेकिन जब किसी भी बैंक ने उनका कटा हुआ पैसा वापस (Credit) नहीं किया, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, करनाल का दरवाजा खटखटाया।

यूनियन बैंक का तर्क: गलती दूसरे बैंकों के एटीएम की है

सुनवाई के दौरान यूनियन बैंक ने खुद को बेकसूर बताते हुए सारा ठीकरा दूसरे बैंकों पर फोड़ने की कोशिश की।

दूसरे बैंकों की जिम्मेदारी: यूनियन बैंक की दलील थी कि चूंकि ट्रांजैक्शन आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक के एटीएम नेटवर्क के जरिए किए गए थे, इसलिए यह देखना उन बैंकों का काम था कि कैश वास्तव में डिस्पेंस (बाहर निकला) हुआ था या नहीं।

आईसीआईसीआई और एचडीएफसी की सफाई: आईसीआईसीआई बैंक ने फोरम को बताया कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार एक असफल ट्रांजैक्शन को खुद-ब-खुद रिवर्स (वापस) कर दिया गया था, जबकि बाकी सफल थे। एचडीएफसी बैंक ने भी तकनीकी खराबी की बात मानते हुए कहा कि असफल ट्रांजैक्शन का पैसा उसी दिन वापस भेज दिया गया था।

कोर्ट का अचूक तर्क: “जब लिमिट ही ₹25,000 थी, तो ₹50,000 कैसे कट गए?”

राज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले की फाइलों और बैंक स्टेटमेंट का बारीकी से अध्ययन करने के बाद यूनियन बैंक के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। कमीशन ने एक बेहद तार्किक बिंदु को रेखांकित किया।

दैनिक निकासी की सीमा (Daily Limit): कोर्ट ने नोट किया कि सुरिंदर कुमार के एटीएम कार्ड की एक दिन में नकदी निकालने की अधिकतम सीमा ही ₹25,000 तय थी। ऐसे में बैंक का यह दावा कि उसने ₹50,000 के सफल ट्रांजैक्शन किए, तकनीकी और कानूनी रूप से पूरी तरह गलत है। जब कार्ड की लिमिट ही ₹25,000 थी, तो बैंक ने एक ही दिन में ₹50,000 की कटौती कैसे होने दी? यह सीधे तौर पर बैंक की सेवा में कमी (Deficiency in Service) को दर्शाता है।

जिला फोरम से लेकर राज्य आयोग तक: उपभोक्ता को क्या मिली राहत?

करनाल जिला फोरम ने 4 जुलाई 2018 को ही ग्राहक के पक्ष में फैसला सुना दिया था, जिसे अब जून 2026 में राज्य आयोग ने भी पूरी तरह सही ठहराया है। इसके तहत यूनियन बैंक को निम्नलिखित भुगतान करने होंगे।

राहत/मुआवजा का मदअदालत द्वारा तय की गई राशि
मूल विवादित राशि (रिफंड)₹25,000 (जो खाते से अतिरिक्त काट लिए गए थे)
मानसिक उत्पीड़न और अदालती खर्च₹5,000 (परेशानी और मुकदमेबाजी के एवज में)
ब्याज की शर्त (Penalty Interest)यदि आदेश के 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 8% वार्षिक दर से ब्याज देना होगा।
जमानत राशि की जब्तीअपील दाखिल करते समय यूनियन बैंक द्वारा जमा की गई ₹15,500 की वैधानिक राशि भी उपभोक्ता सुरिंदर कुमार को सौंपने का आदेश दिया गया है।

अदालत ने यूनियन बैंक को यह छूट (Liberty) जरूर दी है कि वह अपनी आंतरिक जांच कर यह राशि उन बैंकों (ICICI या HDFC) से वसूल सकता है, जिनके एटीएम में खराबी थी।

विश्लेषण: एटीएम फ्रॉड और तकनीकी गड़बड़ी पर आरबीआई (RBI) के नियम

यह फैसला देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए एक बड़ी नजीर है।

होम बैंक की जिम्मेदारी: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार भी यदि आपके साथ किसी भी एटीएम (चाहे वह किसी भी बैंक का हो) में ऐसा ‘फेल्ड ट्रांजैक्शन’ (Failed Transaction) होता है, तो पैसे रिफंड करने की प्राथमिक जिम्मेदारी आपके होम बैंक (जिसका कार्ड आपके पास है) की होती है।

समय पर शिकायत: ग्राहक को घटना के तुरंत बाद बैंक को सूचित करना चाहिए, जैसा कि इस मामले में सुरिंदर ने उसी दिन शिकायत दर्ज कराकर किया था।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

यह फैसला बैंकों की उस मनमानी पर कड़ा प्रहार है जहां वे अपनी तकनीकी खामियों की सजा आम उपभोक्ताओं को भुगतने के लिए छोड़ देते हैं। ₹25,000 की अतिरिक्त कटौती को वापस पाने के लिए एक आम नागरिक को 11 साल (2015 से 2026) तक चक्कर काटने पड़े, यह हमारे सिस्टम की सुस्ती को भी दिखाता है। लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई। अदालत ने साफ कर दिया कि एटीएम चाहे किसी भी तीसरी कंपनी या बैंक का हो, अगर ग्राहक का खाता आपके पास है, तो उसके पैसों की सुरक्षा और सही डेबिट की अंतिम जवाबदेही आपकी ही है।

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