Tuesday, August 18, 2026
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Identification of posts: सिर्फ लो विजन के लिए आरक्षित पदों की पहचान वैध…यह कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने

Identification of posts: दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाया है कि दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित 1% कोटे में केवल लो विजन (कम दृष्टि) वाले उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त पदों की पहचान करना कानूनन सही है।

यह रही अदालत की टिप्पणाी

न्यायाधीश सी हरि शंकर व न्यायाधीश अजय दिगपाॅल की बेंच ने कहा, पदों की प्रकृति और सुरक्षा जरूरतों के आधार पर ऐसा वर्गीकरण वैध है और पूरी तरह से नेत्रहीन (ब्लाइंड) उम्मीदवार उन पदों पर दावा नहीं कर सकते, जिन्हें उनके लिए उपयुक्त नहीं माना गया है।

यह है मामला

पश्चिम रेलवे ने 23 फरवरी 2019 को लेवल-1 के 10,734 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें 171 पद दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित थे। याचिकाकर्ता 100% नेत्रहीन थे और उन्होंने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया था। भर्ती सूचना में एक परिशिष्ट (Annexure A) था, जिसमें बताया गया था कि कौन से पद किस प्रकार की दिव्यांगता के लिए उपयुक्त हैं। इसमें 17 श्रेणियों में से केवल 5 पद ही ब्लाइंड और लो विजन दोनों के लिए उपयुक्त बताए गए थे, जबकि 6 पद केवल लो विजन के लिए और बाकी 6 पद किसी भी दृष्टिबाधित के लिए उपयुक्त नहीं माने गए थे।

उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की, फिर भी चयन नहीं हुआ

याचिकाकर्ताओं ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा पास की और कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्हें दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल के लिए बुलाया गया, लेकिन उनका नाम किसी भी चयन सूची में नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई, जबकि उन्हें बाहर कर दिया गया। उनका कहना था कि 171 में से 86 पद केवल लो विजन वालों के लिए आरक्षित कर दिए गए, जिससे पूरी तरह से नेत्रहीन उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया।

CAT और हाईकोर्ट दोनों ने याचिका खारिज की

याचिकाकर्ताओं ने पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में याचिका दायर की, जिसे 16 जुलाई 2024 को खारिज कर दिया गया। CAT ने कहा कि उम्मीदवारों को आवेदन के समय ही पदों की उपयुक्तता की जानकारी थी और उन्होंने बिना आपत्ति के प्रक्रिया में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने कहा कि भर्ती सूचना में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि कौन से पद किस श्रेणी के दृष्टिबाधितों के लिए उपयुक्त हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस जानकारी के बावजूद प्रक्रिया में भाग लिया, इसलिए अब वे इस पर आपत्ति नहीं कर सकते। कोर्ट ने माना कि सुरक्षा और कार्य की प्रकृति को देखते हुए कुछ पदों को पूरी तरह से नेत्रहीनों के लिए अनुपयुक्त मानना उचित है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RPWD एक्ट की धारा 34 के तहत 1% आरक्षण का मतलब यह नहीं है कि सभी पदों पर पूरी तरह से नेत्रहीनों को मौका मिलना चाहिए, जब तक कि वे पद धारा 33 के तहत उनके लिए उपयुक्त घोषित न किए गए हों।

कोर्ट ने किन मामलों का हवाला दिया

कोर्ट ने चंद्र प्रकाश तिवारी बनाम शकुंतला शुक्ला और यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एस. विनोद कुमार मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भाग लेते हैं, वे बाद में उसकी वैधता को चुनौती नहीं दे सकते।

यह रहा अदालत का निष्कर्ष

कोर्ट ने कहा कि लो विजन के लिए पदों की अलग से पहचान करना RPWD एक्ट का उल्लंघन नहीं है। यह एक वैध और सार्वजनिक हित में किया गया वर्गीकरण है। इसलिए याचिकाएं खारिज कर दी गईं और चयन प्रक्रिया को वैध ठहराया गया।

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