Saturday, November 7, 2026
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Impersonated Men: फर्जी जज और अफसर बनकर घूमने वाले शख्स को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया?…जब सभी जगह से बेल कैंसल हो गया, पढ़ें

केस एवं कानूनी सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया (दिल्ली उच्च न्यायालय)
संबंधित थानापार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली
आरोपी पर आरोपजज और सिविल सर्वेंट का प्रतिरूपण (Impersonation) एवं संवेदनशील डेटा चोरी
अदालत का फैसलाअग्रिम जमानत खारिज; DCP को मामले में पुलिस लापरवाही की जांच के आदेश

Impersonated Men: दिल्ली हाईकोर्ट ने पटना हाई कोर्ट का जज और सिविल सर्वेंट (सिविल सेवा अधिकारी) बनकर संवेदनशील व गोपनीय जानकारी हासिल करने के आरोपी मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज कर दी है।

न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि आरोपी के खिलाफ लगभग एक दर्जन (12) प्राथमिकियां (FIRs) दर्ज हैं और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) तक से उसकी अग्रिम जमानत खारिज हो चुकी है, फिर भी दिल्ली पुलिस ने उसे अब तक गिरफ्तार नहीं किया है।

उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियां और आदेश

  1. “आरोपी को मदद दी जा रही है”: कोर्ट ने पुलिस की निष्क्रियता पर संदेह जताते हुए कहा:हाई कोर्ट की टिप्पणी: “सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार न करना यह आभास देता है कि आरोपी की मदद की जा रही है और ‘दाल में कुछ काला है’ (There is something more that meets the eye)।”
  2. DCP को आदेश की कॉपी भेजने का निर्देश: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ स्थायी वकील (Senior Standing Counsel) के माध्यम से संबंधित पुलिस उपायुक्त (DCP) को इस आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया ताकि मामले में आवश्यक जांच व दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
  3. वकील की अजीब दलील खारिज: आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि 2024 में जमानत अर्जी खारिज होने और सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद भी पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया, जिससे सिद्ध होता है कि पुलिस को उसकी हिरासत की आवश्यकता ही नहीं है।
    • पीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आरोपी एक अभ्यस्त अपराधी (Habitual Offender) है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है, इसलिए अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

मामला क्या है?

  • आरोपी: मनोज कुमार झा (Manoj Kumar Jha)।
  • आरोप: पटना उच्च न्यायालय का जज और भारतीय सिविल सेवा का वरिष्ठ अधिकारी बनकर विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों को कॉल करना और उनसे संवेदनशील व गोपनीय डेटा/सूचनाएं हासिल करना।
  • संबंधित केस: दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट (Parliament Street) थाने में वर्ष 2024 में दर्ज प्राथमिकी (FIR)।
  • सरकारी वकील का रुख: दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सार्वजनिक अभियोजक (APP) अमित अहलावत ने भी स्वीकार किया और चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार करने के कदम नहीं उठाए।

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