Sexual Assault: केरल हाईकोर्ट ने पॉक्सो कानून (POCSO Act) के तहत दर्ज मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या की है।
58 वर्षीय आरोपी अबूबकर की अपील पर सुनवाई
हाईकोर्ट के जस्टिस ए. बदरुद्दीन की पीठ ने यह निर्णय 58 वर्षीय आरोपी अबूबकर (Aboobacker) की अपील पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही डॉक्टरी (Medical) और शरीर रचना विज्ञान (Anatomical) की दृष्टि से ‘चेस्ट’ (Chest/छाती) और ‘ब्रेस्ट’ (Breast/स्तन) के बीच अंतर होता है, लेकिन यौन अपराधों के मामलों में यदि कोई बच्चा कहता है कि आरोपी ने यौन मंशा से उसकी ‘चेस्ट’ को पकड़ा, तो इसका अर्थ ‘ब्रेस्ट’ ही माना जाएगा और यह धारा 7 के तहत यौन हमले (Sexual Assault) के दायरे में आएगा।
मामला क्या था?: 12 साल के बच्चे से यौन उत्पीड़न का विवाद
घटना: मई 2022 में मलप्पुरम जिले में 12 साल का एक लड़का दुकान से मच्छर भगाने वाली दवा खरीदने गया था। आरोपी ने पीछे से आकर बच्चे का पेट और छाती (Chest) पकड़ी, उसका हाथ पकड़ा और ₹50 का लालच देकर पास के खाली मकान में चलने को कहा। बच्चा किसी तरह भाग निकला और घर जाकर माता-पिता को घटना बताई।
निचली अदालत का फैसला: स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को गंभीर यौन हमले (Aggravated Sexual Assault – Section 9/10) का दोषी माना और 7 साल के कठोर कारावास तथा ₹50,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
आरोपी की दलील: हाई कोर्ट में अपील करते हुए आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि केवल ‘चेस्ट’ छूना पॉक्सो की धारा 7 के तहत यौन हमला नहीं है क्योंकि मेडिकल दृष्टि से ‘चेस्ट’ और ‘ब्रेस्ट’ अलग हैं। इसके अलावा, अपराध बार-बार (Repeatedly) नहीं किया गया था, इसलिए ‘Aggravated’ की धारा लागू नहीं होती।
हाई कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष
‘Chest’ और ‘Breast’ के तकनीकी अंतर पर विराम
अदालत ने आरोपी के वकील द्वारा दिए गए मेडिकल और शारीरिक अंतर के तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: “यद्यपि दोनों शब्दों के बीच एक स्पष्ट चिकित्सकीय अंतर है, लेकिन यौन अपराधों से जुड़े मामलों में सामान्य रूप से ‘chest’ शब्द का प्रयोग ‘breast’ के समानार्थी (Synonym) के रूप में ही किया जाता है। जब कोई बच्चा कहता है कि यौन इरादे से उसकी छाती पकड़ी गई, तो इसका एकमात्र तार्किक अर्थ यही निकाला जा सकता है कि आरोपी ने पॉक्सो एक्ट की धारा 7 के तहत यौन हमला किया है।”
धारा 9(l) के तहत ‘गंभीर अपराध’ (Aggravated Assault) रद्द
हालांकि, हाई कोर्ट ने आरोपी के दूसरे तर्क को स्वीकार कर लिया। अदालत ने माना कि चुंकि यह घटना केवल एक बार हुई थी और अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि यह अपराध बार-बार या दोहराया गया था, इसलिए धारा 9(l) के तहत ‘गंभीर यौन हमले’ की सजा बरकरार नहीं रखी जा सकती।
सजा में कटौती
अदालत ने विशेष पॉक्सो कोर्ट द्वारा दी गई धारा 9/10 की सजा को रद्द करते हुए आरोपी को धारा 7/8 (साधारण यौन हमला) के तहत दोषी ठहराया।
सजा: 7 साल के कठोर कारावास को घटाकर 3 साल कर दिया गया।
जुर्माना: ₹50,000 से घटाकर ₹5,000 कर दिया गया।
केस मैट्रिक्स: Aboobacker v. State of Kerala & Anr.
| विधिक और प्रक्रियात्मक पहलू | विवरण / हाई कोर्ट का फैसला |
| मामले का नाम | अबूबकर बनाम केरल राज्य एवं अन्य (Aboobacker v. State of Kerala & Anr.) |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| माननीय पीठ | जस्टिस ए. बदरुद्दीन (Justice A. Badharudeen) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | पॉक्सो में बच्चे द्वारा ‘Chest’ शब्द का प्रयोग ‘Breast’ ही माना जाएगा। |
| बदला गया निर्णय | धारा 9(l)/10 (Aggravated Assault) से बदलकर धारा 7/8 (Sexual Assault)। |
| संशोधित सजा | 3 वर्ष का कठोर कारावास + ₹5,000 जुर्माना। |

