Friday, September 18, 2026
HomeHigh CourtKarnataka HC: बेंगलुरु का प्रतिष्ठित सेंचुरी क्लब…सूचना का अधिकार (RTI) कानून लागू

Karnataka HC: बेंगलुरु का प्रतिष्ठित सेंचुरी क्लब…सूचना का अधिकार (RTI) कानून लागू

Karnataka HC: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा, बेंगलुरु का प्रतिष्ठित सेंचुरी क्लब सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत “सार्वजनिक प्राधिकरण” की श्रेणी में आता है।

महाराजा से मिली थी 7.5 एकड़ जमीन

कोर्ट ने अहम फैसला क्लब को 1913 में मैसूर के तत्कालीन महाराजा से मिली 7.5 एकड़ जमीन के आधार पर दिया है। न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने क्लब की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कर्नाटक सूचना आयोग के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि क्लब को RTI कानून के तहत जानकारी देनी होगी, क्योंकि उसे राज्य की ओर से महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिली है।

कोर्ट ने कहा- जमीन के बिना क्लब का अस्तित्व ही नहीं

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “जिस जमीन पर क्लब बना है, वह राज्य की ओर से दी गई आर्थिक मदद के बराबर है। यह मदद तत्कालीन महाराजा ने दी थी, जो उस समय राज्य का प्रतिनिधित्व करते थे। इसलिए RTI कानून के प्रावधान क्लब पर लागू होते हैं।”कोर्ट ने यह भी कहा कि क्लब का पूरा अस्तित्व इसी जमीन पर आधारित है। क्लब की सभी सुविधाएं और लाभ इसी परिसर में मौजूद हैं। “अगर यह जमीन न होती, तो क्लब का संचालन ही संभव नहीं होता,” कोर्ट ने कहा।

सदस्यों के योगदान की दलील खारिज

क्लब ने यह तर्क दिया था कि वह केवल अपने सदस्यों के योगदान से चलता है, इसलिए वह सार्वजनिक संस्था नहीं है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि क्लब की जमीन की वर्तमान बाजार कीमत के मुकाबले सदस्यों का योगदान बहुत कम है। इसलिए क्लब की निर्भरता जमीन पर ही है।

RTI आवेदन से शुरू हुआ था मामला

यह मामला 2012 में शुरू हुआ था, जब अधिवक्ता एस. उमापति ने RTI कानून की धारा 4 के तहत क्लब से कुछ दस्तावेज मांगे थे। क्लब ने यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि वह सार्वजनिक संस्था नहीं है। इसके बाद उमापति ने कर्नाटक सूचना आयोग का रुख किया। आयोग ने 2018 में क्लब को जानकारी देने का आदेश दिया, जिसे क्लब ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

महाराजा की निजी संपत्ति नहीं थी जमीन: कोर्ट

सुनवाई के दौरान क्लब ने कहा कि यह जमीन महाराजा की निजी संपत्ति थी और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से क्लब को दी थी। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि क्लब यह साबित नहीं कर पाया कि जमीन महाराजा की निजी थी। “यह जमीन मैसूर राज्य की संपत्ति थी, इसलिए यह सरकारी अनुदान माना जाएगा। अंत में हाईकोर्ट ने सूचना आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए क्लब को RTI आवेदन के तहत जानकारी देने का निर्देश दिया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
scattered clouds
28 ° C
28 °
28 °
78 %
2.6kmh
47 %
Fri
29 °
Sat
35 °
Sun
36 °
Mon
35 °
Tue
35 °

Recent Comments