Saturday, August 15, 2026
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Khoj Khabar Case: टीवी एंकर ने कहा-मैं सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ रहा था…वह इसे एडिट नहीं कर सकता, 20 साल तक चला केस

Khoj Khabar Case: कलकत्ता हाई कोर्ट ने दो दशक पुराने एक मानहानि (Defamation) मामले का निपटारा कर दिया है। इसमें एक टीवी प्रोग्राम खोज खबर ने बिजली कंपनी CESC लिमिटेड को “तुगलकी कंपनी” कहा था और उसके कर्मचारियों को ‘राक्षस’ व ‘आतंकवादी’ ओसामा बिन लादेन की पृष्ठभूमि (Backdrop) के साथ दिखाया था।

बिजली कंपनी ने ‘आकाश बांग्ला’ चैनल पर मानहानि केस किया

हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव ने बिजली कंपनी CESC लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। कंपनी ने ‘आकाश बांग्ला’ चैनल पर प्रसारित होने वाले शो “खोज खबर” के प्रोडक्शन हाउस (3 Cheers Entertainments), डायरेक्टर और एंकर के खिलाफ मानहानि का केस किया था।

शो में क्या कहा गया था? (The Allegations)

  • “तुगलकी कंपनी”: 12 मार्च 2004 को प्रसारित कार्यक्रम में एंकर और डायरेक्टर ने दावा किया कि वे CESC की ‘माफियागिरी’ और ‘गुंडागर्दी’ को खत्म करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
  • अपमानजनक चित्रण: कार्यक्रम में कंपनी के एक असिस्टेंट मैनेजर को कार्टून के जरिए एक ‘राक्षसी व्यक्तित्व’ (Devilish Personality) के रूप में दिखाया गया।
  • आतंकवादी लिंक: शो के दौरान कंपनी के कर्मचारियों को ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकवादियों के बैकड्रॉप के साथ जोड़कर दिखाया गया, जिसे कोर्ट ने “जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना” माना।
  • जुलुमबाजी और चोर: कंपनी की गतिविधियों को जुलुमबाजी और कंपनी को बड़ा चोर कहकर संबोधित किया गया था।

एंकर की सफाई: “मैं सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ रहा था”

  • प्रोग्राम के एंकर ने कोर्ट में अपना बचाव किया।
  • पेशेवर भूमिका: वह केवल एक प्रोफेशनल एंकर और एक्टर है। उसे जो स्क्रिप्ट दी गई, उसने वही पढ़ी।
  • कोई संपादन अधिकार नहीं: उसके पास स्क्रिप्ट को एडिट करने या बदलने का कोई अधिकार नहीं था, वह केवल डायरेक्टर के निर्देशों का पालन कर रहा था।

हाई कोर्ट का रुख और फैसला

  • कोर्ट ने माना कि पूरे प्रोग्राम की भाषा अपमानजनक और गाली-गलौज वाली थी। हालांकि, केस की उम्र और वर्तमान स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने नरमी बरती।
  • बिना शर्त माफी: प्रोडक्शन हाउस, डायरेक्टर और एंकर ने कोर्ट में अपनी गलती मानते हुए “बिना शर्त माफी” (Unconditional Apology) मांगी, जिसे कंपनी ने स्वीकार कर लिया।
  • बीते 15 साल: कोर्ट ने नोट किया कि यह शो पिछले 15 सालों से ऑफ-एयर है और प्रोग्राम के डायरेक्टर अब एक वरिष्ठ नागरिक हैं जो सक्रिय पत्रकारिता छोड़ चुके हैं।
  • टोकन हर्जाना (Token Damages): कोर्ट ने माफी को स्वीकार करते हुए डायरेक्टर, एंकर और प्रोडक्शन हाउस को ₹1,000-₹1,000 का प्रतीकात्मक हर्जाना और ₹5,000 कानूनी खर्च के रूप में कंपनी को देने का निर्देश दिया।

निष्कर्ष: प्रेस की आजादी और जिम्मेदारी

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि मीडिया का काम ‘सच्चाई’ सामने लाना है, लेकिन “गुड फेथ” (अच्छे इरादे) के नाम पर किसी को ‘राक्षस’ या ‘आतंकवादी’ के साथ जोड़कर दिखाना प्रेस की आजादी का दुरुपयोग है। मानहानि के मामलों में तथ्यों की सत्यता और भाषा की मर्यादा सर्वोपरि है।

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