Saturday, September 19, 2026
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KL HC: यदि कोई समुदाय शिक्षा में पिछड़ा माना गया, तो रोजगार में अलग नहीं मान सकते..कर्नाटक सरकार को हिदायत

KL HC: कर्नाटक हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि किसी एकल समुदाय को शिक्षा और रोजगार के लिए दो अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों में नहीं रखा जा सकता।

बालाजीगा/बनाजीगा समुदाय को ग्रुप ब्री में वर्गीकृत करें

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने हाल ही में इस मामले में फैसला सुनाते हुए कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया कि बालाजीगा/बनाजीगा समुदाय को शिक्षा और रोजगार दोनों के लिए समान रूप से “ग्रुप बी” में वर्गीकृत किया जाए। यह फैसला कोल्लीगल तालुक (पूर्ववर्ती मैसूर ज़िले) की निवासी वी. सुमित्रा द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बालाजीगा/बनाजीगा समुदाय के वर्गीकरण को चुनौती दी थी। अदालत ने यह पाया कि राज्य का वर्तमान वर्गीकरण, जिसमें समुदाय को शिक्षा के लिए ग्रुप बी (अनुच्छेद 15(4) के अंतर्गत) और रोजगार के लिए ग्रुप डी (अनुच्छेद 16(4) के अंतर्गत) में रखा गया है, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है।

ओबीसी कोटे के तहत प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका बनी थी सुमित्रा

सुमित्रा को 1993 में ओबीसी कोटे के तहत प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका के रूप में नियुक्त किया गया था क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि उनकी जाति ग्रुप बी में आती है। हालांकि, 1996 में उन्हें एक नोटिस प्राप्त हुआ जिसमें कहा गया कि रोजगार के लिए उनका समुदाय ग्रुप डी में आता है, जिससे उनकी जाति प्रमाण पत्र नौकरी में आरक्षण के लिए अमान्य घोषित कर दी गई। विभागीय अपीलों और कर्नाटक प्रशासनिक अधिकरण में राहत न मिलने के बाद, सुमित्रा को 1986 की एक सरकारी अधिसूचना का पता चला जिसमें इस दोहरे वर्गीकरण का उल्लेख था। सुमित्रा ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) का उद्देश्य एक समान है सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना और राज्य का यह वर्गीकरण परस्पर विरोधाभासी है।

अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत

न्यायमूर्ति गोविंदराज ने उनके तर्क को सही ठहराते हुए कहा, “अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत आरक्षण के मामलों में भी समान व्यवहार की मांग करता है। एक ही समुदाय को अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग समूहों में नहीं रखा जा सकता, यह विभाजन अपने आप में भेदभावपूर्ण है। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह का भेदभाव संविधान द्वारा प्रदत्त संरक्षणों का उल्लंघन करता है और सकारात्मक भेदभाव (affirmative action) का क्रियान्वयन समान रूप से किया जाना चाहिए। “यदि कोई समुदाय शिक्षा के लिए पिछड़ा माना गया है, तो रोजगार के लिए उसे अलग नहीं माना जा सकता है।

आरक्षण के दावे को खारिज करने वाले आदेशों को रद्द किया

हाईकोर्ट ने इस दोहरे वर्गीकरण को “शुरुआत से ही अमान्य” (void ab initio) घोषित किया और सुमित्रा के रोजगार में ग्रुप बी आरक्षण के दावे को खारिज करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया।इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सुमित्रा को बतौर प्राथमिक विद्यालय शिक्षिका के रूप में कार्यरत रखा जाए, क्योंकि वह ग्रुप बी आरक्षण के तहत पात्र हैं।

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