Tuesday, September 22, 2026
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Marital Cruelty: बिना ठोस कारण के पति के परिवार से अलग रहने की मांग क्रूरता…पति दुबई में करता है काम और पत्नी रहती है यहां पर, जानिए केस

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति सतीश नीनन एवं न्यायमूर्ति पी. कृष्णा कुमार (केरल उच्च न्यायालय)
कानूनी धाराहिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) (क्रूरता के आधार पर तलाक)
मुख्य कानूनी सिद्धांतबिना किसी वाजिब कारण के सास-ससुर/पारिवारिक घर को छोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।
अदालत का निर्णयफैमिली कोर्ट का आदेश रद्द; पति की अपील स्वीकार कर तलाक की डिग्री प्रदान की गई।

Marital Cruelty: केरल हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायमूर्ति सतीश नीनन और न्यायमूर्ति पी. कृष्णा कुमार की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए फैसला दिया। कहा है कि यदि पत्नी बिना किसी उचित या न्यायसंगत कारण के पति पर उसके परिवार/माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाती है, तो यह अपने आप में वैवाहिक क्रूरता (Marital Cruelty) माना जाएगा और इसके आधार पर पति तलाक (Divorce) पाने का हकदार है।

मामला क्या था? (Background of the Case)

  1. शादी और पारिवारिक पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता (पति) और महिला का विवाह वर्ष 2015 में हुआ था। उस समय पति दुबई में काम करता था। विवाह के एक हफ्ते बाद दंपति दुबई चले गए, जहां वे किराए के मकान में पति के माता-पिता के साथ रहते थे।
  2. अलग रहने की शर्त: 2016 में गर्भावस्था के अंतिम चरण के दौरान पत्नी भारत लौट आई। बेटी के जन्म के बाद उसने दुबई वापस लौटने से इनकार कर दिया और शर्त रखी कि वह तभी वापस आएगी जब पति उसके लिए माता-पिता से अलग दो कमरों का (2-BHK) फ्लैट व्यवस्थित करेगा।
  3. पारिवारिक विवाद और कॉल रिकॉर्डिंग: पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने बिना उसे सूचित किए बच्चे का नामकरण संस्कार भी कर दिया। हालांकि पत्नी ने दावा किया था कि उसकी सास उनके रिश्तों में हस्तक्षेप करती थी, लेकिन पति के पिता के साथ हुई एक टेलीफोनिक बातचीत (Call Recording) में पत्नी ने खुद स्वीकार किया था कि उसकी सास के साथ उसका कोई विवाद नहीं था।
  4. फैमिली कोर्ट का फैसला और हाई कोर्ट में अपील: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) के तहत पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पति ने केरल हाई कोर्ट का रुख किया।

उच्च न्यायालय के मुख्य विधिक निष्कर्ष

बिना कारण अलग रहने की मांग क्रूरता

अदालत ने टेलीफोनिक बातचीत के साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पाया कि सास द्वारा दुर्व्यवहार का पत्नी का दावा गलत था।

हाई कोर्ट की टिप्पणी: “बिना किसी पर्याप्त या वैध कारण के पति के परिवार से अलग रहने की मांग करना, अपने आप में क्रूरता का कृत्य (Act of Cruelty) है।”

लंबे समय से अलग रहना (9 वर्षों का अलगाव)

पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि यह जोड़ा पिछले 9 वर्षों से अधिक समय से अलग रह रहा था और उनके बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह से खत्म हो चुके थे। अदालत ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए क्रूरता के आधार पर पति की तलाक की याचिका को स्वीकार कर लिया।

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