केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव (दिल्ली उच्च न्यायालय) |
| संबंधित कानून | Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act, 1971, POCSO Act, 2012 (Section 19/21) एवं BNS/IPC |
| मुख्य कानूनी विवाद | क्या नाबालिग मरीज की खुद की सहमति से कराया गया गर्भपात MTP एक्ट के तहत वैध है? |
| मुख्य विधिक सिद्धांत | MTP एक्ट के तहत नाबालिग के लिए केवल अभिभावक (Guardian) की सहमति अनिवार्य है। नाबालिग का यौन शोषण/गर्भावस्था का पता चलने पर डॉक्टर के लिए POCSO के तहत रिपोर्ट करना बाध्यकारी है। |
| अदालत का निर्णय | डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक केस रद्द करने से इनकार; ट्रायल जारी रखने का आदेश। |
Minor Consent: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि चिकित्सकीय गर्भपात अधिनियम (MTP Act) के तहत किसी नाबालिग (Minor) की स्वतंत्र सहमति (Consent) से गर्भपात नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने फैसला सुनाया कि कानून को यह तय करना होगा कि एक डॉक्टर की पेशेवर जिम्मेदारी कहाँ समाप्त होती है और किसी अपराध की सूचना देने का नागरिक कर्तव्य (Failure to Report) कहाँ से शुरू होता है। अदालत ने वैधानिक नियमों और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत रिपोर्टिंग दायित्वों का पालन किए बिना एक नाबालिग का गर्भपात करने वाली डॉक्टर के खिलाफ जारी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- नाबालिग की सहमति कानून की नजर में अधूरी:“MTP अधिनियम किसी नाबालिग को स्वतंत्र रूप से गर्भपात के लिए सहमति देने में सक्षम नहीं मानता। वर्तमान मामले में, कभी कोई अभिभावक (Guardian) सहमति नहीं मांगी गई… एक नाबालिग के हस्ताक्षर MTP अधिनियम द्वारा अनिवार्य वैधानिक सहमति की पूर्ति नहीं करते।”
- MTP नियम 1 (Form I) और POCSO रिपोर्टिंग का महत्व: अदालत ने रेखांकित किया कि MTP नियमों के तहत ‘फॉर्म I’ (Form I) केवल डॉक्टर द्वारा स्वीकृति दर्ज करने का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें दुष्कर्म (Rape) जैसे कारणों का उल्लेख होना आवश्यक है। डॉक्टर की चुप्पी केवल धोखा खा जाने का निर्दोष परिणाम नहीं हो सकती, बल्कि अपराध की जानकारी छिपाना भी हो सकता है।
- MTP कानून की सीमाएं: अदालत ने कहा कि MTP एक्ट मांग पर गर्भपात कराने का अनियंत्रित लाइसेंस नहीं देता, बल्कि यह उन विशिष्ट परिस्थितियों को तय करता है जहाँ गर्भपात कराना अपराध की श्रेणी से बाहर रहता है।
मामला क्या था? (Case Background)
- घटनाक्रम और आरोप (2019)
- एक 16 वर्षीय नाबालिग पीड़िता ने यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) का शिकार होने के बाद गर्भवती होने पर जुलाई 2019 में एक मेडिकल सेंटर में 6 सप्ताह का गर्भपात कराया था।
- शुरुआत में अस्पताल के रिकॉर्ड में उसकी उम्र 20 वर्ष दर्ज की गई थी। बाद में पीड़िता ने विरोध याचिका (Protest Petition) दायर कर आरोप लगाया कि साजिश के तहत उसके फर्जी हस्ताक्षर कराकर और बिना पहचान/आयु प्रमाण लिए उसका अवैध गर्भपात किया गया।
- जांच में लापरवाही
- पूछताछ के दौरान डॉक्टर ने स्वीकार किया कि मरीज का कोई आयु या पहचान पत्र (ID Proof) नहीं लिया गया था और MTP नियमों के तहत अनिवार्य ‘फॉर्म I’ को पूरा नहीं भरा गया था। इसके आधार पर पुलिस ने MTP एक्ट, IPC और POCSO एक्ट के तहत पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) दाखिल की।
- डॉक्टर (याचिकाकर्ता) के तर्क
- डॉक्टर के वकीलों ने तर्क दिया कि अस्पताल में मरीज की उम्र 20 वर्ष बताई गई थी और डॉक्टर को उसके नाबालिग होने की कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, शुरुआत में पीड़िता ने डॉक्टर पर कोई आरोप भी नहीं लगाया था।
- अभियोजन पक्ष (Prosecution) की दलील
- अभियोजन ने कहा कि कानून के अनुसार नाबालिग के मामले में केवल अभिभावक (Guardian) की सहमति ही मान्य है। नाबालिग की शारीरिक उपस्थिति या सहमति वैधानिक अभिभावक की सहमति का स्थान नहीं ले सकती।
⚖️ हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
हाई कोर्ट ने माना कि मेडिकल सेंटर में किसी ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि कानूनन अभिभावक की सहमति जरूरी थी या नहीं। नाबालिग की सहमति MTP एक्ट की वैधानिक शर्तों को पूरा नहीं करती।
अदालत ने डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) को निर्देश दिया कि वह बिना किसी प्रभाव के, सबूतों के आधार पर कानून के अनुसार मुकदमे की सुनवाई (Trial) आगे बढ़ाए।

