केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (August 2026 Order) |
| माननीय न्यायाधीश | न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल (पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय) |
| लागू नया कानून | BNSS की धारा 482(2) (अग्रिम जमानत के प्रावधान) |
| घटना स्थल | फतेहाबाद, हरियाणा |
| अदालत का निर्णय | आरोपी को जांच में शामिल होने और कस्टडी की जरूरत न होने के आधार पर अग्रिम जमानत मंजूर। |
Misbehave With Dog: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने कानून (Law) के एक छात्र का कथित रूप से अपहरण करने, उसे निर्वस्त्र कर उत्पीड़ित करने और जबरन वसूली करने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को स्वीकार कर लिया है।
न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की पीठ ने 8 अगस्त 2026 के अपने आदेश में जुलाई में दिए गए अंतरिम जमानत के आदेश को स्थायी (Absolute) करते हुए स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो पीड़ित छात्र कानून के तहत उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होगा। यह विवाद आरोपी द्वारा आवारा कुत्तों की पिटाई के विरोध से शुरू हुआ था। न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा: याचिकाकर्ता जांच में शामिल हो चुका है, और राज्य (हरियाणा) के विद्वान वकील के बयान को ध्यान में रखते हुए, वर्तमान याचिका को स्वीकार किया जाता है। 06.07.2026 के आदेश को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482(2) के प्रावधानों के अनुपालन के अधीन स्थायी किया जाता है।
घटनाक्रम और मामले की पृष्ठभूमि (Case Details)
- विवाद की शुरुआत (31 मार्च 2026)
- कानून का छात्र, जो एक पशु प्रेमी है, ने एक वीडियो देखा जिसमें आरोपी आवारा कुत्तों को बेरहमी से पीट रहा था।
- छात्र आरोपी के घर गया और उससे कुत्तों को न पीटने का अनुरोध किया। इस पर आरोपी उग्र हो गया और उसने अपने साथियों के साथ मिलकर छात्र को सबक सिखाने की धमकी दी।
- अपहरण और अमानवीय उत्पीड़न के आरोप
- आरोपी और उसके साथियों ने छात्र को जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाया और फतेहाबाद के ऑटो मार्केट ले गए।
- छात्र का आरोप है कि आरोपियों ने उसे पीटा, जबरन निर्वस्त्र किया, उसे हीटिंग रॉड पर पेशाब करने के लिए मजबूर किया और बिजली के झटके देने की धमकी दी।
- आरोपियों ने उससे ₹50,000 की मांग की, GPay के माध्यम से ₹1,000 ट्रांसफर करवाए, उसके पहचान पत्र के विवरण लिए और जबरन हस्ताक्षर करवाकर वीडियो बनाया कि वह अपनी मर्जी से आया था।
- पुलिस कार्रवाई (फतेहाबाद पुलिस स्टेशन)
- शुरुआत में डरे हुए छात्र ने चुप्पी साधे रखी, लेकिन बाद में परिवार के दबाव में 1 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
- पुलिस ने शुरुआत में चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने, अपहरण, जबरन वसूली और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज किया। बाद में जांच के दौरान कुछ धाराएं हटाई गईं और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) की धारा जोड़ी गई।
🏛️ हाई कोर्ट में दलीलें और जमानत का आधार
- याचिकाकर्ता (आरोपी) के वकील (नरेंद्र एस. लक्की) की दलीलें
- यह विवाद केवल आवारा कुत्ते को लेकर हुई बहस से शुरू हुआ था।
- छात्र का कोई मेडिकल-लीगल एग्जामिनेशन (MLC/डॉक्टरी जांच) नहीं हुआ है जो मारपीट की पुष्टि करता हो।
- आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और अदालत के 6 जुलाई के निर्देशानुसार वह पूरी तरह से जांच में शामिल हो चुका है, इसलिए हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) की आवश्यकता नहीं है।
- राज्य सरकार (हरियाणा) का रुख
- राज्य के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि आरोपी जांच में शामिल हो गया है और अब उससे हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
- पीड़ित/शिकायतकर्ता के वकील की दलीलें
- पीड़ित के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी अभी भी शिकायतकर्ता को धमकियां दे रहा है। जब छात्र जिला अदालत फतेहाबाद में इंटर्नशिप कर रहा था, तब भी आरोपी के इशारे पर कुछ लोगों द्वारा उसे डराया-धमकाया गया था।
⚖️ अदालत का अंतिम निर्णय
हाई कोर्ट ने माना कि चूंकि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है और पुलिस ने उसकी कस्टडी की मांग नहीं की है, इसलिए उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 482(2) [पूर्व में CrPC धारा 438] के तहत अग्रिम जमानत दी जाती है। हालांकि, यदि वह गवाहों को डराने या शर्तों को तोड़ने का प्रयास करता है, तो पीड़ित उसकी जमानत रद्द कराने के लिए कानूनी कदम उठा सकता है।

