Friday, October 2, 2026
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Mumbai Attack: 26/11 हमला केस… बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू जुंदाल पर दिया बड़ा फैसला

Mumbai Attack: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल के खिलाफ बड़ा फैसला दिया है।

स्पेशल कोर्ट का 2018 का आदेश रद्द किया

अदालत ने आरोपी जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल की ओर से गोपनीय दस्तावेज मांगने की अर्जी को “फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी” (अर्थात बिना ठोस आधार की जांच) करार देते हुए स्पेशल कोर्ट का 2018 का आदेश रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति आर. एन. लड्ढा की एकलपीठ ने दिल्ली पुलिस, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की याचिकाओं को मंजूर करते हुए कहा कि निचली अदालत ने ऐसे दस्तावेज पेश करने का जो आदेश दिया था, वह “कानूनी रूप से अस्थिर और अनुचित” था। इस आदेश के चलते 2018 से रुकी हुई ट्रायल प्रक्रिया अब फिर से शुरू हो सकेगी।

मांगे गए दस्तावेज आरोपों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रखते

अदालत ने कहा कि जुंदाल द्वारा मांगे गए दस्तावेज जैसे पुलिस अधिकारियों के पासपोर्ट, फ्लाइट मैनिफेस्ट, इमिग्रेशन रिकॉर्ड और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आपात यात्रा दस्तावेज मामले के आरोपों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रखते। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ये दस्तावेज “न तो आवश्यक हैं और न ही प्रासंगिक”, बल्कि इनसे “ट्रायल भटक जाएगा” और बेवजह विवाद खड़ा होगा।

ट्रायल कोर्ट को निरर्थक जांच में समय नहीं लगाना चाहिए

हाईकोर्ट ने कहा, “ट्रायल कोर्ट को इस तरह की निरर्थक जांच में समय नहीं लगाना चाहिए था। आरोपी की मांग एक ‘फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी’ मात्र है।” जुंदाल ने दावा किया था कि उसे सऊदी अरब से अवैध रूप से हिरासत में लेकर भारत लाया गया, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपी न्यायिक हिरासत में है और अपने बचाव का पूरा अवसर पा चुका है, तो गिरफ्तारी की जगह का अब कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता।

अवैध हिरासत की बातें 26/11 हमले के केस से अलग

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुंदाल की कथित अवैध हिरासत की बातें दिल्ली पुलिस द्वारा जांचे गए एक अन्य केस (जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा की साजिश से जुड़ा मामला) से संबंधित हैं, न कि 26/11 हमले के केस से। हाईकोर्ट ने कहा, यह स्पष्ट है कि आरोपी द्वारा की गई कथित अवैध हिरासत की बातें वर्तमान मामले से संबंधित नहीं हैं। कोर्ट ने जोड़ा कि मुंबई पुलिस ने दिल्ली की सक्षम अदालत से आदेश लेकर कानूनी तरीके से जुंदाल की कस्टडी हासिल की थी, और आरोपी ने गिरफ्तारी को लेकर पहले कभी कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

गंभीर अपराधों में समय पर ट्रायल होना जरूरी

जस्टिस लड्ढा ने कहा कि इस तरह के गंभीर अपराधों में समय पर ट्रायल होना जरूरी है, ताकि न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। आरोपी का अनुरोध विलंबित, रणनीतिक और निराधार है, जिसका कोई कानूनी औचित्य नहीं है। जुंदाल पर आरोप है कि उसने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमलों की साजिश रची और पाकिस्तानी आतंकियों को हिंदी बोलने तथा मुंबई के रहन-सहन की ट्रेनिंग दी। 26/11 के इस भयावह हमले में 166 लोगों की जान गई थी, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। मुख्य आरोपी अजमल कसाब को 2010 में फांसी की सजा सुनाई गई थी और 2012 में उसे फांसी दी गई थी।

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