Thursday, September 17, 2026
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Necessity of arrest: सिर्फ आरोपों की गंभीरता गिरफ्तारी की वजह संभव नहीं…कैसे EOW मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी को बताया अवैध?

Necessity of arrest: दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को बड़ा झटका देते हुए दो आरोपियों की गिरफ्तारी को “पूरी तरह से अवैध” घोषित कर दिया है।

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट राज कुमार सिंह ने अपने आदेश में कानून का एक बड़ा सिद्धांत दोहराया कि आरोपों की गंभीरता अपने आप में गिरफ्तारी की वैधानिक आवश्यकता (Necessity of arrest) का विकल्प नहीं हो सकती। जब आरोपी व्यक्ति पुलिस के नोटिसों का पालन करते हुए लगातार जांच में शामिल हो रहे हैं, तो जांच अधिकारी (IO) को यह साबित करना होगा कि नोटिस या अन्य कानूनी कदमों के जरिए आगे की जांच क्यों नहीं बढ़ सकती थी। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस द्वारा पेश किए गए आधार गिरफ्तारी को सही साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे, क्योंकि दोनों ही आरोपी जांच में लगातार सहयोग कर रहे थे।

क्या था पूरा मामला? (सोलर एनर्जी टेंडर में जालसाजी का आरोप)

यह मामला सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के एक टेंडर से जुड़ा हुआ है।

क्या थे आरोप: ईओडब्ल्यू (EOW) थाने में दर्ज इस एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने टेंडर हासिल करने के लिए बैंक गारंटी और उससे जुड़े दस्तावेजों में धोखाधड़ी और जालसाजी (Forged/Fabricated Bank Guarantees) की थी।

पुलिस की मांग: पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों— रविंदर पाल सिंह चड्ढा उर्फ रविन चड्ढा और मनोज भैयासाहेब पोंगड़े को गिरफ्तार किया था। जांच अधिकारी (IO) ने उन्हें कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए एक दिन की पुलिस कस्टडी (Remand) मांगी थी।

कोर्ट का रुख: “जांच की वजह अलग है और गिरफ्तारी की वजह अलग”

अदालत ने पाया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश किया गया था और कस्टोडियल हिंसा (पुलिस प्रताड़ना) की कोई शिकायत नहीं थी। लेकिन, जब कोर्ट ने गिरफ्तारी की कानूनी वैधता को परखा, तो पुलिस की दलीलें पूरी तरह खारिज हो गईँ।

जज राज कुमार सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा, पुलिस ने गिरफ्तारी के जो आधार दिए हैं, वे मुख्य रूप से इस सौदे (Transaction) में आरोपियों की भूमिका और आगे की जांच की आवश्यकता को दर्शाते हैं। ये जांच के विषय हो सकते हैं, लेकिन ये नोटिस के अनुपालन के बाद गिरफ्तारी की जरूरत को पूरा नहीं करते। कानून को गिरफ्तारी के कारण (Reasons for arrest) चाहिए होते हैं, न कि केवल जांच के कारण (Reasons for investigation)।”

विश्लेषण: ‘अर्नेश कुमार’ गाइडलाइंस और 41A नोटिस का महत्व

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के ‘अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ के ऐतिहासिक फैसले और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (अब BNSS की संबंधित धाराओं) के सिद्धांतों को मजबूत करता है।

कानूनी और तकनीकी पहलूकोर्ट की व्याख्या और इसका कानूनी महत्व
जांच में पूर्ण सहयोगआरोपी चड्ढा के वकीलों (अधिवक्ता रजत भारद्वाज और दुष्यंत चौधरी) तथा पोंगड़े के वकीलों (अधिवक्ता वरुण चंडियोक और तरुण चंडियोक) ने साबित किया कि उनके मुवक्किल पुलिस के हर नोटिस पर हाजिर हुए थे।
कोई नया सबूत नहींपुलिस कोर्ट को यह बताने में नाकाम रही कि आरोपियों ने किसी नोटिस का उल्लंघन किया हो, या वे भागने की कोशिश कर रहे थे, या कोई ऐसी नई परिस्थिति सामने आई थी जिसके कारण अचानक गिरफ्तारी जरूरी हो गई।
अवैध गिरफ्तारी और रिहाईकोर्ट ने पुलिस की एक दिन की कस्टडी की अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया और दोनों आरोपियों को तुरंत (Forthwith) जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया।
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