Friday, June 12, 2026
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Age Not Match: मैट्रिमोनी प्रोफाइल पर जन्मतिथि गलत बताना धोखाधड़ी…पीड़िता के पति के 7 वर्ष उम्र छिपाने का क्या राज रहा?

Age Not Match: वैवाहिक वेबसाइटों पर गलत जानकारी देकर शादी रचाने वालों को लेकर तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है।

पीड़िता की तलाक की डिक्री मंजूर कर ली

हाईकोर्ट के जस्तित के. लक्ष्मण और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की खंडपीठ ने पीड़िता की अपील को स्वीकार करते हुए उनकी शादी को पूरी तरह से भंग (Dissolve) कर दिया और तलाक की डिक्री (Decree of Divorce) मंजूर कर ली। अदालत ने कहा है कि मैट्रीमोनी पोर्टल पर अपनी उम्र या जन्मतिथि (Date of Birth) गलत बताना ‘धोखाधड़ी’ (Fraud) के दायरे में आता है, क्योंकि इसके कारण पीड़ित पक्ष गलत विवरणों के आधार पर कुंडली मिलान (Horoscope Matching) जैसी महत्वपूर्ण वैवाहिक रस्मों को पूरा करता है।

क्या था पूरा मामला? (7 साल छिपा ली उम्र)

यह मामला 24 अगस्त 2018 को ‘telugumatrimony.com’ के जरिए तय हुई एक शादी से जुड़ा हुआ है:

छिपाई असली उम्र: शादी तय होते समय पति ने मैटीमोनी वेबसाइट पर अपनी जन्मतिथि 9 फरवरी 1981 बताई थी, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 9 फरवरी 1974 थी। यानी उसने अपनी उम्र में 7 साल का हेरफेर किया था और वह पत्नी से 9 साल बड़ा था।

कुंडली मिलान की बुनियाद: याचिकाकर्ता पत्नी ने कोर्ट को बताया कि वह एक रूढ़िवादी/पारंपरिक (Orthodox) परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां कुंडली मिलान को शादी के लिए सर्वोपरि माना जाता है। पति द्वारा दी गई गलत जन्मतिथि के आधार पर ही परिवार ने कुंडली मिलाई थी, जो ‘सकारात्मक’ आई। उसने शादी के लिए सिर्फ इसलिए हां कहा था क्योंकि दोनों एक ही उम्र के ग्रुप के थे, दोनों सरकारी नौकरी में थे और उनकी कुंडली मैच कर रही थी।

सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में खुला राज: शादी के कुछ महीने बाद नवंबर 2018 में जब यह जोड़ा शादी का पंजीकरण (Marriage Registration) कराने सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय पहुंचा, तब दस्तावेजों को देखकर पत्नी के सामने पति की असली उम्र का खुलासा हुआ। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके साथ “धोखाधड़ी और छलावा (Fraud and Cheating)” किया गया है।

फैमिली कोर्ट का फैसला हाई कोर्ट ने पलटा

पीड़ित पत्नी ने रंगारेड्डी के फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 12(1)(c) के तहत धोखाधड़ी के आधार पर शादी को ‘शून्य’ (Nullity) घोषित करने की याचिका दायर की थी। लेकिन फैमिली कोर्ट ने 3 मई 2024 को उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील दायर की।

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट को देखते हुए टिप्पणी की

“रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य यह साफ दर्शाते हैं कि अपीलकर्ता (पत्नी) और प्रतिवादी (पति) दोनों ही अब एक साथ वैवाहिक जीवन बिताने में कोई रुचि नहीं रखते हैं। इसलिए, इनके दोबारा एक साथ आने (Reunion) की कोई गुंजाइश नहीं बची है।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पत्नी ने पति के खिलाफ राजेंदरनगर थाने में आपराधिक मुकदमा और घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का केस भी दर्ज करा रखा है, जिसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

स्त्रीधन (सोना) और गुजारे भत्ते (Alimony) पर कोर्ट की व्यवस्था

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सेटलमेंट की बात तो की, लेकिन सोने के गहनों की वापसी और पैसों के लेनदेन पर विवाद बना रहा। पत्नी आपराधिक मामले वापस लेने को तैयार थी बशर्ते उसे उचित गुजारा भत्ता और उसका सोना वापस मिले।

इस पर हाई कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किए

तथ्यों का विवाद (Disputed Facts): कोर्ट ने कहा कि सोने के गहनों (स्त्रीधन) की मात्रा को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है, जिसे इस अपील के दौरान तय नहीं किया जा सकता क्योंकि इसके लिए फैमिली कोर्ट के सामने सबूत पेश नहीं किए गए थे।

स्थायी गुजारे भत्ते के लिए अलग आवेदन जरूरी (Section 25 HMA): हाई कोर्ट ने साफ किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारे भत्ते (Permanent Alimony) की मांग करने के लिए एक अलग और स्वतंत्र आवेदन (Separate Application) देना अनिवार्य है। बिना औपचारिक आवेदन के कोर्ट सीधे तौर पर गुजारा भत्ता तय नहीं कर सकता।

विश्लेषण: हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 12(1)(c) और ‘धोखाधड़ी’

यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी नजीर है जो वैवाहिक विज्ञापनों में अपनी उम्र, आय या वैवाहिक स्थिति को लेकर झूठ बोलते हैं।

कानूनी पहलू / धाराकानून की परिभाषा और इस केस में प्रभाव
धारा 12(1)(c) – HMAइसके तहत यदि शादी के लिए सहमति किसी भौतिक तथ्य (Material Fact) को छिपाकर या ‘धोखाधड़ी’ के जरिए ली गई हो, तो वह शादी कानूनन अमान्य (Voidable) की जा सकती है।
भौतिक तथ्य (Material Fact)उम्र, शिक्षा और जन्मतिथि वैवाहिक सहमति के लिए ‘भौतिक तथ्य’ माने जाते हैं। कुंडली मिलान के लिए गलत विवरण देना शादी की मूल सहमति को दूषित (Vitiate) करता है।
अदालत की राहतहाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए शादी को तुरंत खत्म करने का आदेश दिया।
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