Thursday, October 8, 2026
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Nidhi Companies: जनता से जुटाए गए ₹4,700 करोड़ के अंतिम उपयोग और मनी ट्रेल का पता लगाएं लिक्विडेटर; संपत्तियों की पहचान कर निवेशकों व जमाकर्ताओं के हित में करें वसूली

SFIO की जांच में हुए मुख्य खुलासे

  • विशाल वित्तीय धोखाधड़ी:SFIO की जांच रिपोर्ट (फरवरी 2025 में प्रस्तुत) के अनुसार, ग्रुप ने फिक्स्ड, रिकरिंग और सेविंग्स डिपॉजिट, कैपिटल कंट्रीब्यूशन और डिबेंचर के जरिए जनता से लगभग ₹4,700 करोड़ जुटाए थे।
  • पैसों की हेराफेरी (Fund Diversion):निवेशकों से लिए गए धन को समूह की विभिन्न फर्जी और संबंधित संस्थाओं में घुमाया गया। अंततः इस सार्वजनिक धन का उपयोग निदेशकों और भागीदारों के व्यक्तिगत उपयोग के लिए किया गया।
  • भ्रामक ब्याज दरें और निपुणता:समूह ने निवेशकों को लुभाने के लिए 9% से 18.18% तक की आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश की और गोल्ड-लोन व्यवसाय को अपने मुख्य चेहरे के रूप में प्रदर्शित किया। जब जमा राशि गोल्ड लोन से बहुत अधिक हो गई, तो उन्होंने निधियों (Nidhi Companies) और LLPs के माध्यम से अपना कारोबार पुनर्गठित किया और कई जमाकर्ताओं को कागजों पर ‘पार्टनर’ या ‘कैपिटल कंट्रीब्यूटर’ दर्शा दिया।

NCLT के प्रमुख आदेश और निर्देश

  1. फंड के अंतिम उपयोग (End-Use of Funds) को ट्रेस करना:NCLT ने लिक्विडेटर को निर्देश दिया कि वे SFIO की रिपोर्ट की जांच करें और जनता से जुटाए गए पैसों के अंतिम प्रवाह (Money Trail) का पता लगाएं।
  2. संपत्तियों की जब्ती और बहाली:इन पैसों से खरीदी गई सभी चल-अचल संपत्तियों की पहचान की जाए और जमाकर्ताओं तथा हितधारकों के लाभ के लिए उन्हें कानूनी रूप से जब्त और पुनर्प्राप्त किया जाए।
  3. दावों का सत्यापन (Claims Verification):लिक्विडेटर को निर्देश दिया गया है कि वे निवेशकों, लेनदारों और जमाकर्ताओं से दावों को आमंत्रित करें, उनका सत्यापन करें और उनका निपटारा करें।
  4. कानूनी आधार:NCLT ने पाया कि SFIO द्वारा प्रस्तुत सामग्री परिसमापन के लिए पर्याप्त थी। इसके अलावा, LLPs द्वारा लगातार 5 वित्तीय वर्षों तक अपने खाते, शोधन क्षमता विवरण (Statement of Solvency) और वार्षिक रिटर्न दाखिल न करना भी Winding Up का एक स्वतंत्र आधार बना।

कोच्चि: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), निधि कंपनियों और सीमित देयता भागीदारी (LLP) के माध्यम से आम जनता और निवेशकों से भारी ब्याज के प्रलोभन पर अवैध जमा (Unauthorised Public Deposits) जुटाने, कंपनियों के निगमित स्वरूप का दुरुपयोग कर जनता के पैसे का गबन करने, और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनियों के अनिवार्य समापन (Winding Up) पर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की कोच्चि पीठ ने ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।

न्यायिक सदस्य विनय गोयल और तकनीकी सदस्य रविचंद्रन रामासामी की पीठ ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) के माध्यम से केंद्र सरकार (कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय) द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 6 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। न्यायाधिकरण ने केरल उच्च न्यायालय से संबद्ध शासकीय समापक (Official Liquidator) को परिसमापक नियुक्त करते हुए निर्देश दिया कि वह SFIO की जांच रिपोर्ट का गहन परीक्षण करे, जनता से एकत्र किए गए पैसों के प्रवाह (Money Trail) और अंतिम उपयोग (End-use of funds) का पता लगाए और उन पैसों से खरीदी गई संपत्तियों की वसूली व कुर्की सुनिश्चित करे। न्यायाधिकरण ने बहुचर्चित पॉपुलर फाइनेंस ग्रुप (Popular Finance Group) से जुड़ी 14 कंपनियों और एलएलपी संस्थाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त (Wind up) करने का आदेश दिया है।

न्यायाधिकरण (NCLT) के प्रमुख निर्देश एवं विधिक टिप्पणियां

1. ‘फंड के प्रवाह और अंतिम उपयोग (End-use) का पता लगाएं लिक्विडेटर’ न्यायिक सदस्य विनय गोयल और तकनीकी सदस्य रविचंद्रन रामासामी की पीठ ने शासकीय समापक को व्यापक दायित्व सौंपते हुए स्पष्ट निर्देश दिया: “एसएफआईओ (SFIO) जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर उपलब्ध अन्य सामग्री का सूक्ष्म परीक्षण करें और जनता से एकत्र किए गए धन के प्रवाह (Flow) और उसके अंतिम उपयोग (End-use of funds) का पता लगाएं। ऐसे पैसों से अर्जित की गई सभी संपत्तियों और परिसंपत्तियों की पहचान करें और संबंधित संस्थाओं व उनके हितधारकों के लाभ के लिए उनकी वसूली, पुनर्प्राप्ति अथवा संरक्षण (Recovery, restoration or protection) हेतु उचित विधिक कार्यवाहियां शुरू करें।”

2. दावे आमंत्रित करने और अंतर-एजेंसी सहयोग का निर्देश:

  • लिक्विडेटर को निर्देश दिया गया है कि वह लेनदारों (Creditors), जमाकर्ताओं (Depositors), निवेशकों और अन्य हितधारकों से विधिवत दावे आमंत्रित करे, उनका सत्यापन (Verification) करे और न्यायसंगत निर्णय ले।
  • वसूली की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए लिक्विडेटर को एसएफआईओ (SFIO), कंपनी रजिस्ट्रार (ROC), बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य जांच एजेंसियों से प्रत्यक्ष सहायता और जानकारी प्राप्त करने की पूरी शक्ति दी गई है।
  • न्यायाधिकरण ने लिक्विडेटर को वसूली और परिसमापन की प्रगति पर समय-समय पर आवधिक रिपोर्ट (Periodic Progress Reports) प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

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SFIO की जांच में क्या खुलासे हुए? ₹4,700 करोड़ का वित्तीय ताना-बाना

एसएफआईओ द्वारा फरवरी 2025 में सौंपी गई अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर न्यायाधिकरण के समक्ष चौंकाने वाले वित्तीय खुलासे हुए:

  • कुल ₹4,700 करोड़ की भारी वसूली:
    • एसएफआईओ की विस्तृत जांच में पाया गया कि पॉपुलर फाइनेंस ग्रुप ने केरल व आसपास के राज्यों में आम जनता से लगभग ₹4,700 करोड़ जुटाए थे।
    • वर्तमान समापन याचिकाओं के दायरे में शामिल 14 कंपनियों और एलएलपी संस्थाओं से सीधे तौर पर लगभग ₹829.31 करोड़ का फंड जुड़ा हुआ था।
  • 9% से 18.18% के लुभावने ब्याज का जाल:
    • ग्रुप ने निवेशकों और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को आकर्षित करने के लिए 9% से लेकर 18.18% तक के अत्यधिक ब्याज दर की पेशकश की थी।
    • अपने व्यवसाय के भरोसेमंद चेहरे के रूप में ग्रुप ने अपने गोल्ड लोन (Gold-loan) कारोबार को जनता के सामने पेश किया, जिससे निवेशकों को लगा कि उनका पैसा सुरक्षित है।
  • निधि कंपनियों व एलएलपी का छद्म पुनर्गठन (Restructuring):
    • जब जनता से प्राप्त जमा राशि गोल्ड लोन के वास्तविक कारोबार से बहुत अधिक हो गई, तो कानूनी शिकंजे से बचने के लिए ग्रुप ने अपने परिचालन का पुनर्गठन कर अनेक निधि कंपनियां (Nidhi Companies) और एलएलपी (LLPs) बना लीं।
    • भोले-भाले जमाकर्ताओं को अनभिज्ञ रखकर उन्हें कानूनी रूप से कंपनियों में ‘साझेदार’ (Partners) या पूंजी अंशदाता (Capital Contributors) के रूप में दर्ज कर दिया गया।
  • निजी इस्तेमाल और फंड डायवर्जन:
    • फिक्स्ड डिपॉजिट, आरडी, बचत खाते, डिबेंचर और पूंजी योगदान के नाम पर जुटाई गई रकम को ग्रुप की दर्जनों शेल कंपनियों के बीच घुमाया गया (Layering/Routing)।
    • एसएफआईओ ने आरोप लगाया कि जनता के इस गाढ़े पसीने की कमाई का एक बड़ा हिस्सा निदेशकों और नामित भागीदारों के व्यक्तिगत उपयोग (Personal Use) और निजी संपत्तियां खरीदने में उड़ा दिया गया।

जिन 14 प्रमुख संस्थाओं के समापन (Winding Up) का आदेश दिया गया

अदालत ने पाया कि प्रतिवादी संस्थाएं नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुईं, जिसके बाद उनके विरुद्ध एकतरफा (Ex parte) कार्यवाही की गई। समाप्त की जाने वाली प्रमुख 14 कंपनियों और एलएलपी में शामिल हैं:

  1. मेरी माथा पॉपुलर निधि लिमिटेड (Mary Matha Popular Nidhi Limited)
  2. सान पॉपुलर फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (Saan Popular Finance Private Limited)
  3. अमला पॉपुलर निधि लिमिटेड (Amala Popular Nidhi Limited)
  4. एमआरपीएन चिट्स प्राइवेट लिमिटेड (MRPN Chits Private Limited)
  5. मेरी रानी पॉपुलर निधि लिमिटेड (Mary Rani Popular Nidhi Limited)
  6. सान पॉपुलर फ्यूल्स एलएलपी (Saan Popular Fuels LLP)
  7. सान पॉपुलर ई-कंप्लायंस सॉल्यूशंस एलएलपी (Saan Popular E-Compliance Solutions LLP)
  8. सान पॉपुलर मेडिकेयर एलएलपी (Saan Popular Medicare LLP)
  9. मेरी रानी ट्रेडिंग एलएलपी (Mary Rani Trading LLP)
  10. वकयार लैब एलएलपी (Vakayar Lab LLP)
  11. माय पॉपुलर मरीन प्रोडक्ट्स एलएलपी (My Popular Marine Products LLP)
  12. सान पॉपुलर बिजनेस सॉल्यूशंस एलएलपी (Saan Popular Business Solutions LLP)
  13. एमआरपीएन पॉपुलर एक्सपोर्ट्स एलएलपी (MRPN Popular Exports LLP)
  14. सान पॉपुलर ट्रेडर्स एलएलपी (Saan Popular Traders LLP)

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: समापन के वैधानिक आधार

  • कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 271 एवं 272:
    • धारा 271(c) (धोखाधड़ी और कपटपूर्ण कार्य): यदि किसी कंपनी का गठन या उसके मामलों का संचालन धोखाधड़ी के उद्देश्य से या गैर-कानूनी तरीके से किया गया हो, तो न्यायाधिकरण केंद्र सरकार के आवेदन पर कंपनी को समेटने का आदेश दे सकता है।
    • धारा 271(e) (न्यायसंगत एवं साम्यापूर्ण आधार – Just and Equitable Grounds): जब किसी वित्तीय संस्थान में जनता के साथ व्यापक धोखाधड़ी हुई हो, तो निवेशकों के संरक्षण के लिए कंपनी का अस्तित्व समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प होता है।
  • सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (LLP Act, 2008) की धारा 64:
    • एलएलपी संस्थाओं के मामले में NCLT ने एक स्वतंत्र और निर्णायक विधिक आधार यह पाया कि इन एलएलपी ने लगातार 5 वित्तीय वर्षों तक अपने वार्षिक रिटर्न (Annual Returns) और साख व शोधन क्षमता विवरण (Statement of Account and Solvency) दाखिल नहीं किए थे।
    • धारा 64(e) के तहत यह विफलता किसी एलएलपी को न्यायाधिकरण द्वारा समाप्त करने का स्पष्ट वैधानिक आधार बनती है।
  • केरल हाईकोर्ट की पृष्ठभूमि:
    • इससे पूर्व केरल हाईकोर्ट ने जमाकर्ताओं के कल्याण संघ (MRPN Minority Shareholders Customers Welfare Association) की याचिका पर सुनवाई की थी।
    • केंद्र सरकार ने तब हाईकोर्ट को आश्वस्त किया था कि सक्षम अदालतों में आपराधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं और एनसीएलटी में औपचारिक वाइंडिंग-अप प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका बंद कर दी थी।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: भारत संघ (कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय/SFIO के माध्यम से) बनाम पॉपुलर फाइनेंस ग्रुप संस्थाएं [कंपनी याचिकाएं (समापन) – NCLT कोच्चि पीठ]
  • न्यायाधिकरण: राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), कोच्चि पीठ
  • पीठ: विनय गोयल (न्यायिक सदस्य) और रविचंद्रन रामासामी (तकनीकी सदस्य)
  • आदेश की तिथि: 6 अक्टूबर 2026
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • केंद्र सरकार / एसएफआईओ की ओर से: अधिवक्ता रंजीत आर. एवं अथिन रॉय
    • प्रतिवादी संस्थाएं: अनुपस्थित (एकतरफा कार्यवाही / Ex-parte)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
    • कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) की धाराएं 271, 272 एवं 273 (न्यायाधिकरण द्वारा कंपनियों का परिसमापन)
    • सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (LLP Act, 2008) की धारा 64 (न्यायाधिकरण द्वारा एलएलपी को समाप्त किए जाने की परिस्थितियां)
    • कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 212 (एसएफआईओ द्वारा जांच एवं अभियोजन)
  • नियुक्त परिसमापक (Liquidator): शासकीय समापक (Official Liquidator), केरल उच्च न्यायालय से संबद्ध।
  • अंतिम परिणाम: 14 कंपनियों और एलएलपी के समापन के आदेश स्वीकृत; ऑफिशियल लिक्विडेटर को ₹4,700 करोड़ के वित्तीय घोटाले में संपत्तियों की त्वरित जब्ती, मनी ट्रेल की खोज और जमाकर्ताओं के दावों के सत्यापन का व्यापक अधिकार।

मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित न्यायाधिकरणNCLT कोच्चि (न्यायिक सदस्य विनय गोयल एवं तकनीकी सदस्य रविचंद्रन रामासामी)
याचिकाकर्ताभारत सरकार (SFIO – गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय के माध्यम से)
संबंधित समूहपॉपुलर फाइनेंस ग्रुप (Popular Finance Group – 14 कंपनियां और LLPs)
घोटाले का आकारजनता से लगभग ₹4,700 करोड़ जुटाए गए (जांच में शामिल 14 संस्थाओं से ₹829.31 करोड़ जुड़े)
NCLT का फैसलाकंपनियों का परिसमापन (Winding Up); केरल हाईकोर्ट के आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) की नियुक्ति।
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