Friday, September 18, 2026
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Pending acid attack cases: एसिड अटैक…”अपराध 2009 का है और ट्रायल पूरा नहीं हुआ! सीजेआई बोले-बड़े शर्म की बात

Pending acid attack cases: सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक मामलों में धीमी ट्रायल प्रक्रिया को “व्यवस्था का मज़ाक” बताया।

लंबित एसिड अटैक मामलों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश

शीर्ष कोर्ट ने देश भर के सभी उच्च न्यायालयों को चार सप्ताह के भीतर लंबित एसिड अटैक मामलों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने इन मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष अदालतों के गठन का विचार भी रखा। CJI सूर्यकांत ने कहा, “यह व्यवस्था का मज़ाक है। ऐसे व्यक्तियों (आरोपियों) के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।” सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि अपराधियों को “उसी निर्दयता का सामना करना चाहिए जैसा उन्होंने किया है।”

पीड़ितों के लिए बड़ी पहल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कानून में संशोधन करने या अध्यादेश लाने पर विचार करने को कहा, ताकि एसिड अटैक पीड़ितों को ‘दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with Disabilities Act)’ के तहत औपचारिक रूप से विकलांग व्यक्तियों की परिभाषा में शामिल किया जा सके और वे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

यह रहे सुनवाई के दौरान अहम बिंदु

  • नोटिस जारी: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र और विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग को नोटिस जारी किया।
  • सरकार का आश्वासन: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे को “उचित गंभीरता” के साथ लेगी।

CJI ने कहा ‘राष्ट्रीय शर्म’

पीठ ने याचिकाकर्ता शाहीन मलिक के अपने मामले में 16 साल की लंबी देरी को “राष्ट्रीय शर्म” करार दिया, जो 2009 से दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में लंबित है।शाहीन मलिक, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से बहस की, उन्होंने कहा, “मेरे साथ 2009 में अटैक हुआ था, अभी तक ट्रायल चल रहा है।”

16 साल से अधिक की देरी पर CJI हुए आश्चर्य

“अपराध 2009 का है और ट्रायल पूरा नहीं हुआ! अगर राष्ट्रीय राजधानी इन चुनौतियों का जवाब नहीं दे सकती है, तो कौन करेगा? यह सिस्टम पर शर्म की बात है! यह एक राष्ट्रीय शर्म है।” CJI ने शाहीन मलिक के मामले में रोज़ाना सुनवाई करने का निर्देश दिया और आश्वासन दिया कि कोर्ट उनकी PIL में आवेदन पर स्व-प्रेरणा से संज्ञान (suo motu cognisance) ले सकती है।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • सभी हाई कोर्ट को निर्देश: सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एसिड अटैक पीड़ितों के मामलों में लंबित ट्रायलों का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
  • कानून संशोधन: केंद्र सरकार चार सप्ताह में एसिड अटैक पीड़ितों को विकलांगता अधिनियम के दायरे में लाने पर विचार करे।
  • विशेष अदालतें: इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए CJI ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होनी चाहिए।
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