Tuesday, September 29, 2026
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Hindu Jagarana Vedike: अदालत को हल्के में न लें!…मशाल जुलूस के होर्डिंग्स लगाने पर हिंदू जागरण वेदिके को यूं लगाई फटकार, यह थी याचिका

मामला सारांश (At a Glance)

विधिक बिंदुविवरण
माननीय अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय (Single Bench)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज
याचिकाकर्ताहिंदू जागरण वेदिके (Hindu Jagarana Vedike)
मूल विषय15 अगस्त को ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ मशाल जुलूस निकालने की अनुमति और पुलिस रिजेक्शन
अदालत का असंतोषमामला अदालत में पेंडिंग होने के बावजूद शहर में होर्डिंग्स लगाने पर कड़ी नाराजगी।
अगली सुनवाईमामले की सुनवाई 14 अगस्त 2026 को जारी रहेगी।

Hindu Jagarana Vedike: कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने 15 अगस्त को आयोजित होने वाले ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ मशाल जुलूस (Torchlight March) की अनुमति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता हिंदू जागरण वेदिके (Hindu Jagarana Vedike) को कड़ी फटकार लगाई है।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुणा श्याम से सवाल किया: “अदालत की अनुमति के बिना ही आप जश्न मनाने जा रहे हैं? इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। क्या आप यह मानकर चल रहे थे कि अदालत अनुमति दे ही देगी? अदालत को हल्के में लेने की भूल न करें!” अदालत ने इस बात पर गहरा असंतोष जताया कि पुलिस द्वारा अनुमति रद्द करने और मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बावजूद संस्था ने कार्यक्रम की घोषणा करते हुए शहर में होर्डिंग्स (Hoardings) कैसे लगा दिए।

🏛️ सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  • कानून के शासन (Rule of Law) पर सवाल
    • पीठ ने कहा: “पुलिस द्वारा अनुमति खारिज किए जाने के बाद भी आपने होर्डिंग्स लगा दिए? ‘कानून के शासन’ का सम्मान कहाँ है? हम आपको अनुमति देने पर विचार कर रहे थे और आप पहले ही जाकर पोस्टर-होर्डिंग्स लगा आए?”
  • न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
    • कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से होर्डिंग्स लगाए गए हैं, उससे संस्था का रवैया कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग (Abuse of Process of Court) प्रतीत होता है।
  • सुरक्षा व्यवस्था का खर्च
    • पुलिस सुरक्षा की मांग पर न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को इस आयोजन के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ता है, तो याचिकाकर्ता को उस सुरक्षा का खर्च उठाना होगा।
    • अदालत ने कहा कि यदि वे बिना पुलिस सुरक्षा के जुलूस निकालना चाहते हैं, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी।

⚖️ दोनों पक्षों के तर्क और पृष्ठभूमि

  1. याचिकाकर्ता की दलील (हिंदू जागरण वेदिके):
    • संस्था ने 6 अगस्त के पुलिस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
    • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा एक देशभक्तिपूर्ण और शांतिपूर्ण कार्यक्रम है। पम्फलेट पहले ही छप चुके थे।
    • होर्डिंग्स पर सफाई देते हुए वकील ने कहा कि होर्डिंग्स स्थानीय निकाय की अनुमति से तीसरे पक्षों (Third Parties) ने लगाए हैं, न कि सीधे संस्था ने।
  2. राज्य सरकार का विरोध (अतिरिक्त महाधिवक्ता भानु प्रकाश):
    • राज्य सरकार ने कोर्ट में होर्डिंग्स की तस्वीरें पेश करते हुए बताया कि पुलिस ने 6 अगस्त को अनुमति खारिज की थी, याचिकाकर्ता 8 अगस्त को हाईकोर्ट आए, और 12 अगस्त को शहर में होर्डिंग्स लगा दिए गए।
    • राज्य ने तर्क दिया कि आयोजक अदालत का फैसला आने से पहले ही जबरन कार्यक्रम आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

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