Tuesday, September 8, 2026
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Procedural Lapses: महिलाएं ध्यान दें…चाइल्ड केयर लीव (CCL) यानी बाल देखभाल अवकाश पर अदालत का यह फैसल पढ़ें

Procedural Lapses: बॉम्बे हाई कोर्ट (गोवा बेंच) ने चाइल्ड केयर लीव (CCL) यानी बाल देखभाल अवकाश से जुड़े एक मामले में सरकारी कार्यप्रणाली की प्रक्रियात्मक खामियों (Procedural Lapses) को उजागर किया है।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालत का निष्कर्षविभाग के निदेशक को प्रस्ताव मंत्री के पास भेजना चाहिए था, सीधे खारिज नहीं करना चाहिए था।
प्रशासनिक नसीहतसरकारी अधिकारियों को CCL नीतियों का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
अधिकारCCL केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि कामकाजी महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अधिकार है।
नतीजायाचिका का निपटारा किया गया (Disposed), लेकिन भविष्य के लिए प्रक्रिया स्पष्ट की गई।

बच्चों की देखभाल एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य

हाईकोर्ट जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने माना कि एक सरकारी कर्मचारी की चाइल्ड केयर लीव को खारिज करते समय अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया। हालांकि, चूंकि वह समय बीत चुका है, इसलिए कोर्ट ने याचिका को निरर्थक (Infructuous) मानकर निपटा दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व और बच्चों की देखभाल एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य है और प्रशासन इसे हल्के में नहीं ले सकता।

मामला क्या था? (The Context)

  • मांग: याचिकाकर्ता की पत्नी (जो एक सरकारी संस्थान में कार्यरत हैं) ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने बेटे की 12वीं कक्षा की पढ़ाई में सहायता के लिए 266 दिनों की CCL मांगी थी।
  • विवाद: विभाग ने केवल 60 दिनों की छुट्टी दी और बाकी के आवेदन को बिना किसी ठोस प्रक्रिया के खारिज कर दिया।
  • मानवाधिकार आयोग का रुख: जब याचिकाकर्ता गोवा मानवाधिकार आयोग पहुँचे, तो आयोग ने भी उनकी शिकायत खारिज कर दी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: मातृत्व एक सामाजिक जिम्मेदारी

  • अदालत ने चाइल्ड केयर लीव के पीछे के व्यापक उद्देश्य को रेखांकित किया।
  • सुरक्षा: कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मातृत्व (Motherhood) रोजगार में किसी के लिए नुकसान का कारण न बने। यह एक ‘सामाजिक रूप से मूल्यवान कार्य’ है जिसे संरक्षण मिलना चाहिए।
  • प्रक्रियात्मक चूक: कोर्ट ने सरकारी सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि CCL को खारिज करने से पहले सक्षम मंत्री (Competent Minister) की मंजूरी लेना अनिवार्य है। इस मामले में अधिकारी ने खुद ही आवेदन खारिज कर दिया, जो नियमों का उल्लंघन है।

याचिका निष्फल (Infructuous) क्यों हुई?

  • अदालत ने नियमों की अनदेखी पर नाराजगी तो जताई, लेकिन कोई दंडात्मक आदेश नहीं दिया।
  • समय बीत चुका था: जिस शैक्षणिक सत्र (12वीं कक्षा) के लिए छुट्टी मांगी गई थी, वह पहले ही खत्म हो चुका था। बच्चा वह चरण पूरा कर चुका था।
  • कानूनी स्थिति: चूंकि छुट्टी का ‘उद्देश्य’ अब अस्तित्व में नहीं था, इसलिए कोर्ट ने कहा कि अब याचिका में कुछ शेष नहीं बचा है।

सरकारी बाबुओं के लिए एक सबक

यह फैसला एक महत्वपूर्ण नजीर (Precedent) पेश करता है कि अधिकारी अपनी मर्जी से किसी मां की छुट्टी के अधिकार को नहीं छीन सकते। CCL से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) के पास है, न कि केवल विभाग के प्रमुख के पास।

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