Tuesday, August 4, 2026
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Rail News: यात्री ध्यान दें…सफर में सामान की सुरक्षा स्वयं करें, गुम होगी तो रेलवे नहीं देगी मुआवजा

Rail News: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ट्रेन में सफर करने वाले यात्री की लगेज (सामान) की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं यात्री की होती है।

रेलवे कर्मी के लापरवाही होने पर जिम्मेदारी तय संभव

न्यायमूर्ति रविंदर डूडेजा ने कहा, जब तक रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही या दुर्व्यवहार सिद्ध नहीं होता, रेलवे किसी चोरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। एक व्यक्ति ने याचिका के माध्यम से आरोप लगाया था कि जनवरी 2013 में नई दिल्ली से नागपुर की यात्रा के दौरान उसकी एसी थ्री टायर कोच में रखी बैग चोरी हो गई। इसमें लैपटॉप, कैमरा, चार्जर, चश्मा और एटीएम कार्ड आदि थे।

उपभोक्ता निवारण आयोग से भी शिकायत थी खारिज

इससे पहले, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने उनकी शिकायत को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मामले में ₹84,000 मूल्य के सामान की क्षति और ₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा मांगा था। इसको लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

आयोग के निर्णय को अदालत ने रखा बरकरार

हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय आयोग के निर्णय को बरकरार रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का दावा मुख्य रूप से इस आधार पर था कि कोच अटेंडेंट सो रहा था और बदतमीज था। वहीं कंडक्टर मिल नहीं रहा था।हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कहीं कोई उल्लेख नहीं है कि कोच के दरवाजे खुले थे, जिससे कोई बाहरी व्यक्ति अंदर आकर चोरी कर सकता था।

अदालत ने यह भी कहा

अदालत ने कहा, केवल कंडक्टर की गैरमौजूदगी को सेवा में कमी नहीं माना जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि उसने दरवाज़ा बंद करने में लापरवाही बरती थी। चोरी की घटना और कंडक्टर व अटेंडेंट की लापरवाही के बीच कोई स्पष्ट संबंध होना चाहिए। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जो यह साबित करे कि चोरी किसी सहयात्री ने नहीं की हो। अगर ऐसा है, तो ट्रेन में कंडक्टर की मौजूदगी से भी चोरी नहीं रोकी जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि यात्री स्वयं अपनी वस्तुओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होता है, न कि रेलवे। इससे पहले, जिला उपभोक्ता फोरम ने 2014 में रेलवे को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए याचिकाकर्ता को ₹5,000 का मुआवज़ा दिया था। इसके बाद, राज्य उपभोक्ता आयोग ने 2023 में यह राशि बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी थी। लेकिन राष्ट्रीय आयोग ने 2024 में रेलवे द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका के बाद राज्य आयोग के फैसले को रद्द कर दिया।इसके खिलाफ यात्री ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य आयोग के निर्णय को बहाल करने की मांग की।

याचिका में कोई दम नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा, इस अदालत को एनसीडीआरसी के 29 अगस्त 2024 के निर्णय में कोई त्रुटि या अनुचितता नहीं दिखती। याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। रेलवे ने अदालत में दलील दी कि मौजूदा नियमों के अनुसार, बिना बुक किए गए सामान के नुकसान के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है, और अगर याचिकाकर्ता ने सीट के नीचे बने लोहे के रिंग से सामान को बांधा होता, तो चोरी नहीं होती।

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