Rape Of Foreigner: भारत आए विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
आरोपी होमस्टे मालिक पलेकांडा पोनप्पा ने दायर की थी याचिका
हाईकोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी होमस्टे मालिक पलेकांडा पोनप्पा (Palecanda Ponnappa) की याचिका पर उसे किसी भी तरह की अंतरिम राहत या आपराधिक कार्यवाही पर रोक (Interim Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया। कोडागु (Kodagu) के एक होमस्टे में अमेरिकी पर्यटक (US Tourist) महिला के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ किया कि “यदि देश में किसी विदेशी नागरिक के साथ ऐसी घिनौनी वारदात होती है, तो यह अत्यंत गंभीर अपराध है।”
देश में किसी दूसरे देश के नागरिक के साथ दुष्कर्म होना गंभीर
अदालत ने राज्य सरकार के अतिरिक्त विशेष लोक अभियोजक (Special PP) को आदेश दिया कि वे इस मामले से जुड़े तमाम जांच रिकॉर्ड और दस्तावेज अदालत के सामने पेश करें। जज ने सख्त लहजे में कहा, यह ऐसा मामला नहीं है जहां मैं सीधे तौर पर कोई कंबल रोक (Blanket Stay) लगा दूं। पहले मैं इस मामले के जांच दस्तावेज (Investigation Papers) देखना चाहता हूं। अगर हमारे देश में किसी दूसरे देश के नागरिक के साथ दुष्कर्म होता है, तो यह बहुत ही गंभीर मामला है।
क्या है पूरा विवाद? (अमेरिकी पर्यटक से दरिंदगी)
यह दर्दनाक मामला कोडागु के एक होमस्टे का है, जहां पिछले महीने (12 अप्रैल) एक 33 वर्षीय अमेरिकी महिला पर्यटक रुकी हुई थी।
मुख्य आरोपी (होमस्टे कर्मचारी): आरोप है कि होमस्टे में काम करने वाले २५ वर्षीय कर्मचारी ने विदेशी महिला के ड्रिंक में नशीला पदार्थ (Spiked Drink) मिलाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। मुख्य आरोपी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल जेल में है। निचली अदालत उसकी जमानत अर्जी भी खारिज कर चुकी है।
होमस्टे मालिक पर आरोप (पलेकांडा पोनप्पा): होमस्टे के मालिक पोनप्पा को पुलिस ने 19 अप्रैल को इस आरोप में गिरफ्तार किया था कि उसने इस संगीन वारदात की जानकारी होने के बावजूद इसे पुलिस और प्रशासन से छिपाया (Withheld Information)। हालांकि, पोनप्पा को २ मई को जमानत मिल गई थी।
मालिक की कोर्ट में अर्जी: अब पोनप्पा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और अपनी गिरफ्तारी को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उसने दावा किया है कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और वह अपनी ‘अवैध गिरफ्तारी’ के एवज में सरकार से 15 लाख रुपये के मुआवजे (Compensation) की मांग कर रहा है।
“मीडिया ने बदनाम किया, मेरा धंधा चौपट हुआ”: पोनप्पा की दलीलें
सुनवाई के दौरान पोनप्पा के वकील अंगद कामथ ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।
मीडिया ट्रायल का आरोप: वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में उनके मुवक्किल को ऐसे पेश किया गया जैसे उसे दुष्कर्म की पहले से जानकारी थी और उसने पीड़िता को बंधक बनाकर रखा था, जबकि मूल शिकायत में ऐसे कोई आरोप ही नहीं हैं।
कारोबार पर असर: कोर्ट को बताया गया कि इस केस की वजह से पोनप्पा का होमस्टे बिजनेस पूरी तरह ठप हो गया है और उसकी साख खराब हुई है। (इस पर जस्टिस नागप्रसन्ना ने चुटकी लेते हुए पूछा—”क्या आप होमस्टे की मरम्मत करना चाहते हैं?”)
CCTV फुटेज का हवाला: मालिक ने दावा किया कि उसने जांच एजेंसी को खुद सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी है, जो उसकी बेगुनाही साबित करती है। पुलिस इस मामले में एक ड्राइवर सहित अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
विश्लेषण: हाई कोर्ट का कानूनी स्टैंड
अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी नागरिक या व्यवसायी के ‘मौलिक अधिकारों’ की दुहाई देने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसकी अपराध में क्या भूमिका थी।
| पक्षकार | कोर्ट का निर्देश और टिप्पणियां |
| याचिकाकर्ता (पोनप्पा) | कार्यवाही पर तुरंत रोक लगाने की मांग की, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। |
| जांच एजेंसी (पुलिस/सरकार) | कोर्ट ने अगली सुनवाई तक मामले की पूरी केस डायरी और जांच प्रगति रिपोर्ट तलब की है। |
| कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख | कोर्ट ने कहा, “यदि इस अपराध में आपकी थोड़ी भी संलिप्तता (Involvement) पाई जाती है, तो हम देखेंगे कि आपके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। पहले जांच के कागजात आने दीजिए।” |

