Tuesday, August 25, 2026
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Same-sex couples: समलैंगिक पार्टनर से मिले गिफ्ट पर टैक्स क्यों?…आयकर कानून की धारा 56 को चुनौती पर यह हुआ एक्शन, पढ़ें

Same-sex couples:भारत में समलैंगिक जोड़ों के नागरिक और वित्तीय अधिकारों (Financial Rights) को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण और बुनियादी कानूनी बहस शुरू हो गई है।

आयकर अधिनियम को दी संवैधानिक चुनौती

हाईकोर्ट के जस्टिस बी. श्याम प्रसाद की एकल पीठ ने आयकर अधिनियम, 1961 के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार (Union Government) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत इस संवेदनशील और दूरगामी असर वाले मामले पर अगली सुनवाई 15 जुलाई, 2026 को करेगी। अदालत ने कहा, यदि देश का आयकर कानून (Income Tax Act) एक पति-पत्नी (Spouse) द्वारा एक-दूसरे को दिए गए महंगे उपहारों (Gifts) को टैक्स से पूरी तरह छूट देता है, तो यही छूट पिछले कई वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे समलैंगिक जोड़ों (Same-sex couples) को क्यों नहीं मिलनी चाहिए? किसी समलैंगिक पार्टनर को ‘रिश्तेदार’ (Relative) की परिभाषा से बाहर रखकर उसके उपहार पर टैक्स वसूलना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) का उल्लंघन है।

मामला क्या है?: 1 लाख रुपये के सोने के ब्रेसलेट पर लगा टैक्स

यह पूरी कानूनी लड़ाई बेंगलुरु में रहने वाले दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और आईआईटी (IIT) के पूर्व छात्रों—अनुराग और अखिलेश द्वारा दायर एक रिट याचिका से उपजी है।

पृष्ठभूमि: अनुराग और अखिलेश पिछले 7 वर्षों से एक साथ (Cohabitation) रह रहे हैं। पिछले साल अखिलेश ने अनुराग को 15 ग्राम सोने का एक ब्रेसलेट उपहार में दिया था, जिसकी कीमत 1 लाख रुपये से अधिक थी।

टैक्स की मार: एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जोड़े ने इस उपहार का खुलासा अपने आयकर रिटर्न (ITR) में किया। लेकिन, आयकर विभाग ने इस पर टैक्स ठोक दिया। कारण यह था कि मौजूदा टैक्स कानून के तहत समलैंगिक पार्टनर को “रिश्तेदार” नहीं माना जाता, इसलिए उन्हें मिलने वाला गिफ्ट टैक्स के दायरे में आ गया।

कानूनी पेच: क्या कहती है आयकर की धारा 56(2)(x)?

मौजूदा आयकर कानून के तहत उपहारों पर टैक्स लगाने के कड़े नियम हैं।

सामान्य नियम: धारा 56(2)(x) के तहत, यदि किसी व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में बिना किसी प्रतिफल (Without Consideration) के 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की नकदी, ज्वेलरी या संपत्ति उपहार में मिलती है, तो उसे ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) मानकर उस पर टैक्स वसूला जाता है।

कानूनी छूट (Exemption): इस नियम का एक बड़ा अपवाद यह है कि यदि उपहार किसी “रिश्तेदार” (Relative) से मिला हो, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता (मूल्य चाहे जो भी हो)।

विवाद की जड़: इस कानून में ‘रिश्तेदार’ की परिभाषा के भीतर “spouse of an individual” (व्यक्ति का पति या पत्नी) शामिल है। चूंकि भारत में समलैंगिक विवाह को अभी तक कानूनी मान्यता नहीं मिली है, इसलिए समलैंगिक पार्टनर इस ‘पति-पत्नी’ (Spouse) शब्द के दायरे में फिट नहीं बैठते और उनके बीच लेनदेन पर टैक्स लग जाता है।

याचिकाकर्ताओं के संवैधानिक तर्क: ‘समानता का अधिकार’

अनुराग और अखिलेश ने अपने वकीलों के माध्यम से हाई कोर्ट में दलील दी है कि यह कानून सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है।

अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन

याचिका में तर्क दिया गया है कि केवल लैंगिक रुझान (Sexual Orientation) या समलैंगिक होने के कारण टैक्स छूट से वंचित करना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। यह कानून विषमलैंगिक विवाहित जोड़ों (Heterosexual married couples) और दीर्घकालिक समलैंगिक जोड़ों के बीच एक अनुचित और असमान खाई पैदा करता है।

‘लंबे सहवास को शादी का दर्जा’ (Legal Presumption)

अपने दावों को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ताओं ने देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसलों, विशेष रूप से शिरामाबाई बनाम ओआईसी रिकॉर्ड्स (Shiramabai vs OIC Records) के फैसले का हवाला दिया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यदि कोई जोड़ा लंबे समय तक एक साथ रहता है (Long-term cohabitation), तो कानूनन यह मजबूत धारणा (Strong Legal Presumption) बनती है कि उनका विवाह वैध है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसी विधिक सिद्धांत के आधार पर, टैक्स संबंधी लाभों के उद्देश्य से उनके 7 साल पुराने मजबूत रिश्ते को भी एक विवाहित जोड़े के समकक्ष माना जाना चाहिए और आयकर अधिनियम में ‘Spouse’ शब्द की व्याख्या को व्यापक किया जाना चाहिए।

केस शीट: कर्नाटक उच्च न्यायालय समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और याचिका का दायरा
संबंधित अदालतकर्नाटक उच्च न्यायालय, बेंगलुरु
माननीय न्यायाधीशजस्टिस बी. श्याम प्रसाद (एकल पीठ)
याचिकाकर्ताअनुराग और अखिलेश (बेंगलुरु आधारित सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स व IIT एलुमनाई)
चुनौती के दायरे में कानूनआयकर अधिनियम, 1961 की धारा 56(2)(x)
मूल संवैधानिक प्रश्नक्या समलैंगिक पार्टनर्स को ‘पति-पत्नी/रिश्तेदार’ के टैक्स लाभों से बाहर रखना अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है?
वर्तमान स्थितिकेंद्र सरकार को नोटिस जारी; अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 15 जुलाई, 2026 को।
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