केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | बॉम्बे उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026) |
| संबंधित अदालत | बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस मनीष पितले एवं जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट |
| याचिकाकर्ता | जसराज रेस्टोरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (Jasraj Restaurants Pvt. Ltd.) |
| संबंधित कानून | SARFAESI Act, 2002 की धारा 14 एवं संविधान का अनुच्छेद 226 |
| मुख्य विधिक प्रश्न | क्या नीलामी खरीदार (Auction Purchaser) धारा 14 के कब्जे के आदेश को लागू कराने के लिए रिट याचिका दायर कर सकता है? |
| अदालत का विधिक स्टैंड | हाँ। नीलामी खरीदारों को ऐसा अधिकार प्राप्त है। राज्य प्राधिकारियों को मजिस्ट्रेट के आदेश का पालन कराने के लिए रिट जारी की जा सकती है। |
| अंतिम आदेश | याचिका स्वीकार; तहसीलदार और पुलिस को 13 अगस्त 2026 तक भौतिक कब्जा दिलाने का कड़ा निर्देश। |
SARFAESI ACT: वित्तीय संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (SARFAESI) अधिनियम के तहत नीलाम संपत्तियों के खरीदारों के अधिकारों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नीलामी खरीदारों के पास ऐसा अधिकार (Locus Standi) है और यदि अदालत उनके लिए दरवाजे बंद करती है, तो यह कानून के शासन (Rule of Law) पर जनता के भरोसे को कमजोर करेगा। अदालत ने माना है कि सरफेसी अधिनियम की धारा 14 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा पारित भौतिक कब्जे (Physical Possession) के आदेशों को लागू कराने के लिए नीलामी खरीददार सीधे उच्च न्यायालय में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सकते हैं।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह याचिका नीलामी खरीदार ‘जसराज रेस्टोरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Jasraj Restaurants Pvt. Ltd.) द्वारा दायर की गई थी।
- ऋण चूक और नीलामी: एक उधारकर्ता द्वारा ₹1.35 करोड़ के टर्म लोन पर डिफॉल्ट करने के बाद बैंक ने SARFAESI अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की। पांच असफल प्रयासों के बाद, 29 जून 2021 को छठी ई-नीलामी में याचिकाकर्ताओं ने ₹2.23 करोड़ का भुगतान करके संपत्ति खरीदी।
- बिक्री प्रमाण पत्र और आदेश: याचिकाकर्ताओं के पक्ष में 26 जुलाई 2021 को सेल सर्टिफिकेट जारी किया गया। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट (रायगढ़) ने 2 फरवरी 2022 को धारा 14 के तहत तहसीलदार को भौतिक कब्जा लेकर सुरक्षित लेनदार (बैंक) को सौंपने का निर्देश दिया।
- कब्जे में देरी: ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) द्वारा मई 2026 में उधारकर्ता की याचिका खारिज किए जाने के बावजूद, याचिकाकर्ताओं को संपत्ति का कब्जा नहीं मिला।
- उधारकर्ता का विरोध: उधारकर्ताओं ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के ITC Ltd. v. Blue Coast Hotels फैसले के अनुसार केवल बैंक (सुरक्षित लेनदार) ही ऐसी रिट याचिका दायर कर सकता है, नीलामी खरीदार नहीं।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “कब्जा न मिलना कानून के शासन के खिलाफ”
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उधारकर्ताओं की इस आपत्ति को पूरी तरह खारिज कर दिया कि नीलामी खरीदारों के पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है।
नीलामी खरीदार का अधिकार (Locus Standi)
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, यदि यह रिट कोर्ट याचिकाकर्ताओं जैसे नीलामी खरीदारों के लिए अपने दरवाजे बंद कर देता है, तो यह न्याय का उपहास (Travesty of Justice) होगा और राज्य के अधिकारी इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट द्वारा जारी विशिष्ट निर्देशों का पालन न करने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगे। इसका प्रभाव कानून के शासन की अवधारणा पर भी पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ITC Ltd. फैसले पर स्पष्टीकरण
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ITC Limited vs. Blue Coast Hotels Limited मामले के फैसले में ऐसा कोई अवलोकन या रोक नहीं है जो नीलामी खरीदारों को अपने वैधानिक अधिकारों और मजिस्ट्रेट के आदेशों को लागू कराने के लिए रिट याचिका दायर करने से रोकती हो।
पूर्ण भुगतान के बाद भी इंतजार अनुचित
अदालत ने पटना उच्च न्यायालय के समान दृष्टिकोण का हवाला देते हुए उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने ₹2.23 करोड़ का पूरा भुगतान किया है, जुलाई 2021 में पंजीकृत सेल सर्टिफिकेट प्राप्त किया है, फिर भी वे फरवरी 2022 के मजिस्ट्रेट आदेश के बावजूद कब्जे के लिए भटक रहे हैं।
उच्च न्यायालय के मुख्य निर्देश (Court Directives)
- भौतिक कब्जा लेने का आदेश: कोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए तहसीलदार (अलीबाग) को निर्देश दिया कि वह 13 अगस्त 2026 को विवादित संपत्ति का भौतिक कब्जा ले और उसे सुरक्षित लेनदार (बैंक) को सौंपे, जो तुरंत इसे नीलामी खरीदारों को हस्तांतरित करेगा।
- पुलिस सहायता का निर्देश: अदालत ने पुलिस अधीक्षक (अलीबाग) को आदेश निष्पादन के दौरान पर्याप्त पुलिस बल/सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

