गुजरात सरकार की प्रमुख दलीलें
1. “मंदिर के दरवाजे पर नॉन-वेज बेचने का निरपेक्ष अधिकार नहीं”:
सरकारी वकील जी.एच. विर्क ने अदालत से कहा कि सोमनाथ को केवल एक व्यावसायिक शहर के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोई भी व्यक्ति मंदिर के मुख्य द्वारों या श्रद्धालुओं के आने जाने के पवित्र रास्तों पर मांसाहारी भोजन बेचने के पूर्ण मौलिक अधिकार (Absolute Fundamental Right) का दावा नहीं कर सकता।
2. श्रद्धालुओं की विशाल संख्या और उदाहरण:
- सरकार ने अदालत को सूचित किया कि पिछले 9 महीनों में 1.16 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए आए हैं।
- सरकार ने देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों—जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर और मथुरा-वृंदावन—का हवाला दिया, जहां धार्मिक पवित्रता और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसे ही प्रतिबंध लागू हैं।
3. व्यवसाय पूरी तरह बंद करने का आदेश नहीं:
- राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना से रेस्तरां का व्यवसाय पूरी तरह बंद नहीं होता है। रेस्तरां मालिक उसी स्थान पर शाकाहारी (Vegetarian) भोजन परोसकर अपना व्यवसाय जारी रख सकते हैं।
- यदि वे मांसाहारी भोजन ही बेचना चाहते हैं, तो वे अधिसूचित प्रतिबंध क्षेत्र (500 मीटर के दायरे) के बाहर नियमानुसार अपना व्यवसाय स्थानांतरित कर सकते हैं।
अहमदाबाद: भारत का संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार और कारोबार करने का मौलिक अधिकार) बनाम अनुच्छेद 19(6) (सार्वजनिक हित और व्यवस्था में राज्य द्वारा लगाए जाने वाले युक्तियुक्त निर्बंधन / Reasonable Restrictions), अनुच्छेद 25 एवं 26 (धार्मिक स्वतंत्रता एवं धार्मिक स्थलों की पवित्रता का संरक्षण), तीर्थाटन शहरों (Holy Pilgrimage Cities) की ऐतिहासिक व आध्यात्मिक पहचान, तथा जिलाधिकारी द्वारा जारी अधिसूचनाओं के वैधानिक दायरे पर गुजरात हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस छिड़ गई है।
गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ, न्यायमूर्ति निशा एम. ठाकोर के समक्ष राज्य सरकार ने गिर सोमनाथ जिले के प्रभास पाटन स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की बिक्री और भंडारण पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध का कड़ा बचाव किया। राज्य के शासकीय अधिवक्ता (Government Pleader) जी.एच. विर्क ने अदालत में जोरदार दलील दी कि सोमनाथ को देश के करोड़ों हिंदुओं के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व की अनदेखी कर केवल एक ‘व्यावसायिक शहर’ (Commercial Town) नहीं माना जा सकता। सरकार ने दो-टूक कहा कि कोई भी नागरिक मंदिर के मुख्य द्वार या करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले पवित्र मार्गों पर मांसाहार बेचने का ‘पूर्ण मौलिक अधिकार’ (Absolute Fundamental Right) होने का दावा नहीं कर सकता।
राज्य सरकार के मुख्य कानूनी तर्क एवं संवैधानिक रुख
1. ‘तीर्थस्थल की शुचिता बनाम व्यापार का अधिकार: अनुच्छेद 19(6) के तहत युक्तियुक्त निर्बंधन’
शासकीय अधिवक्ता जी.एच. विर्क ने राज्य का पक्ष रखते हुए दर्ज कराया:
- व्यापार का अधिकार निरपेक्ष नहीं है: संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) नागरिकों को व्यापार की स्वतंत्रता देता है, किंतु अनुच्छेद 19(6) के तहत राज्य को यह स्पष्ट अधिकार प्राप्त है कि वह सार्वजनिक हित, नैतिकता और धार्मिक भावनाओं के सम्मान में उचित प्रतिबंध लगा सके।
- द्वार पर मांसाहार बेचने का कोई मौलिक अधिकार नहीं: राज्य ने तर्क दिया कि मंदिर के प्रवेश मार्गों, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु कतारबद्ध होते हैं, वहां खुले में या भोजनालयों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री तीर्थस्थल की ऐतिहासिक शुचिता के पूर्णतः विपरीत है।
2. देशव्यापी नजीरें: हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा और अमृतसर का दिया हवाला:
- गुजरात सरकार ने देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों का उदाहरण पेश करते हुए अदालत को बताया कि धार्मिक मर्यादाओं के संरक्षण हेतु ऐसे प्रतिबंध पहले से ही लागू और न्यायसंगत हैं:
- हरिद्वार और ऋषिकेश (उत्तराखंड): नगर निगम सीमाओं और गंगा तटों के आसपास मांसाहार और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध।
- अमृतसर (पंजाब): स्वर्ण मंदिर (हरिमंदिर साहिब) के चारों ओर पवित्र परिक्रमा और अधिसूचित क्षेत्रों में इसी प्रकार के प्रतिबंध।
- मथुरा-वृंदावन (उत्तर प्रदेश): कृष्ण जन्मभूमि व नगर पालिका क्षेत्र के भीतर अधिसूचित प्रतिबंध।
- सरकार ने तर्क दिया कि सोमनाथ मंदिर पहला ज्योतिर्लिंग है, अतः इसकी गरिमा किसी भी प्रकार से अन्य राष्ट्रीय तीर्थों से कमतर नहीं है।
3. 9 माह में 1.16 करोड़ श्रद्धालु और वैकल्पिक व्यावसायिक विकल्प:
- सरकार ने अदालत के संज्ञान में लाया कि पिछले मात्र नौ महीनों के भीतर 1.16 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
- व्यापार बंद करने की बाध्यता नहीं: राज्य ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के व्यापार को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उनके पास दो वैध विकल्प उपलब्ध हैं:
- वे अपने मौजूदा परिसरों में ही विशुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट संचालित करना जारी रख सकते हैं।
- यदि वे मांसाहारी खाद्य पदार्थ ही बेचना चाहते हैं, तो वे 500 मीटर के गैर-अधिसूचित क्षेत्र से बाहर किसी भी स्थान पर कानून सम्मत तरीके से अपना व्यवसाय चला सकते हैं।
रेस्टोरेंट संचालकों (याचिकाकर्ताओं) की प्रमुख दलीलें
छह स्थानीय रेस्टोरेंट मालिकों ने अगस्त 2026 में जिला प्रशासन द्वारा जारी स्थायी अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है:
| क्रमांक | याचिकाकर्ताओं के मुख्य विधिक तर्क |
|---|---|
| 1. | वैध लाइसेंस और दशकों पुराना व्यापार: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि वे कई दशकों से वैध नगर निगम/खाद्य लाइसेंस के तहत अपने भोजनालय संचालित कर रहे हैं। अचानक ऐसा प्रतिबंध उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार है। |
| 2. | अनुच्छेद 19(1)(g) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: यह तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को वैध व्यापार या आजीविका कमाने से बिना किसी ठोस कारण के वंचित करना जीवन और व्यापार की संवैधानिक स्वतंत्रता का हनन है। |
| 3. | मंदिर परिसर से दूरी: याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनके प्रतिष्ठान मंदिर की तत्काल परिधि (Immediate Periphery) से बाहर हैं और 500 मीटर का दायरा अत्यधिक व्यापक और मनमाना है। |
| 4. | जिला मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल: याचिका में कहा गया कि जिला मजिस्ट्रेट ने कानूनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए एक वैध व्यापार पर पूर्ण और स्थायी प्रतिबंध (Permanent Prohibition) थोप दिया है, जिसके चलते प्रशासन ने उनके प्रतिष्ठान जबरन बंद करा दिए। |
विधिक एवं प्रक्रियात्मक कालक्रम
संवैधानिक एवं न्यायिक विश्लेषण: तीर्थस्थल न्यायशास्त्र
- सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक नजीर — ओम प्रकाश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य [(2004) 3 SCC 402]:
- सर्वोच्च न्यायालय ने ऋषिकेश नगर पालिका द्वारा अंडों और मांसाहार की बिक्री पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को वैध ठहराया था।
- अदालत ने माना था कि यदि कोई शहर या उसका विशिष्ट हिस्सा प्राचीन काल से एक प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थल रहा है, तो वहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और उस स्थल के आध्यात्मिक चरित्र की रक्षा के लिए कुछ भौगोलिक सीमाओं के भीतर मांसाहार पर प्रतिबंध लगाना अनुच्छेद 19(6) के तहत पूर्णतः ‘युक्तियुक्त निर्बंधन’ माना जाएगा।
- आनुपातिकता का परीक्षण (Doctrine of Proportionality):
- सरकार ने पूरे प्रभास पाटन शहर में प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि इसे केवल मंदिर के 500 मीटर के दायरे (6 अधिसूचित जोन) तक सीमित रखा है।
- कानूनन, आंशिक भौगोलिक प्रतिबंध (Territorial Restriction) को पूर्ण प्रतिबंध नहीं माना जाता, विशेषकर तब जब प्रतिष्ठानों को शाकाहारी भोजन परोसने का विकल्प खुला रखा गया हो।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: छह रेस्टोरेंट मालिक बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य [विशेष दीवानी आवेदन (SCA) – गुजरात उच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति निशा एम. ठाकोर (एकल पीठ)
- सुनवाई की तिथि: अक्टूबर 2026
- संबद्ध अधिकार क्षेत्र: प्रभास पाटन, गिर सोमनाथ जिला (सोमनाथ मंदिर परिधि – 500 मीटर)
विधिक प्रतिनिधित्व:
- गुजरात राज्य की ओर से: शासकीय अधिवक्ता (Government Pleader) जी.एच. विर्क (GH Virk)
- याचिकाकर्ताओं (रेस्टोरेंट मालिक) की ओर से: याचिकाकर्ता अधिवक्ता
- प्रासंगिक कानून एवं संवैधानिक प्रावधान:
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यापार की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 19(6) (उचित निर्बंधन), अनुच्छेद 21 (आजीविका का अधिकार) एवं अनुच्छेद 25/26 (धार्मिक स्वतंत्रता व तीर्थ प्रबंधन)
- गुजरात नगर पालिका अधिनियम एवं खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSSA)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- तीर्थस्थलों का आध्यात्मिक चरित्र और व्यापारिक सीमाएं: ‘सार्वजनिक तीर्थस्थलों और प्राचीन ज्योतिर्लिंग परिसरों की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक पहचान पर व्यक्तिगत व्यापारिक हित वरीयता नहीं पा सकते; मंदिर के निकास व प्रवेश मार्गों के सीमित दायरे में मांसाहारी खाद्य पदार्थों के क्रय-विक्रय पर रोक लगाना सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता के हित में वैध व आनुपातिक प्रतिबंध है।’
- वर्तमान स्थिति: गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के तर्कों को रिकॉर्ड पर लिया; मामले में विस्तृत न्यायिक विचार-विमर्श जारी है।
Somnath Mandir:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति निशा एम. ठाकोर |
| मुख्य मुद्दा | सोमनाथ मंदिर के आसपास 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन की बिक्री और भंडारण पर स्थायी प्रतिबंध। |
| याचिकाकर्ता | मंदिर क्षेत्र के आसपास लाइसेंस प्राप्त 6 रेस्तरां मालिक |
| संविधान के अनुच्छेद | अनुच्छेद 19(1)(g) (आजीविका/व्यापार करने का अधिकार) बनाम अनुच्छेद 25/धार्मिक भावनाएं |
| गुजरात सरकार की दलील | हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर और मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबंध वैध है। |

