Tehelka Digital News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) और जनहित में किए गए स्टिंग ऑपरेशन्स के कानूनी संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
पत्रकार विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत व महिला पत्रकार रजनी को भी नियमित जमानत
हाईकोर्ट के जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने प्रसिद्ध मीडिया संस्थान ‘तहलका’ (Tehelka Digital News) से जुड़े पत्रकार विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। इसके साथ ही, अदालत ने इसी मामले में जेल में बंद महिला पत्रकार रजनी को भी नियमित जमानत (Regular Bail) पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा, स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो की कॉपी एफआईआर (FIR) दर्ज होने से पहले ही राज्य के स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर, मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष, मध्य प्रदेश के डीजीपी और सीएमएचओ (CMHO) को भेजी जा चुकी थी। ऐसे में अधिकारियों को सूचित करने के बाद जबरन वसूली या ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाना विधिक रूप से संदेहास्पद प्रतीत होता है।
मामला क्या है?: कन्या भ्रूण हत्या का भंडाफोड़ या जबरन वसूली?
यह पूरा विवाद देवास जिले में ‘तहलका’ के पत्रकारों द्वारा किए गए एक हाई-प्रोफाइल स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा है।
स्टिंग ऑपरेशन और भंडाफोड़: पत्रकारों (विनय अरोड़ा, रजनी व अन्य) ने देवास में अवैध रूप से चल रहे प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण (Prenatal Sex Determination), अवैध गर्भपात (Illegal Abortions) और कन्या भ्रूण हत्या (Female Foeticide) के रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए एक स्टिंग ऑपरेशन किया था। यह कृत्य PCPNDT अधिनियम, 1994 और MTP अधिनियम, 1971 का खुला उल्लंघन था।
बदले की भावना से एफआईआर का आरोप: स्टिंग की वीडियो क्लिप सामने आने के बाद, इस रैकेट से जुड़े शिकायतकर्ता की ओर से कोतवाली थाने में पत्रकारों के खिलाफ ही ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का केस दर्ज करा दिया गया। पुलिस ने पत्रकारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) व 308(6) (जबरन वसूली), 61(2) (आपराधिक साजिश) और 3(5) (समान इरादा) के तहत मुकदमा दर्ज किया।
गिरफ्तारी और अदालती चक्कर: इस मामले में महिला पत्रकार रजनी को 13 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि विनय अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को 11 मई को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद दोनों ने हाई कोर्ट का रुख किया।
हाई कोर्ट का रुख: “अधिकारियों को पहले ही भेजे जा चुके थे वीडियो”
पत्रकारों के वकील एडवोकेट अमन मालवीय ने अदालत में अकाट्य विधिक तर्क रखे, जिसे हाई कोर्ट ने पूरी तरह स्वीकार किया।
जबरन वसूली (Extortion) का मूल सिद्धांत लागू नहीं होता
बचाव पक्ष ने साबित किया कि 6 अप्रैल 2026 को ही स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के चेयरमैन, एमपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) और देवास के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को आधिकारिक तौर पर भेज दिए गए थे। इसके बाद, 7 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ता की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई। अदालत ने माना कि यदि पत्रकारों की नीयत पैसा ऐंठने की होती, तो वे एफआईआर से पहले देश और राज्य की सबसे बड़ी नियामक संस्थाओं को सबूत कभी नहीं सौंपते।
प्रतिशोधात्मक कार्रवाई (Retaliatory Action) की संभावना
अदालत ने केस डायरी और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि गंभीर अवैध गतिविधियों (कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक कलंक) का पर्दाफाश होने के बाद खुद को बचाने के लिए डॉक्टरों या इस रैकेट से जुड़े लोगों द्वारा प्रतिशोध में यह एफआईआर दर्ज कराई गई हो सकती है।
अदालत का अंतिम आदेश
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केस के गुण-दोष (Merits) पर अंतिम टिप्पणी किए बिना दोनों पत्रकारों को राहत दी।
विनय अरोड़ा (अग्रिम जमानत-2 जुलाई 2026): कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि विनय अरोड़ा को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें ₹50,000 के निजी बांड और एक प्रतिभूति (Surety) पर तत्काल रिहा किया जाए।
रजनी (नियमित जमानत- 25 जून 2026): पिछले ढाई महीने से जेल में बंद महिला पत्रकार को ₹1 लाख के निजी बांड पर रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वे ट्रायल की सभी सुनवाइयों में नियमित रूप से उपस्थित रहें।
केस मैट्रिक्स: म.प्र. हाई कोर्ट का आदेश (जुलाई 2026)
| विधिक और प्रशासनिक श्रेणियां | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति |
| संबंधित अदालत | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर/इंदौर खंडपीठ) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी (एकल पीठ) |
| केस संदर्भ | विनय अरोड़ा बनाम मध्य प्रदेश राज्य (Vinay Arora v. State of MP) |
| लागू कानून/धाराएं | भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5), 308(6) और 61(2) |
| पत्रकारों का मीडिया हाउस | तहलका डिजिटल न्यूज (Tehelka Digital News) |
| मुख्य विधिक साक्ष्य | 6 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों (DGP, NHRC) को भेजे गए स्टिंग वीडियो के सबूत। |
| बचाव पक्ष के वकील | एडवोकेट अमन मालवीय |
| अदालत का अंतिम निर्णय | विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत और रजनी को नियमित जमानत मंजूर। |

