केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | गुजरात उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026) |
| संबंधित अदालत | गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल एवं जस्टिस डी.एन. राय |
| संबंधित कानून | ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 91, CPC की धारा 100A एवं लेटर्स पेटेंट का क्लॉज 15 |
| मुख्य विधिक प्रश्न | क्या ट्रेड मार्क्स एक्ट की धारा 91 के तहत एकल पीठ के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में LPA पोषणीय है? |
| अदालत का विधिक स्टैंड | नहीं। CPC की धारा 100A के तहत विशेष अधिनियमों (Special Acts) में भी एकल पीठ के अपीलीय आदेश के खिलाफ दूसरी इंट्रा-कोर्ट अपील (LPA) प्रतिबंधित है। |
| अंतिम निर्णय | लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) गैर-पोषणीय मानकर खारिज (Dismissed)। |
Trade Marks Act: ट्रेडमार्क विवादों और अपीलीय क्षेत्राधिकार पर गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण विधिक फैसला सुनाया है।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डी.एन. राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 100A और लेटर्स पेटेंट के क्लॉज 15 के तहत ऐसी अपीलों पर स्पष्ट रोक (Bar) है। अदालत ने माना है कि ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 91 के तहत दायर वैधानिक अपील में एकल पीठ (Single Judge) द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच के समक्ष लेटर्स पेटेंट अपील (LPA – इंट्रा-कोर्ट अपील) पोषणीय (Maintainable) नहीं है।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह मामला अहमदाबाद ट्रेडमार्क रजिस्ट्री द्वारा 27 फरवरी 2023 को पारित एक आदेश से शुरू हुआ था।
- ट्रेडमार्क रजिस्ट्री का आदेश: रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड मार्क्स ने एक ट्रेडमार्क पंजीकरण विवाद का निपटारा किया।
- धारा 91 के तहत अपील: ‘राज आभूषण भंडार’ ने इस फैसले को ट्रेड मार्क्स एक्ट की धारा 91 के तहत हाई कोर्ट की एकल पीठ (Single Judge) के समक्ष चुनौती दी।
- एकल पीठ का फैसला: एकल पीठ ने 11 जुलाई 2025 को अपील पर अपना फैसला सुनाया।
- डिवीजन बेंच में LPA: एकल पीठ के फैसले से असंतुष्ट होकर मेसर्स राज आभूषण भंडार ने लेटर्स पेटेंट के क्लॉज 15 के तहत डिवीजन बेंच के समक्ष इंट्रा-कोर्ट अपील (LPA) दायर की।
- प्रारंभिक आपत्ति: असिस्टेंट रजिस्ट्रार और निजी प्रतिवादी ने प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराई कि एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दूसरी अपील/LPA पोषणीय नहीं है।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: CPC की धारा 100A और विधायी मंशा
गुजरात उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए तीन मुख्य निष्कर्ष दिए।
CPC की धारा 100A की प्रयोज्यता
अदालत ने माना कि CPC की धारा 100A के तहत लेटर्स पेटेंट अपील पर लगाई गई रोक केवल सिविल कोड के मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ट्रेड मार्क्स एक्ट जैसे विशेष कानूनों (Special Statutes) पर भी लागू होती है।
“धारा 100A की भाषा यह नहीं दर्शाती कि लेटर्स पेटेंट के तहत उपलब्ध अपील के अधिकार का अपवर्जन (Exclusion) केवल कोड (CPC) के तहत उत्पन्न मामलों तक सीमित है न कि किसी अन्य अधिनियम के तहत।”
ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार एक ‘ट्रिब्यूनल’ (Tribunal) की तरह काम करता है
कलकत्ता उच्च न्यायालय के ग्लोरियस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड बनाम डनलप इंटरनेशनल लिमिटेड मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार के पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां होती हैं (जैसे हलफनामे पर साक्ष्य लेना, हर्जाना तय करना, अपने फैसले की समीक्षा करना)। अतः रजिस्ट्रार एक ट्रिब्यूनल के रूप में कार्य करता है और इसके फैसलों पर धारा 100A का बार लागू होता है।
संसद की विधायी मंशा (Legislative Intent)
अदालत ने ट्रेडमार्क कानून के इतिहास पर ध्यान आकर्षित किया।
- पुराने ट्रेड एंड मर्चेंडाइज मार्क्स एक्ट, 1958 की धारा 109(5) में डिवीजन बेंच के समक्ष दूसरी अपील का प्रावधान था।
- नए ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 91 में संसद ने इस दूसरी अपील के प्रावधान को जानबूझकर हटा दिया (Omitted)।
- कोर्ट ने कहा कि संसद का इरादा ट्रेडमार्क मुकदमेबाजों को हाई कोर्ट के समक्ष केवल एक ही दौर की अपील तक सीमित रखना था।
निर्णय (Court Verdict)
गुजरात उच्च न्यायालय ने माना कि धारा 91 के तहत अपील तय करते समय एकल पीठ अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction) का प्रयोग करती है। इसलिए, CPC की धारा 100A और लेटर्स पेटेंट के क्लॉज 15 के तहत दायर सभी लेटर्स पेटेंट अपीलों (LPAs) को गैर-पोषणीय (Not Maintainable) मानते हुए खारिज (Dismissed) कर दिया गया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने ट्रेडमार्क विवाद के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है और पक्षकार कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपचार अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।

