Tuesday, August 25, 2026
HomeSupreme CourtTwisha Sharma: आरोपी के न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने का मतलब, न्यायपालिका...

Twisha Sharma: आरोपी के न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने का मतलब, न्यायपालिका उसे बचा लेगी…यह नैरेटिव तो बंद करें, सभी अपडेट यहां पढें

Twisha Sharma: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मिस पुणे विजेता ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के मामले में चल रहे मीडिया ट्रायल और सोशल मीडिया नैरेटिव पर गहरी पीड़ा (Anguish) व्यक्त की है।

सुप्रीम अदालत ने खुद लिया संज्ञान, सीबीआई को केस सौंपा

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले में खुद संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को केस सौंपा गया है। अदालत ने उस नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि मुख्य आरोपियों के न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने के कारण न्यायपालिका उन्हें बचाने या जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।

पूरा मामला क्या है? (Factual Background)

वैवाहिक पृष्ठभूमि: नोएडा की रहने वाली और पूर्व मिस पुणे विजेता ट्विशा शर्मा शर्मा ने भोपाल के एक वकील समर्थ सिंह से मेट्रोमोनियल/डेटिंग ऐप के जरिए मुलाकात के बाद शादी की थी। समर्थ सिंह का परिवार न्यायिक हलकों में काफी रसूखदार है; उनकी मां गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (Former District Judge) हैं और वर्तमान में जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष हैं।

संदिग्ध मौत: शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई 2026 को भोपाल में ट्विशा शर्मा का शव उनके घर में एक जिम्नास्टिक रस्सी से लटका हुआ मिला।

आरोप और एफआईआर: ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल वालों पर गंभीर घरेलू हिंसा और लगातार दहेज उत्पीड़न (Dowry Harassment) का आरोप लगाया। भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

जमानत और निलंबन: सत्र न्यायालय (Sessions Court) ने 15 मई को सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी, जिसे रद्द कराने के लिए मृतका के पिता ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। वहीं, पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) ने उनका वकालत का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया है।

Also Read; Reinstates Judge: न्यायिक अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार केवल चीफ जस्टिस को, रजिस्ट्रार जनरल को नहीं, केस पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य और तल्ख टिप्पणियां

न्यायपालिका की छवि खराब करने वाले नैरेटिव पर दुख: चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा, हम थोड़े आहत हैं। मीडिया में यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि चूंकि आरोपी एक पूर्व जिला जज हैं, इसलिए न्यायपालिका जांच को भटका रही है या निष्पक्ष ट्रायल नहीं होने दे रही। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी धारणा को तोड़ने और पूरी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हमने स्वतः संज्ञान लेकर मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा है।

मीडिया और गवाहों को सख्त हिदायत: सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसके बाद पीड़ित परिवार ने भी मीडिया में बयान दिए। इसके अलावा, पुलिस को दिए गए बयान (धारा 161 CrPC/BNSS) अखबारों में छप रहे हैं। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया:

मीडिया पर रोक: मीडिया संभावित गवाहों या रिश्तेदारों के बयानों को रिकॉर्ड करके उन्हें साउंड बाइट्स या सनसनीखेज खबरों में न बदले। इससे मुख्य जांच प्रभावित हो सकती है।

परिवार को सलाह: पीड़ित परिवार मीडिया के सामने बयानबाजी करने के बजाय अपने सारे तथ्य और साक्ष्य जांच एजेंसी (CBI) के सामने दर्ज कराए।

जनता से अपील: आम जनता सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अटकलबाजी से बचे और देश की प्रीमियर जांच एजेंसी (CBI) पर भरोसा रखे।

मरे हुए से बेहतर है तलाकशुदा बेटी: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने त्विषा द्वारा अपनी मौत से पहले भेजे गए संदेशों (Messages) का हवाला देते हुए भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लड़की ने संदेशों में लिखा था कि “वह नर्क में जी रही है।” एसजी ने कहा, माता-पिता के लिए एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि उनकी बेटी तलाकशुदा (Divorced) हो। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट को बताया कि पूर्व जज जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और पुलिस के सामने बयान दर्ज कराने से बच रही हैं।

मामले में अब तक की प्रगति

  • AIIMS से दोबारा पोस्टमार्टम: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा त्विषा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम कराया जा चुका है, ताकि मौत का सही कारण (Suicide या Homicide) स्पष्ट हो सके।
  • CBI जांच शुरू: सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं और सीबीआई ने जांच को पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया है।

केस मैट्रिक्स (Case Summary at a Glance)

कानूनी और प्रशासनिक बिंदुविवरण
सुप्रीम कोर्ट बेंचचीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस विपुल एम. पंचोली
मामले की प्रकृतिस्वतः संज्ञान (Suo Motu) कार्यवाही
वर्तमान जांच एजेंसीकेंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
अदालत का मुख्य निर्देशमीडिया और जनता इस संवेदनशील मामले में कड़ा संयम (Media Restraint) बरतें।

निष्कर्ष (Takeaway)

सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप कानून के शासन (Rule of Law) में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी था। जब रसूखदार पदों पर बैठे लोग किसी गंभीर आपराधिक मामले के दायरे में आते हैं, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शीर्ष अदालत ने मामले को स्थानीय प्रभाव से दूर कर सीबीआई को सौंपकर यह संदेश दिया है कि कानून की नजर में एक पूर्व न्यायाधीश और एक आम नागरिक बराबर हैं, लेकिन साथ ही ‘मीडिया ट्रायल’ के जरिए साक्ष्यों के दूषित होने पर भी चिंता जताई है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
28 ° C
28 °
28 °
94 %
5.1kmh
75 %
Mon
28 °
Tue
36 °
Wed
35 °
Thu
35 °
Fri
34 °

Recent Comments