Wednesday, November 4, 2026
HomeDelhi High Court'Udaipur Files: उदयपुर फाइल्स फिल्म की रिलीज रोकने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट...

‘Udaipur Files: उदयपुर फाइल्स फिल्म की रिलीज रोकने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

‘Udaipur Files: बॉलीवुड फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका

यह फिल्म 2022 में राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या की घटना से प्रेरित बताई जा रही है। याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने दायर की है। उनका आरोप है कि फिल्म से सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है और सामाजिक सौहार्द को खतरा हो सकता है।

ट्रेलर में भड़काऊ बातें, नेताओं और धार्मिक संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया

याचिका में कहा गया है कि फिल्म का ट्रेलर 26 जून 2025 को रिलीज हुआ था, जिसमें कई भड़काऊ बातें हैं। इसमें निलंबित नेता नूपुर शर्मा के विवादित बयानों का जिक्र है और एक मौजूदा मुख्यमंत्री को पक्षपातपूर्ण तरीके से दिखाया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ट्रेलर में 2022 की घटना को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और इसे धार्मिक साजिश के रूप में दिखाया गया है, जबकि असल में यह दो कट्टरपंथियों की करतूत थी।

देवबंद को कट्टरता का केंद्र और इस्लामी विद्वानों को गलत तरीके से दिखाया गया

मौलाना मदनी ने आरोप लगाया है कि फिल्म में देवबंद को कट्टरता का अड्डा बताया गया है और इस्लामी विद्वानों को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है। इससे समुदाय की गरिमा और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि यह फिल्म संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है, जो समानता, भेदभाव से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं।

संवेदनशील मामलों को दिखाना कोर्ट की अवमानना के बराबर

याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म में ज्ञानवापी मस्जिद जैसे लंबित मामलों का जिक्र किया गया है, जो कोर्ट की अवमानना और सामाजिक अशांति को बढ़ावा देने जैसा हो सकता है। याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है और महाराष्ट्र व गुजरात हाईकोर्ट में भी इसी तरह की याचिकाएं लगाई गई हैं।

CBFC और फिल्म निर्माताओं पर भी सवाल

इस मामले में केंद्र सरकार, सेंसर बोर्ड (CBFC), फिल्म के प्रोडक्शन हाउस और X Corps को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में CBFC के फिल्म को सर्टिफिकेट देने के फैसले को सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 और संबंधित गाइडलाइंस का उल्लंघन बताया गया है।

मौलाना मदनी का बयान: अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर नफरत नहीं फैलाई जा सकती

मौलाना मदनी ने सार्वजनिक बयान में कहा कि यह फिल्म एक समुदाय को बदनाम करने और देश की धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने CBFC पर अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि ट्रेलर में पैगंबर मोहम्मद और उनकी पत्नियों को लेकर आपत्तिजनक बातें हैं, जो पहले भी विवादों का कारण बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर धार्मिक भावनाएं भड़काना गलत है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
29.9 ° C
29.9 °
29.9 °
48 %
3.3kmh
56 %
Wed
29 °
Thu
30 °
Fri
29 °
Sat
29 °
Sun
30 °

Recent Comments