Thursday, October 29, 2026
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Police Custody: शुरुआती 15 दिनों के बाद भी मिल सकती है पुलिस कस्टडी…जान लीजिए BNSS की धारा 187(2) पर आधारित फैसला

केस मैट्रिक्स: SC Ruling on Section 187(2) BNSS (Police Custody Beyond 15 Days)

पहलूविवरण
संबंधित अदालतसर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय पीठजस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस संदीप मेहता
मूल कानूनभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS Section 187)
प्रमुख सिद्धांतपुलिस कस्टडी (अधिकतम 15 दिन) को पहले 40/60 दिनों के भीतर किस्तों/टुकड़ों में मांगा जा सकता है।
अदालत का फैसलाहाई कोर्ट द्वारा लगाई गई 15-दिन की सख्त समय-सीमा को रद्द किया गया; SIT को प्रभावी जांच की अनुमति।

Police Custody: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 187(2) की ऐतिहासिक व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नए कानून के तहत पुलिस हिरासत (Police Custody) केवल रिमांड के शुरुआती 15 दिनों तक सीमित नहीं है।

यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द करते हुए सुनाया, जिसमें आरोपी की पुलिस कस्टडी को शुरुआती 15 दिनों से आगे बढ़ाने पर सख्त रोक लगा दी गई थी। जांच एजेंसियां अब जांच के दौरान कुल 15 दिनों की पुलिस हिरासत को शुरुआती 40 या 60 दिनों की कुल हिरासत अवधि के दौरान टुकड़ों में (In Parts) मांग सकती हैं।

मामला क्या था?: कस्टोडियल डेथ का मामला और हाई कोर्ट की सख्त शर्तें

  • घटना: मामला मई 2026 में विजयवाड़ा (कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन) से गाड़े साई कृष्णा नामक व्यक्ति की कथित कस्टोडियल डेथ और शव गायब होने से जुड़ा है।
  • SIT की कार्रवाई: विशेष जांच दल (SIT) ने आरोपी पुलिस अधिकारी को जून 2026 में गिरफ्तार किया और पूछताछ के लिए 12 दिनों की पुलिस कस्टडी मांगी।
  • मैजिस्ट्रेट व हाई कोर्ट का आदेश: मैजिस्ट्रेट ने केवल 8 दिनों की पुलिस हिरासत मंजूर की और 15 कठोर शर्तें लगा दीं। इनमें कस्टडी की अंतिम समय सीमा (Non-extendable outer limit) तय करना, पूछताछ को केवल सेंट्रल जेल तक सीमित रखना और वकील की निरंतर उपस्थिति जैसी शर्तें शामिल थीं।
  • राज्य सरकार की अपील: आंध्र प्रदेश सरकार ने इन शर्तों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, यह तर्क देते हुए कि ये शर्तें एक निष्पक्ष और प्रभावी कस्टोडियल जांच में बाधा उत्पन्न करती हैं।

CrPC धारा 167 बनाम BNSS धारा 187: सुप्रीम कोर्ट का कानूनी विश्लेषण

सर्वोच्च न्यायालय ने पुराने आपराधिक कानून (CrPC) और नए कानून (BNSS) के बीच का बुनियादी अंतर स्पष्ट किया।

पुराना कानून (CrPC Section 167)             नया कानून (BNSS Section 187)
---------------------------------                  ---------------------------------
• पुलिस कस्टडी केवल शुरुआती                         • 15 दिनों की कुल कस्टडी को
  15 दिनों के रिमांड विंडो                                 शुरुआती 40 या 60 दिनों के दौरान
  के भीतर ही ली जा सकती थी।                          'टुकड़ों में' (In Parts) मांगा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: BNSS की धारा 187(2) और (3), पुरानी CrPC की धारा 167 के विपरीत, उस समय-सीमा को बढ़ाती है जिसके दौरान जांच एजेंसी द्वारा कुल मिलाकर 15 दिनों से अधिक की पुलिस हिरासत मांगी जा सकती है। यह कस्टडी रिमांड के केवल पहले 15 दिनों तक सीमित रहने के बजाय, डिटेंशन की कुल 40 या 60 दिनों की अवधि के दौरान टुकड़ों में उपलब्ध है।

विधायिका का उद्देश्य

अदालत ने कहा कि यह विधायी बदलाव इसलिए किया गया है ताकि यदि जांच के दौरान नए तथ्य, खुलासे या साक्ष्य सामने आते हैं, तो जांच अधिकारी को पुनः कस्टोडियल पूछताछ का वैधानिक अवसर मिल सके। इस खिड़की को मैजिस्ट्रेट या हाई कोर्ट द्वारा समय से पहले बंद करना कानून के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य निर्देश

  1. समय-सीमा की शर्त रद्द (Condition 28.15): कस्टडी पर गैर-विस्तार योग्य अंतिम सीमा तय करने वाली शर्त को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।
  2. पूछताछ का स्थान: पूछताछ केवल सेंट्रल जेल तक सीमित रखने की शर्त में ढील देते हुए SIT को अपनी पसंद के किसी भी निर्दिष्ट पुलिस केंद्र/सुविधा में पूछताछ करने की स्वतंत्रता दी गई।
  3. वकील की उपस्थिति: BNSS की धारा 38 का हवाला देते हुए पूछताछ के दौरान वकील की निरंतर मौजूदगी की शर्त को खारिज कर दिया गया (वकील केवल देखने योग्य सीमा के भीतर रह सकता है)।
  4. वीडियोग्राफी और सुरक्षा: पूछताछ की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश बरकरार रखा गया, हालांकि स्पष्ट किया गया कि आरोपी को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने (Transit) के समय लगातार वीडियोग्राफी आवश्यक नहीं है। साथ ही, SIT को आरोपी की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

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