मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह एवं न्यायमूर्ति शैल जैन |
| मुख्य विषय | क्या इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल के रूप में काम कर रहे वकील पर GST RCM लागू होगा या Forward Charge? |
| संबंधित कानून | CGST Act, 2017 (Section 9(1)), IBC, 2016 & Advocates Act, 1961 |
| अदालत का निर्णय | 1. वकालत का नामांकन रद्द करने की आवश्यकता नहीं है। 2. IP सेवाओं पर Forward Charge के तहत GST देना होगा और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। |
Professional Identity: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में पंजीकृत वकीलों को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (IBC) के तहत इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (IP) के रूप में काम करने के लिए अपना वकालत का नामांकन (Enrolment) निलंबित या रद्द करने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह भी तय किया कि जब कोई वकील एक इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (IRP/RP) के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करता है, तो उस पर जीएसटी (GST) का फॉरवर्ड चार्ज मैकेनिज्म (Forward Charge Mechanism) लागू होगा, न कि वकीलों के लिए मिलने वाला रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (Reverse Charge Mechanism – RCM)।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह (Justice Prathiba M. Singh) और न्यायमूर्ति शैल जैन (Justice Shail Jain) की पीठ ने माना कि कर (Tax) का निर्धारण इस बात से होता है कि दी जाने वाली सेवा की प्रकृति (Nature of Service) क्या है, न कि उसे प्रदान करने वाले व्यक्ति की पेशेवर योग्यता (Professional Identity) क्या है।
अदालत के मुख्य कानूनी सिद्धांत (Key Legal Findings)
- नामांकन पर कोई खतरा नहीं (Enrolment Intact):
- IBBI विनियम खुद स्वीकार करते हैं कि एक पंजीकृत वकील इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल बनने के लिए पात्र है।
- IBC और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 (Advocates Act) का सामंजस्यपूर्ण अर्थ निकाला जाना चाहिए। आईपी के रूप में काम करने से वकील की BCI में सनद/नामांकन रद्द नहीं होगा।
- ‘लीगल सर्विस’ बनाम ‘इंसॉल्वेंसी सर्विस’:
- जीएसटी वर्गीकरण (GST Scheme of Classification) के तहत ‘कानूनी सेवाएं’ (Legal Services) और ‘इंसॉल्वेंसी सेवाएं’ (Insolvency and Receivership Services) दो अलग-अलग श्रेणियां हैं।
- जब कोई वकील इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल (RP/IRP) का पद संभालता है, तो वह मुख्य रूप से प्रशासनिक, प्रबंधकीय और वैधानिक भूमिका निभाता है, न कि पारंपरिक वकील की भूमिका।
- फॉरवर्ड चार्ज मैकेनिज्म लागू होगा:
- वकीलों द्वारा दी जाने वाली सामान्य कानूनी सेवाओं पर जीएसटी अधिसूचना (Notification No. 13/2017-Central Tax) के तहत रिवर्स चार्ज (RCM) लागू होता है (जहां सेवा प्राप्तकर्ता टैक्स जमा करता है)।
- लेकिन इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल की सेवाएं RCM की श्रेणी में अधिसूचित नहीं हैं। इसलिए धारा 9(1) CGST एक्ट के तहत फॉरवर्ड चार्ज (Forward Charge) लागू होगा, जिसके तहत वकील को खुद GST रजिस्ट्रेशन लेना होगा और जीएसटी अनुपालित चालान (GST-compliant invoice) जारी करना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- याचिकाकर्ता: दिल्ली बार काउंसिल में 1995 से नामांकित एक वकील ने इंसॉल्वेंसी परीक्षा पास कर IRP (अंतरिम संकल्प पेशेवर) के रूप में NCLT द्वारा नियुक्ति प्राप्त की।
- विवाद: NCLT में जब वकील ने अपनी फीस ₹49,04,988 का दावा किया, तो NCLT/IBBI ने जीएसटी-अनुपालित चालान (GST Invoice) की मांग की।
- वकील का तर्क: याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि चूंकि वह एक वकील है, इसलिए उसकी सेवाओं पर रिवर्स चार्ज (RCM) लागू होना चाहिए और उसे अलग से GST रजिस्ट्रेशन लेने की जरूरत नहीं है। उसने यह डर भी जताया कि यदि उसकी सेवा को कानूनी सेवा से अलग माना गया तो BCI नियमों के तहत उसकी वकालत की सनद खतरे में पड़ सकती है।
- प्राधिकरणों (IBBI, CGST व BCI) का पक्ष: BCI और IBBI ने अदालत को बताया कि इंसॉल्वेंसी सेवा का काम प्रबंधकीय है। सभी इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स एक समान श्रेणी में आते हैं, इसलिए चाहे व्यक्ति वकील हो या सीए, कर का नियम (Forward Charge) सभी के लिए समान रहेगा।
उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय
हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए IBBI के रुख को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने IRP फीस के लिए GST अनुपालन वाला चालान प्रस्तुत करना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल के रूप में दी गई सेवाओं पर लागू होगा। वकीलों द्वारा सामान्य अदालती/कानूनी सलाह के लिए दी जाने वाली ‘लीगल सर्विसेज’ पर पहले की तरह रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) ही लागू रहेगा।

