Friday, October 2, 2026
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Legal Tampering: नोटरीकृत दस्तावेज़ों के पन्ने बदलना धोखाधड़ी/छेड़छाड़ है; कोर्ट ने याचिकाकर्ता, वकील और नोटरी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया

Legal Tampering: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय न्यायाधीशन्यायमूर्ति गौरी गोडसे (Bombay High Court)
मुख्य मुद्दानोटरी होने के बाद याचिका (Plaint) के पन्ने बदलना।
अदालत का निर्णयपन्ने बदलना दस्तावेजों से छेड़छाड़ माना जाएगा; वादी, वकील और नोटरी प्रत्येक पर ₹50,000 का जुर्माना।

Legal Tampering: बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक बेहद सख्त फैसले में स्पष्ट किया है कि एक बार जब किसी दस्तावेज़ या याचिका (Pleading) को नोटरीकृत (Notarised) कर दिया जाता है, तो उसके बाद न तो पक्षकार, न वकील और न ही नोटरी उसमें से किसी पन्ने को बदल सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि नोटरी के बाद पन्ने बदलना मूल दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ (Tampering) की श्रेणी में आता है।

अदालत ने याचिकाकर्ता (वादी), उसके रिकॉर्ड पर वकील (Advocate on Record) और संबंधित नोटरी के इस आचरण को “चौंकाने वाला और अस्वीकार्य” करार देते हुए तीनों पर ₹50,000 – ₹50,000 (कुल ₹1.5 लाख) का जुर्माना (Cost) ठोका है।

न्यायमूर्ति गौरी गोडसे (Justice Gauri Godse) की एकल पीठ एक अंतरिम आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जहां अदालत के रिकॉर्ड में रखी गई मुख्य याचिका और प्रतिवादियों को भेजी गई कॉपी के ‘प्रार्थना खंड’ (Prayer Clause) में अंतर पाया गया था।

Legal Tampering: अदालत के मुख्य निष्कर्ष और सख्त टिप्पणियां

  • नोटरी के बाद बदलाव की अनुमति नहीं:“एक बार जब शपथ दिला दी जाती है और नोटरी अपनी मुहर लगा देता है, तो उसके बाद खुद नोटरी को भी किसी पन्ने को बदलने की अनुमति नहीं होती है। यदि नोटरी या कोई पक्षकार पन्ना बदलता है, तो यह मूल दस्तावेज़ के साथ छेड़छाड़ मानी जाएगी।”
  • नोटरी के आचरण पर खिंचाई:
    • पीठ ने कहा कि नोटरी के ऐसे आचरण की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। यदि इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया, तो इससे पक्षकारों और नोटरी का मनोबल बढ़ेगा कि वे शपथ पत्र के बाद भी मूल याचिकाओं में हेरफेर कर सकें।
  • वकील की लापरवाही:
    • कोर्ट ने पाया कि रजिस्ट्रार कार्यालय की आपत्तियों (Office Objections) को हटाने के नाम पर वादी के वकील ने केवल अपनी सहूलियत के हिसाब से बदलाव कर दिए, जबकि प्रतिवादी को भेजी गई समन की प्रति में अलग पन्ना टाइप करके लगा दिया गया। यह वकील की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

Legal Tampering:मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)

  • घटना: सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि वादी ने कोर्ट में जमा की गई याचिका के पन्ने और प्रतिवादी (Defendant) को सौंपी गई फोटोकॉपी के पन्नों में अंतर था।
  • वादी व वकील की सफ़ाई: वादी के वकील ने तर्क दिया कि कोर्ट की आपत्तियों (Office Objections) को दूर करने के लिए बदलाव किए गए थे और स्टाफ की गलतफहमी के कारण नया पन्ना टाइप करके लगा दिया गया था।
  • नोटरी की सफ़ाई: नोटरी ने दावा किया कि उसने सद्भावना (Good Faith) में बाद की तारीख में अपनी मुहर लगाई थी और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि पन्ना बदल दिया गया है।
  • अदालत का रुख: अदालत ने तीनों की लिखित माफी स्वीकार तो कर ली, लेकिन इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को नजरअंदाज करने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट का निर्देश एवं सिफारिश

  1. जुर्माना: वादी, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और नोटरी—तीनों को ₹50,000-₹50,000 का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।
  2. नियमों में संशोधन का सुझाव: हाई कोर्ट ने नोट किया कि वर्तमान में कोर्ट ऑफिस की आपत्तियों को हटाने के लिए मूल याचिकाओं में संशोधन करने की कोई स्पष्ट प्रक्रिया नियमावली में दर्ज नहीं है। इसलिए कोर्ट ने सुझाव दिया कि नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए या इस संबंध में एक प्रैक्टिस नोट (Practice Note) जारी किया जाए।

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