Tuesday, October 27, 2026
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Spices Board Act: हींग एक मसाला है; इसे व्यक्तिगत नाम न होने पर भी श्रेणीगत अभिव्यक्ति से बाहर नहीं रखा जा सकता, मार्केट कमेटी का केस समझें

हाईकोर्ट के मुख्य तर्क और वैधानिक आधार

  1. व्यापक श्रेणी (General Expression) का अर्थ: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार ने “मसाल्याचे पदार्थ” (मसाले) जैसी व्यापक श्रेणी का उपयोग किया है, तो किसी वस्तु को केवल इसलिए बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका व्यक्तिगत नाम अलग से सूची में नहीं दोहराया गया है। ऐसा न करने पर ‘व्यापक श्रेणी’ का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
  2. केंद्रीय कानूनों और मानकों का हवाला: न्यायालय ने स्पाइस बोर्ड एक्ट (Spices Board Act), सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम (Customs Tariff Act) और खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) का अध्ययन करते हुए कहा कि भारतीय कानून लगातार हींग को मसाले के रूप में मान्यता देते हैं।
  3. मंडी शुल्क का अधिकार: हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1963 की धारा 31 के तहत APMC को हींग की बिक्री/व्यापार पर नियमानुसार बाजार शुल्क लगाने और वसूलने का पूर्ण कानूनी अधिकार है।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कृषि उपज और मसालों के वर्गीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए व्यवस्था दी है कि ‘हींग’ (Asafoetida) राज्य सरकार द्वारा जारी 2005 की अधिसूचना के तहत ‘मसाल्याचे पदार्थ’ (मसाले) की वैधानिक प्रविष्टि के अंतर्गत आती है।

न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के सितंबर 2014 के आदेश और विपणन निदेशक (Director of Marketing) के अक्टूबर 2011 के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया, जिसमें हींग को वैधानिक सूची में अलग से नामित न होने के आधार पर कृषि उपज मानने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि नासिक कृषि उपज मंडी समिति (Nashik APMC) ‘महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1963’ की धारा 31 के तहत हींग के व्यापार पर मंडी शुल्क (Market Fee) वसूलने की पूरी तरह हकदार है [नासिक एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी बनाम एन.जी. ठक्कर एंड संस एवं अन्य]।

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उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. सामान्य अभिव्यक्ति (Class Expression) का दायरा अधिसूचना की व्याख्या करते हुए अदालत ने कहा: “यह निर्धारित किया जाता है कि ‘हींग’ (Asafoetida) 8 दिसंबर 2005 की अधिसूचना में प्रयुक्त शब्द ‘मसाल्याचे पदार्थ’ (मसाले) के अंतर्गत आती है। यदि राज्य सरकार ने ‘मसाल्याचे पदार्थ’ जैसी एक व्यापक श्रेणीगत अभिव्यक्ति का उपयोग किया है, तो उस वर्ग में उचित रूप से आने वाली किसी वस्तु को केवल इसलिए बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका व्यक्तिगत नाम अलग से दोहराया नहीं गया है। अन्यथा, ऐसी सामान्य अभिव्यक्ति का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।”

2. विभिन्न केंद्रीय विधियों में हींग को मसाले का दर्जा अदालत ने स्पाइस बोर्ड एक्ट (Spices Board Act), कस्टम्स टैरिफ एक्ट और खाद्य सुरक्षा मानकों का विश्लेषण करते हुए रेखांकित किया कि भारतीय कानून हींग को निरंतर रूप से एक मसाले के रूप में ही मान्यता देता है। जब केंद्रीय कानून हींग को मसालों की अनुसूची में शामिल करता है, तो इसे मसाला न मानने का कोई उचित आधार नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद

  • व्यापारी की आपत्ति: नासिक स्थित व्यापारिक फर्म ‘एन.जी. ठक्कर एंड संस’ ने नासिक APMC द्वारा 1963 के अधिनियम की धारा 31 के तहत हींग पर मार्केट फीस की वसूली को चुनौती दी थी।
  • व्यापारी का तर्क: व्यापारी का कहना था कि 8 दिसंबर 2005 की अधिसूचना और 1963 के अधिनियम की अनुसूची में निर्दिष्ट कृषि उपजों की व्यक्तिगत सूची में ‘हींग’ का नाम अलग से दर्ज नहीं है।
  • प्रशासनिक आदेश (2011 और 2014): वर्ष 2011 में डायरेक्टर ऑफ मार्केटिंग ने व्यापारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शुल्क वसूली पर रोक लगा दी। राज्य मंत्री (अपीलीय प्राधिकारी) ने सितंबर 2014 में इस फैसले की पुष्टि कर दी थी। इसके खिलाफ नासिक APMC ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने नासिक APMC की याचिका स्वीकार करते हुए विपणन निदेशक और राज्य सरकार के आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने नासिक APMC को कानून सम्मत तरीके से हींग के क्रय-विक्रय पर मंडी शुल्क लगाने और वसूलने की पूर्ण अनुमति दी।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ता (नासिक APMC) की ओर से: अधिवक्ता निखिल पुजारी।
  • प्रतिवादी व्यापारी (एन.जी. ठक्कर एंड संस) की ओर से: अधिवक्ता हिमांशु बी. टक्के।
  • राज्य सरकार की ओर से: अतिरिक्त सरकारी वकील ध्रुति कपाड़िया।

Spices Board Act:मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति अमित बोरकर (Justice Amit Borkar)
केस का शीर्षकThe Nashik APMC v. NG Thakkar & Sons & Ors.
संबंधित कानूनमहाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1963 की धारा 31
मुख्य निर्णयहींग ‘मसाले’ की श्रेणी में शामिल है; नासिक APMC इस पर मंडी शुल्क (Market Fee) वसूलने की हकदार है।

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