कंपनी की दलील और CCPA का रुख
- कंपनी का पक्ष: Xboom ने तर्क दिया कि उसकी वेबसाइट पर सीधे बिक्री नहीं बल्कि इन्क्वायरी-बेस्ड मॉडल (Enquiry-based model) था, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों और सरकारी एजेंसियों जैसे संस्थागत खरीदारों तक पहुंच बनाना था।
- CCPA का खंडन: प्राधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक वेबसाइट पर उत्पादों को इस तरह प्रदर्शित करना ‘विज्ञापन’ के दायरे में ही आता है, जो किसी भी सामान्य खरीदार को आकर्षित कर सकता है।
नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ड्रोन रोधी प्रणालियों (Anti-Drone Systems), ड्रोन जैमर्स और जीपीएस जैमर्स जैसे संवेदनशील रक्षा उपकरणों के ऑनलाइन विज्ञापन, अनिवार्य वैधानिक लाइसेंस के प्रकटीकरण (Disclosures) और भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण पर एक बड़ा दंडात्मक आदेश जारी किया है। नियामक ने भारतीय रोबोटिक्स और ड्रोन ब्रांड ‘एक्सबूम यूटिलिटीज’ (Xboom Utilities) पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है और कंपनी को बिना लाइसेंस संबंधी शर्तों के स्पष्ट उल्लेख के ऐसे प्रतिबंधित उपकरणों के विज्ञापन पर तुरंत रोक लगाने का निर्देश दिया है।
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की पीठ ने एक्सबूम द्वारा अपनी वेबसाइट पर छह प्रतिबंधित उपकरणों को बिना किसी पूर्व चेतावनी या लाइसेंसिंग प्रतिबंधों के सूचीबद्ध करने पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए यह कार्रवाई की।
सीसीपीए के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं विनियामक टिप्पणियां
1. संचार नेटवर्क में हस्तक्षेप करने वाले उपकरणों की खुली बिक्री पर पाबंदी नियामक ने रेखांकित किया कि जैमर्स और एंटी-ड्रोन तकनीक दूरसंचार, उपग्रह नेविगेशन और लाइसेंसीकृत संचार फ्रीक्वेंसी को बाधित (Jam/Neutralise) करने की क्षमता रखती हैं:
- ऐसे उपकरण सामान्य वाणिज्यिक उत्पाद (Ordinary Commercial Products) नहीं हैं जिन्हें खुले बाजार में बिना प्रतिबंधों के बेचा जा सके।
- इन उपकरणों की बिक्री, खरीद और उपयोग विभिन्न वैधानिक प्रतिबंधों, गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग (DoT) के कड़े विनियामक लाइसेंसिंग तंत्र के अधीन आते हैं।
2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन प्राधिकरण ने कंपनी को निम्नलिखित विधिक उल्लंघनों का दोषी पाया:
- धारा 2(9) (उपभोक्ता अधिकार): उपभोक्ताओं को उत्पाद की कानूनी सीमाओं और उपयोग से जुड़े जोखिमों की सही जानकारी से वंचित रखना।
- धारा 2(28) (भ्रामक विज्ञापन): महत्वपूर्ण विनियामक शर्तों और अनिवार्य लाइसेंसों की जानकारी जानबूझकर छुपाना।
- धारा 2(47) (अनुचित व्यापार व्यवहार – Unfair Trade Practice): प्रतिबंधित वस्तुओं को सामान्य उत्पादों की तरह प्रस्तुत करना।
3. ‘पूछताछ आधारित मॉडल’ (Enquiry-Based Model) का बचाव खारिज
- एक्सबूम ने तर्क दिया था कि उसकी वेबसाइट एक खुला ई-कॉमर्स कार्ट नहीं है, बल्कि ‘पूछताछ आधारित’ मंच है जो केवल सरकारी एजेंसियों और सशस्त्र बलों जैसे संस्थागत ग्राहकों के लिए लक्षित था।
- प्राधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए व्यवस्था दी कि सार्वजनिक वेबसाइट पर उत्पादों को इस तरह प्रदर्शित करना जो संभावित खरीदारों को आकर्षित कर सके, उपभोक्ता कानून के तहत सीधे ‘विज्ञापन’ (Advertisement) के दायरे में आता है।
चिन्हित किए गए 6 प्रतिबंधित उत्पाद
सीसीपीए ने एक्सबूम की वेबसाइट से निम्नलिखित छह उपकरणों को बिना विनियामक प्रकटीकरण के सूचीबद्ध पाया:
- X-Mini
- X-Radar XK2
- X-Eye
- X-Gun XK4
- RF-Patrol XK2
- XGuard
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (फरवरी 2026 से कार्यवाही)
- कारण बताओ नोटिस: सीसीपीए ने फरवरी 2026 में एक्सबूम को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें पूछा गया था कि बिना किसी नियामक अनुमोदन और चेतावनी के संवेदनशील जैमर्स का प्रचार क्यों किया जा रहा है।
- कंपनी का पक्ष और थर्ड-पार्टी एमओयू: * नोटिस मिलने के बाद कंपनी ने विवादित लिस्टिंग निलंबित करने का दावा किया।
- कंपनी ने बचाव में एक तीसरे पक्ष (मनीष कुमार) के साथ निष्पादित समझौता ज्ञापन (MoU) पेश किया और तर्क दिया कि वह वेंडर अधिकृत सरकारी एजेंसियों को उत्पाद की आपूर्ति करता था।
- दस्तावेजों में खामी: प्राधिकरण ने पाया कि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज विनियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) को सिद्ध करने में पूरी तरह अपर्याप्त थे और कंपनी ने अन्य ड्रोन श्रेणियों में भी प्रमाणन संबंधी आवश्यक विवरण प्रदर्शित नहीं किए थे।
सीसीपीए का अंतिम दंडात्मक आदेश
- ₹10 लाख का जुर्माना: सीसीपीए ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 21 के तहत एक्सबूम यूटिलिटीज पर ₹10 लाख का वित्तीय दंड अधिरोपित किया।
- विज्ञापनों पर प्रतिबंध: कंपनी को निर्देश दिया गया कि वह एंटी-ड्रोन सिस्टम, ड्रोन जैमर्स या संबंधित उपकरणों को तब तक सूचीबद्ध, विज्ञापित या प्रचारित न करे जब तक कि लागू वैधानिक मंजूरियों और लाइसेंसों का प्रमुखता से प्रदर्शन न किया जाए।
- पहुंच का प्रतिबंध (Restricted Access): ऐसे संवेदनशील उत्पादों तक पहुंच केवल अधिकृत सरकारी, रक्षा या कानून-प्रवर्तन (Law Enforcement) एजेंसियों तक सीमित रखने की व्यवस्था बनाई जाए।
- अनुपालन रिपोर्ट: कंपनी को इस आदेश के अनुपालन के संबंध में 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) बनाम एक्सबूम यूटिलिटीज [स्वतः संज्ञान कार्यवाही]
- प्रासंगिक कानून: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(9), धारा 2(28), धारा 2(47) एवं धारा 21 (भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध दंड अधिरोपित करने की शक्ति); भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933; दूरसंचार विभाग (DoT) जैमर नीति निर्देश
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- एक्सबूम यूटिलिटीज की ओर से: अधिवक्ता अमृता शर्मा एवं महिमा सदावत
- आदेशकर्ता पीठ: निधि खरे (मुख्य आयुक्त) एवं अनुपम मिश्रा (आयुक्त), केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)
Ads Without License: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| नियामक प्राधिकरण | केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) |
| कार्रवाई का कारण | एंटी-ड्रोन/GPS जैमर का बिना लाइसेंस जानकारी के प्रचार |
| जुर्माना राशि | ₹10 लाख (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 21 के तहत) |
| प्रभावित उत्पाद | X-Mini, X-Radar XK2, X-Eye, X-Gun XK4, RF-Patrol XK2 और XGuard |
| मुख्य निर्देश | 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करना। |

