हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और सुनवाई के बिंदु
- 9 फर्जी प्रोफाइल और अलग-अलग पहचान: हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी ने मै्रीमोनियल साइट्स पर 9 अलग-अलग फर्जी प्रोफाइल बना रखी थीं, जिनमें अलग-अलग उम्र, शैक्षणिक योग्यता और आय की जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इन प्रोफाइल की विविधता से ही साफ होता है कि आरोपी का इरादा लड़कियों को अपने जाल में फंसाना था।
- ब्लैकमेलिंग और अभद्र व्यवहार के आरोप: पीड़िता ने शिकायत में बताया कि 2024 में मै्रीमोनियल साइट के जरिए संपर्क के बाद आरोपी ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह अंतरंग तस्वीरें लीक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा और अवांछित शारीरिक मांगों के लिए दबाव बनाने लगा। पीड़िता ने 2025 में पुलिस शिकायत दर्ज कराई।
- आरोपी की वॉइस रिकॉर्डिंग में स्वीकारोक्ति: पीड़िता ने आरोपी की एक कॉल रिकॉर्डिंग पेश की, जिसमें वह कई लड़कियों को धोखा देने और उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचने की बात स्वीकार कर रहा था। फिलहाल यह रिकॉर्डिंग फोरेंसिक जांच (Forensic Analysis) के लिए भेजी गई है।
- अन्य पीड़ितों के सामने आने की संभावना: राज्य (अभियोजन पक्ष) की ओर से पेश वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक खतरनाक अपराधी है। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कई अन्य पीड़ित महिलाएं भी सामने आ सकती हैं, जो सामाजिक डर के कारण अब तक शिकायत दर्ज नहीं करा पाई थीं।
- जमानत खारिज करने का फैसला: अदालत ने आरोपी के कबूलनामे और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया:“मुझे यह जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं लगता। जमानत याचिका खारिज की जाती है।” — न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने मैट्रिमोनियल (वैवाहिक) पोर्टल्स पर अलग-अलग उम्र, शैक्षणिक योग्यता और आय के फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवतियों को शादी का झांसा देने, जबरन शारीरिक संबंध बनाने, और अंतरंग तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने के आरोपी की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने आरोपी गौरव जायसवाल द्वारा दायर नियमित जमानत याचिका पर 22 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध की सुनियोजित और गंभीर प्रकृति तथा समाज पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि आरोपी मासूम लड़कियों को फंसाने वाला एक “खतरनाक शिकारी” (Predator of innocent girls) है।
उच्च न्यायालय के प्रमुख अवलोकन एवं विधिक निष्कर्ष
1. ‘9 फर्जी प्रोफाइल और अलग-अलग पहचान: मासूम लड़कियों का शिकारी’ डिजिटल साक्ष्यों और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों का संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने अपने आदेश में दर्ज किया: “आरोपी द्वारा मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर 9 फर्जी प्रोफाइल बनाई गई थीं, जिनमें से एक प्रोफाइल लड़की के नाम से भी तैयार की गई थी। ये सभी प्रोफाइल अलग-अलग आयु वर्ग, भिन्न-भिन्न शैक्षणिक योग्यताओं और अलग-अलग व्यवसायों/आय वर्ग की थीं। यह तथ्य प्रथम दृष्टया अभियोजन पक्ष (विद्वान अतिरिक्त स्थायी वकील) की इस दलील को पूरी तरह पुष्ट करता है कि आरोपी/आवेदक मासूम लड़कियों का शिकारी (Predator of innocent girls) है।”
2. ‘पीड़िता बालिग है’ का बचाव तर्क अदालत ने नकारा
- आरोपी के वकीलों ने तर्क दिया था कि शिकायतकर्ता एक “परिपक्व और बालिग महिला” (Grown-up lady) है, जिसे शादी के झूठे वादे से शारीरिक संबंधों के लिए आसानी से प्रेरित नहीं किया जा सकता था।
- अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए माना कि वैवाहिक प्रोफाइल में जानबूझकर पहचान, योग्यता और मंशा छिपाकर केवल यौन शोषण के उद्देश्य से विश्वास में लेना सहमति की वैधता को पूरी तरह दूषित करता है।
3. अन्य पीड़ितों के सामने आने की संभावना और फॉरेंसिक रिपोर्ट
- अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए बताया कि पीड़िता ने आरोपी की वह वॉयस रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी है जिसमें वह स्वीकार कर रहा है कि उसने पूर्व में कई लड़कियों को इसी तरह ठगा है और उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींची हैं।
- राज्य के स्थायी वकील ने पीठ को अवगत कराया कि यह रिकॉर्डिंग वर्तमान में फॉरेंसिक विश्लेषण (FSL) के अधीन है। कई अन्य पीड़ित महिलाएं सामाजिक बदनामी के भय से सामने आने में हिचकिचा रही थीं, परंतु फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी शिकायतकर्ता सामने आएंगे।
- अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी द्वारा आपत्तिजनक तस्वीरें खींचने और कई लड़कियों को ठगने की बात प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर आने के कारण यह जमानत के लिए कतई उपयुक्त मामला नहीं है।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं शिकायत के आरोप
- 2024 में संपर्क और शादी का झांसा: पीड़िता और आरोपी की मुलाकात वर्ष 2024 में एक प्रतिष्ठित वैवाहिक वेबसाइट के जरिए हुई थी। आरोपी ने खुद को प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि का बताकर शादी का पक्का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए।
- तस्वीरें लीक करने की धमकी और ब्लैकमेलिंग: इसके बाद आरोपी ने शादी से मुकरते हुए पीड़िता की अंतरंग और अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर लीक करने की धमकी दी। उसने लगातार अनैतिक यौन संबंधों की मांग की और पीड़िता पर ‘थ्रीसम’ (Threesome) यौन संबंधों के लिए दबाव बनाया।
- 2025 में एफआईआर दर्ज: प्रताड़ना और लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर पीड़िता ने वर्ष 2025 में पुलिस में औपचारिक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: गौरव जायसवाल बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) [BAIL APPLN. – दिल्ली उच्च न्यायालय]
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता (आरोपी) की ओर से: अधिवक्ता राखी दुबे एवं बिपिन दुबे
- अभियोजन (राज्य) की ओर से: अतिरिक्त स्थायी वकील (ASC) अमोल सिन्हा (सहयोगी: अधिवक्ता विनीत मल्होत्रा)
- प्रासंगिक कानून एवं धाराएं:
- भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म / शादी के झूठे वादे पर सहमति का अभाव), धारा 506 (आपराधिक धमकी), एवं धारा 384 (जबरन वसूली/एक्सटॉर्शन)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के समतुल्य प्रावधान (विशेष रूप से धारा 69 – पहचान छिपाकर या धोखे से शादी का वादा कर यौन संबंध बनाना)
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 66E (गोपनीयता का हनन) एवं धारा 67A (यौन स्पष्ट सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशन/प्रसारण)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 / पूर्ववर्ती CrPC धारा 439 (जमानत के विवेकाधिकार का सिद्धांत)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत व नजीरें:
- दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा राज्य (2013, सुप्रीम कोर्ट) एवं अनुराग सोनी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2019, सुप्रीम कोर्ट) — ‘यदि शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और केवल यौन शोषण के इरादे से धोखा दिया गया था, तो यह भारतीय कानून के तहत धारा 90 IPC (तथ्य की भ्रांति के तहत प्राप्त सहमति) के आधार पर दुष्कर्म का अपराध बनता है।’
- प्रशांत भारती बनाम राज्य (NCT दिल्ली) — ‘पहचान छिपाकर या कई फर्जी प्रोफाइलों के जरिए आपराधिक आचरण आदतन और पूर्व-नियोजित अपराध को दर्शाता है।’
- पीठ: न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया (दिल्ली उच्च न्यायालय)
- निर्णय: जमानत अर्जी खारिज (Bail Application Dismissed)।
Predator Of Girls: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया (Justice Girish Kathpalia) |
| मामले का नाम | गौरव जायसवाल बनाम राज्य (Gaurav Jaiswal Vs The State) |
| मुख्य आरोप | फर्जी मै्रीमोनियल प्रोफाइल, शादी का झूठा वादा, आपत्तिजनक फोटो लीक करने की धमकी |
| कोर्ट का अंतिम फैसला | आरोपी की जमानत याचिका खारिज |

