Saturday, November 7, 2026
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Delhi Pollution: गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध… NCR में रहने वाले अधिवक्ताओं व कोर्ट स्टाफ को शीतकालीन प्रतिबंधों से मिली राहत

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मामले की पृष्ठभूमि और विधिक तर्क

  1. शीतकालीन वाहन प्रतिबंध अधिसूचना:दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने 23 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच दिल्ली से बाहर पंजीकृत गैर-BS VI वाहनों के प्रवेश और संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, इस अधिसूचना में पर्यावरण विभाग को कुछ विशिष्ट श्रेणियों को छूट देने की शक्ति दी गई थी।
  2. DHCBA की दलीलें (संवैधानिक व व्यावहारिक आवश्यकता):दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने अधिवक्ता अमित चौधरी के माध्यम से याचिका दायर कर तर्क दिया कि दिल्ली के अधिकांश वकील NCR के शहरों में रहते हैं और उन्हें दैनिक सुनवाई, क्लाइंट मीटिंग्स तथा चैंबर में उपस्थित होने के लिए दिल्ली आना पड़ता है। समय पर अदालत न पहुँच पाने से वादकारियों के अधिकार प्रभावित होंगे। DHCBA ने एक विनियमित व्यवस्था का प्रस्ताव दिया, जिसमें सत्यापन, वैध पोल्यूशन सर्टिफिकेट (PUCC) और पहचान पत्र के आधार पर प्रत्येक पात्र अधिवक्ता को एक नामांकित वाहन उपयोग करने की अनुमति देने की मांग की गई थी।
  3. कोविड-19 नज़ीर और सरकारी शक्ति:याचिकाकर्ता ने 2021 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जब महामारी के दौरान वकीलों को पहचान पत्र दिखाने पर यात्रा की छूट दी गई थी। कोर्ट ने माना कि वकीलों का काम आवश्यक सार्वजनिक सेवा (Essential Public Function) का हिस्सा है, इसलिए छूट का औचित्य बनता है।

मुख्य विधिक व प्रशासनिक निष्कर्ष

1. न्याय तक पहुंच और वकीलों की भूमिका (Access to Justice):

यह आदेश स्थापित करता है कि पर्यावरण संरक्षण के उपाय आवश्यक हैं, लेकिन उनसे न्यायिक प्रशासन और नागरिकों के कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार बाधित नहीं होना चाहिए। वकीलों को आवश्यक सेवा प्रदाता मानकर छूट देना न्याय वितरण प्रणाली को सुचारू बनाए रखता है।

2. विनियमित छूट का सिद्धांत (Regulated Exemption):

अदालत का यह फैसला कोई पूर्ण (Blanket) पर्यावरणीय छूट नहीं देता है, बल्कि इसे केवल कार्य दिवसों तक सीमित रखकर पर्यावरण नियमों और न्यायिक आवश्यकताओं के बीच एक संतुलित ढांचा तैयार करता है।

नई दिल्ली: भारत का संविधान के अनुच्छेद 21 (न्याय तक त्वरित पहुंच का अधिकार / Access to Justice बनाम स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), अनुच्छेद 19(1)(g) (विधि व्यवसाय और आजीविका का अधिकार), वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air Act, 1981), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, तथा दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा 23 जून 2026 को जारी अधिसूचना (1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-VI मानकों से कम वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध) के विधिक मानकों के तहत दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्याय प्रशासन को सुचारू रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण राहतकारी आदेश पारित किया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) की एकल पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम व्यवस्था दी कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)—जिसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद शामिल हैं—में रहने वाले अधिवक्ताओं (Advocates) और अदालती कर्मचारियों (Judicial/Court Staff) को दिल्ली में गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर लगे शीतकालीन प्रतिबंध से छूट (Exempted from ban on non-BS VI vehicles) प्राप्त होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विशेष छूट पूर्णतः सशर्त होगी और केवल न्यायालय के कार्य दिवसों (Only on court working days) पर ही लागू रहेगी। पीठ ने बार एसोसिएशन की इस दलील से सहमति जताई कि अधिवक्ता और अदालती कर्मचारी केवल एक सामान्य नागरिक नहीं हैं, बल्कि वे न्याय प्रशासन में न्यायालय की सहायता करने वाले आवश्यक अंग हैं; यदि वे समय पर अदालत नहीं पहुंच पाते हैं, तो इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव वादकारियों के अधिकारों और अदालतों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।

उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘अधिवक्ता और अदालती कर्मचारी आवश्यक न्यायिक कार्य करते हैं; कार्य दिवसों पर छूट वैध’:

न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ के समक्ष डीएचसीबीए के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि न्याय प्रशासन कोई वैकल्पिक कार्य नहीं बल्कि एक बुनियादी संवैधानिक सेवा है। अदालत ने तथ्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद दर्ज किया:

  • दिल्ली के बाहर (एनसीआर शहरों) में पंजीकृत ऐसे वाहन जो बीएस-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके संचालन पर लगे शीतकालीन प्रतिबंध से अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मियों को कार्य दिवसों में बाहर रखा जाएगा।
  • यह छूट यह सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है कि अदालतों में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण स्थगित न हो और न्याय वितरण बाधित न हो।

2. छूट की कानूनी सीमाएं (कार्य दिवस व वैध दस्तावेज):

  • अदालत ने साफ किया कि यह छूट शनिवार, रविवार या अदालती अवकाशों पर व्यक्तिगत कार्यों के लिए उपलब्ध नहीं होगी।
  • यह विधिक छूट उन अधिवक्ताओं के लिए लागू होगी जो अपने पेशेवर पहचान पत्र (Bar Council / High Court Bar ID), वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र (RC) और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के साथ अदालती कार्यों हेतु दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश कर रहे हैं।

बार एसोसिएशन (DHCBA) के मुख्य कानूनी तर्क एवं विधिक आधार

1. न्याय वितरण में बाधा और वादकारियों के हितों पर आघात:

डीएचसीबीए के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन (Senior Advocate N Hariharan) ने तर्क दिया:

  • दिल्ली की अदालतों (सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट, जिला अदालतों और विभिन्न न्यायाधिकरणों) में वकालत करने वाले अधिवक्ताओं की एक बहुत बड़ी संख्या एनसीआर शहरों—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद—में निवास करती है।
  • अदालतों में मुकदमों की सुनवाई निश्चित दैनिक कॉज लिस्ट और न्यायिक समय-सारिणी से बंधी होती है। यदि किसी अधिवक्ता का वाहन सीमा पर रोक दिया जाता है, तो वह नियत समय पर कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सकेगा, जिसके परिणामस्वरूप मुकदमों में एकतरफा आदेश हो सकते हैं या वादकारियों को अपूरणीय विधिक क्षति हो सकती है।

2. अधिसूचना में सरकार के पास छूट देने की वैधानिक शक्ति:

  • हरिहरन ने 23 जून 2026 की अधिसूचना के प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि अधिसूचना में स्वयं दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग को यह शक्ति दी गई है कि वह विशिष्ट श्रेणियों के वाहनों को आवश्यक सेवाओं के आधार पर छूट दे सकता है।
  • बार एसोसिएशन ने 27 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सरकार के समक्ष एक विस्तृत प्रत्यावेदन दिया था, जिसमें प्रत्येक पात्र अधिवक्ता हेतु एक मनोनीत वाहन (One Nominated Vehicle) के लिए विनियमित छूट देने का प्रस्ताव रखा गया था। सरकार द्वारा समय पर निर्णय न लेने के कारण बार को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

3. कोविड-19 महामारी काल के न्यायिक आदेशों की मिसाल:

  • याचिका में वर्ष 2021 में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का हवाला दिया गया, जहाँ लॉकडाउन और कड़े यातायात प्रतिबंधों के दौरान भी वकीलों को केवल उनके बार काउंसिल पहचान पत्र प्रस्तुत करने पर पेशेवर अदालती कार्यों हेतु दिल्ली में आवागमन की अनुमति दी गई थी।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं प्रक्रियात्मक विवरण

संदर्भ / विवरणतथ्यात्मक स्थिति एवं पक्षों के दावे
फोरम / न्यायालयदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 226)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) (एकल पीठ)
आदेश की तिथि7 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
केस संदर्भदिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार व अन्य [Writ Petition (Civil) / 2026]
याचिकाकर्तादिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) (अधिवक्ता अमित चौधरी के माध्यम से दायर)।
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्तावरिष्ठ अधिवक्ता एवं डीएचसीबीए अध्यक्ष एन. हरिहरन (Senior Advocate N Hariharan)।
प्रतिवादी पक्ष1. पर्यावरण एवं वन विभाग, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD)
2. दिल्ली परिवहन विभाग एवं दिल्ली पुलिस (ट्रैफिक)।
आक्षेपित प्रशासनिक अधिसूचनादिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा जारी 23 जून 2026 की अधिसूचना — जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के मद्देनजर 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-VI मानकों से कम वाले निजी व वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग1. एनसीआर (गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद) में रहने वाले वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को अपने वाहनों से दिल्ली में अदालती कामकाज हेतु आने-जाने के लिए विनियमित छूट दी जाए।
2. वैकल्पिक रूप से, दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह बार एसोसिएशन के 27 अक्टूबर 2026 के प्रत्यावेदन पर समयबद्ध तरीके से सकारण आदेश पारित करे।
DHCBA द्वारा प्रस्तावित विधिक नियंत्रणबार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वे पर्यावरण नियमों से कोई पूर्ण या निरपेक्ष छूट नहीं मांग रहे हैं; प्रत्येक अधिवक्ता को अपने एक अधिकृत वाहन हेतु बार आईडी और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) के सत्यापन के अधीन विनियमित अनुमति दी जानी चाहिए।
उच्च न्यायालय का अंतिम अंतरिम आदेशयाचिका पर राहत प्रदान करते हुए आदेश दिया कि एनसीआर में रहने वाले वकीलों और अदालती कर्मचारियों को गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध से छूट रहेगी, जो केवल अदालती कार्य दिवसों (Court Working Days) पर लागू होगी।

विधिक एवं प्रशासनिक विश्लेषण: ‘अनुच्छेद 21 (न्याय तक पहुंच बनाम स्वच्छ पर्यावरण) और आवश्यक सेवाएं’

  • ‘न्याय तक पहुंच’ (Access to Justice) और अनुच्छेद 21 का संवैधानिक महत्व:
    • सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने अनीता कुशवाहा बनाम पुष्पा सदन [(2016) 8 SCC 509] में स्थापित किया था कि अदालत तक पहुंचना और अपने अधिवक्ता के माध्यम से विधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त करना नागरिकों का बुनियादी मानवाधिकार और अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग है।
    • यदि ट्रैफिक या पर्यावरण प्रतिबंधों के कारण वकीलों का एक बड़ा वर्ग अदालतों में पहुंचने में असमर्थ हो जाता है, तो अदालती रोस्टर चरमरा जाएगा, जिससे न्याय की पूरी व्यवस्था ठप हो सकती है। अतः स्वच्छ हवा के अधिकार और न्याय के अधिकार के बीच एक व्यावहारिक संतुलन बनाना आवश्यक था।
  • प्रत्यायोजित विधान में छूट के प्रावधान (Provisions for Exemption):
    • दिल्ली सरकार की 23 जून 2026 की अधिसूचना कोई निरपेक्ष निषेधाज्ञा नहीं थी; उसमें आपातकालीन सेवाओं (एम्बुलेंस, पुलिस, अग्निशमन आदि) के साथ-साथ पर्यावरण विभाग को अतिरिक्त श्रेणियों को छूट देने की अवशिष्ट शक्ति (Residuary Power of Exemption) दी गई थी।
    • उच्च न्यायालय ने सही पाया कि वकीलों और अदालती कर्मचारियों का कार्य किसी भी अन्य आपातकालीन या आवश्यक सेवा से कम महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि उनके बिना अदालतें कार्य नहीं कर सकतीं।
  • सशर्त और विनियमित राहत की शुचिता:
    • अदालत ने कोई खुली छूट (Blanket Exemption) नहीं दी है। छूट को केवल “अदालती कार्य दिवसों” तक सीमित रखकर यह सुनिश्चित किया गया है कि इसका दुरुपयोग व्यक्तिगत या सप्ताहांत की गैर-अदालती यात्राओं के लिए न हो सके।
    • साथ ही, सभी वाहनों के लिए वैध PUCC होना अनिवार्य रहेगा, जिससे यह सुनिश्चित हो कि वाहन अत्यधिक धुआं न उगल रहे हों।

विधिक विवरण एवं उपस्थित अधिवक्ता

  • न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली (संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 226)
  • केस संदर्भ: दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार व अन्य [Writ Petition (Civil) / 2026]
  • पीठासीन न्यायाधीश: न्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) (एकल पीठ)
  • आदेश की तिथि: 7 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
  • कार्यवाही का परिणाम: अंतरिम राहत स्वीकृत; एनसीआर से दिल्ली आने वाले अधिवक्ताओं और अदालती कर्मचारियों को कार्य दिवसों पर गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध से छूट प्रदान की गई; विस्तृत आदेश प्रतीक्षारत।

विधिक प्रतिनिधित्व:

  • याचिकाकर्ता (DHCBA) की ओर से:
    • वरिष्ठ अधिवक्ता एवं डीएचसीबीए अध्यक्ष एन. हरिहरन (Senior Advocate N Hariharan)
    • अधिवक्ता: अमित चौधरी (Advocate Amit Choudhary) एवं सहयोगी विधिक टीम।
  • प्रतिवादी (दिल्ली सरकार एवं पुलिस) की ओर से: दिल्ली सरकार के स्थायी विधिक परामर्शदाता।
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक उपबंध:
    • भारत का संविधान:
      • अनुच्छेद 21 — त्वरित न्याय तक पहुंच का अधिकार एवं जीवन की सुरक्षा
      • अनुच्छेद 19(1)(g) — विधि व्यवसाय करने और न्यायालयों में उपस्थित होने का मौलिक अधिकार
      • अनुच्छेद 226 — उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार
    • पर्यावरण एवं वन विभाग, GNCTD अधिसूचना (23 जून 2026) — गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर मौसमी प्रतिबंध व छूट की धाराएं
    • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air Act, 1981) एवं मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (PUCC नियम)
  • संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
    • न्याय प्रशासन, आवश्यक सेवाएं और पर्यावरणीय प्रतिबंधों में छूट का विधिक मानक: ‘न्यायालयों में मामलों की समयबद्ध सुनवाई और न्याय तक पहुंच (Access to Justice) संविधान के अनुच्छेद 21 का अपरिहार्य घटक है; अधिवक्ता और न्यायिक कर्मचारी न्याय प्रशासन के पहिए हैं और वे अनिवार्य सार्वजनिक एवं संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं; राष्ट्रीय राजधानी में शीतकालीन प्रदूषण से निपटने हेतु लागू किए गए गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश प्रतिबंधों से अधिवक्ताओं और अदालती कर्मियों को केवल कार्य दिवसों हेतु छूट प्रदान करना एक युक्तिसंगत और आवश्यक वर्गीकरण है; ऐसी छूट से पर्यावरण नियमों का पूर्ण उल्लंघन नहीं होता क्योंकि यह वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) और बार पहचान पत्र के कड़े सत्यापन के अधीन विनियमित होती है; तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को लागू करते समय राज्य को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि संवैधानिक अदालतों की कार्यप्रणाली और नागरिकों के विधिक प्रतिनिधित्व का अधिकार बाधित न हो।’
  • वर्तमान स्थिति व अंतिम प्रभाव: दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग के प्रवर्तन दलों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे दिल्ली की सीमाओं (जैसे बदरपुर, कापसहेड़ा, डीएनडी, गाजीपुर, आनंद विहार, टिकरी आदि) पर एनसीआर से आने वाले वकीलों और कोर्ट स्टाफ को उनके पहचान पत्र और वैध पीयूसीसी के आधार पर कोर्ट के कार्य दिवसों में प्रवेश करने की अनुमति दें; इससे एनसीआर में रहने वाले हजारों अधिवक्ताओं को दैनिक अदालती मुकदमों में भाग लेने में बड़ी राहत मिलेगी।

Delhi Pollution: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
न्यायाधीशन्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan)
केस / याचिकाकर्तादिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम दिल्ली सरकार (Delhi High Court Bar Association v. GNCTD)
प्रतिनिधित्वयाचिकाकर्ता (DHCBA) की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन एवं अधिवक्ता अमित चौधरी।
संबंधित अधिसूचनादिल्ली पर्यावरण विभाग द्वारा 23 जून 2026 को जारी अधिसूचना (1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक नॉन-BS VI बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक)।
मूल मांगNCR (गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद) में रहने वाले वकीलों/कर्मचारियों को अपने पेशेवर कर्तव्यों हेतु दिल्ली यात्रा के लिए विनियमित छूट (Regulated Exemption)।
अदालत का आदेशयाचिका पर राहत मंजूर: केवल अदालत के कार्य दिवसों (Court Working Days) पर NCR से आने वाले वकीलों और कोर्ट स्टाफ के वाहनों को प्रतिबंध से छूट।
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