Tuesday, August 4, 2026
HomeBREAKING INDIAVICTIM COMPENSATION: बलात्कार पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश ट्रायल कोर्ट दें…यह...

VICTIM COMPENSATION: बलात्कार पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश ट्रायल कोर्ट दें…यह रहा सुप्रीम आदेश

VICTIM COMPENSATION: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सत्र न्यायालयों और पॉक्सो (POCSO) अदालतों को अहम निर्देश दिया है।

पीड़ितों को खुद आवेदन देकर मुआवजे के लिए संघर्ष करना पड़ता है

सुप्रीम आदेश में कहा गया कि वे बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामलों में उपयुक्त मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने के आदेश पारित करें।न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथना और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि कई मामलों में पीड़ितों को मुआवजा इसलिए नहीं मिल पाता क्योंकि ट्रायल कोर्ट की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए जाते, और पीड़ितों को खुद आवेदन देकर मुआवजे के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

पीठ ने आदेश में कहा

“मुआवजा वितरण में एक बड़ी बाधा यह है कि विशेष अदालतों या सत्र अदालतों से स्पष्ट निर्देश नहीं दिए जाते। नतीजतन, पीड़ितों को खुद राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के समक्ष आवेदन देना पड़ता है या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने पड़ते हैं। इसके प्रति जागरूकता की भी कमी है।”

अदालत ने आगे कहा

“इस स्थिति को सुधारने के लिए विशेष अदालतें और सत्र न्यायालय उपयुक्त मामलों में मुआवजा देने के संबंध में स्पष्ट आदेश पारित करें, ताकि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) और जिला या तालुका विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA/TLSA) के माध्यम से इसे आसानी से लागू किया जा सके।”

सभी हाईकोर्ट और न्यायिक अकादमियों को भेजा जाएगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रतियां देशभर के सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया है ताकि वे इसे आगे जिला न्यायाधीशों और विशेष अदालतों तक पहुंचाएं। साथ ही, राज्य न्यायिक अकादमियों को भी आदेश भेजने को कहा गया है ताकि प्रशिक्षण के दौरान न्यायाधीशों को धारा 357A CrPC, धारा 396 BNSS, और POCSO अधिनियम के तहत मुआवजे के प्रावधानों की जानकारी दी जा सके।

महाराष्ट्र की मानसिक रूप से दिव्यांग पीड़िता का मामला

यह आदेश ज्योति प्रवीन खंडपसोल द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें महाराष्ट्र के अमरावती की एक 25 वर्षीय मानसिक रूप से विकलांग बलात्कार पीड़िता को मुआवजा न मिलने की शिकायत की गई थी। याचिका के अनुसार, दोषी के सजा पाने और अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य प्राधिकरणों की लापरवाही के कारण पीड़िता को धारा 357A CrPC और मनोधैर्य योजना के तहत पूरा मुआवजा नहीं दिया गया।

यह है मामला

उसकी मां, जो एकमात्र देखभाल करने वाली थीं, 10 मई 2024 को निधन हो गया, और इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने मार्च और मई 2025 में केवल आंशिक राशि जारी की। दुर्भाग्य से, पीड़िता की भी 11 अगस्त को मृत्यु हो गई, बिना अपना पूरा मुआवजा प्राप्त किए।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता

याचिका में कहा गया कि यह मामला केवल एक पीड़िता का नहीं बल्कि देशभर में पीड़ितों के साथ हो रहे संस्थागत उपेक्षा के पैटर्न को दर्शाता है। अदालत ने भी माना कि यह स्थिति राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों — समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 14, 15(3) और 21) — का उल्लंघन है। अदालत ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) से इस संबंध में जवाब मांगा है और कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बलात्कार पीड़िता को कानून के तहत तय मुआवजा समय पर मिले।

संक्षेप में

  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी ट्रायल और POCSO अदालतों को मुआवजे पर आदेश देने के निर्देश दिए।
  • केंद्र और NALSA से जवाब मांगा गया।
  • अमरावती की मानसिक रूप से विकलांग पीड़िता को मुआवजा न मिलने पर दाखिल याचिका पर सुनवाई।
  • अदालत ने कहा — पीड़ितों को मुआवजा न मिलना “संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन” है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
32.8 ° C
32.8 °
32.8 °
62 %
3.5kmh
100 %
Tue
33 °
Wed
32 °
Thu
32 °
Fri
34 °
Sat
35 °