Saturday, September 19, 2026
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Proof of periods: रोहतक एमडीयू में महिला कर्मियों से ‘पीरियड्स का सबूत’ मांगे…सुप्रीम कोर्ट में मामले की दस्तक

Proof of periods: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने रोहतक एमडीयू में महिला कर्मियों से ‘पीरियड्स का सबूत’ मांगे जाने पर याचिका दायर की है।

घृणित और अमानवीय घटना की विस्तृत जांच हो

दरअसल, हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक में महिला सफाईकर्मियों से मासिक धर्म (पीरियड्स) का सबूत मांगा गया। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार को इस घृणित और अमानवीय घटना की विस्तृत जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है।

महिलाओं की गरिमा और निजता की रक्षा के लिए दिशानिर्देश मांगे

SCBA ने अपनी याचिका में कहा है कि अदालत को ऐसे स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए जिससे महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और निजता का उल्लंघन न हो, खासकर मासिक धर्म के दौरान।

MDU में 26 अक्टूबर को हुआ था मामला

पुलिस के अनुसार, 26 अक्टूबर को MDU परिसर में महिला सफाईकर्मियों से उनके निजी अंगों की तस्वीरें भेजकर यह साबित करने को कहा गया था कि वे पीरियड्स में हैं। यह घटना उस दिन हुई जब कुछ घंटे बाद हरियाणा के राज्यपाल आशीम कुमार घोष विश्वविद्यालय का दौरा करने वाले थे। तीन महिला कर्मियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दी थी कि “हमने कहा कि हम अस्वस्थ हैं क्योंकि हमें पीरियड्स हैं, लेकिन पर्यवेक्षकों ने कहा कि फोटो भेजकर साबित करो। जब हमने मना किया तो गालियां दीं और नौकरी से निकालने की धमकी दी।”

FIR और निलंबन कार्रवाई

पुलिस ने 31 अक्टूबर को तीन लोगों पर यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने का प्रयास, अपराध करने की धमकी, और महिला पर बल या हमला करने की धाराओं में केस दर्ज किया। आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। विश्वविद्यालय ने बताया कि दो पर्यवेक्षकों को निलंबित कर दिया गया है, और इस मामले में आंतरिक जांच समिति गठित की गई है। दोनों पर्यवेक्षक हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के माध्यम से संविदा पर नियुक्त थे। शिकायत में यह भी कहा गया कि दोनों पर्यवेक्षकों ने यह कार्रवाई सहायक रजिस्ट्रार श्याम सुंदर के निर्देश पर की थी, हालांकि सुंदर ने ऐसे किसी निर्देश से इंकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की चिंता

बार एसोसिएशन ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का संकेत है। याचिका में कहा गया कि अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि “किसी भी संस्था में महिला कर्मियों से ऐसे अपमानजनक, असंवैधानिक और शर्मनाक व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो।”

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