Wednesday, September 30, 2026
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Armed forces framework: सशस्त्र बलों का ढांचा महिला अधिकारियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण…आखिर ऐसी टिप्पणी क्यों आई, जानें मामला

Armed forces framework: सुप्रीम कोर्ट ने एक युगांतकारी निर्णय सुनाते हुए कहा है कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना का मौजूदा ‘सिस्टम’ महिला अधिकारियों के करियर की प्रगति में बाधक रहा है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि मूल्यांकन प्रणाली “संरचनात्मक रूप से पक्षपाती” (Structurally Biased) थी। कोर्ट ने माना कि उन्हें परमानेंट कमीशन (PC) से वंचित करना न केवल उनके करियर के साथ अन्याय था, बल्कि इससे उन्हें सेवा और पेंशन के लाभों से भी दूर रखा गया। यह फैसला न केवल महिला अधिकारियों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि सशस्त्र बलों में समानता के संवैधानिक अधिकार को भी मजबूती से स्थापित करता है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि लैंगिक रूढ़ियों के आधार पर किसी के करियर की क्षमता को सीमित नहीं किया जा सकता।

तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग महत्वपूर्ण निर्देश

अदालत ने थल सेना, नौसेना और वायुसेना की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए निम्नलिखित आदेश दिए।

भारतीय थल सेना (Indian Army): पेंशन का अधिकार: जो महिला अधिकारी मुकदमेबाजी के दौरान सेवा से मुक्त हो गई थीं, उन्हें 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। वे पूर्ण पेंशन की पात्र होंगी और उन्हें 1 जनवरी 2025 से बकाया (Arrears) भी मिलेगा।

  • परमानेंट कमीशन: वर्तमान में कार्यरत जो महिला अधिकारी 60% कट-ऑफ को पूरा करती हैं, उन्हें आवश्यक क्लीयरेंस के बाद परमानेंट कमीशन प्रदान किया जाएगा।

भारतीय नौसेना (Indian Navy): पारदर्शिता की कमी: कोर्ट ने पाया कि नौसेना में मूल्यांकन मानदंडों और रिक्तियों के खुलासे में पारदर्शिता का अभाव था।

  • विस्तार: अदालत ने उन महिला अधिकारियों के PC को सुरक्षित रखा जिन्हें पहले ही यह मिल चुका है, और कुछ विशिष्ट श्रेणियों की महिलाओं व उन पुरुष अधिकारियों के लिए भी PC की पात्रता बढ़ा दी जिन्हें पहले बाहर रखा गया था।

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force): त्रुटिपूर्ण चयन: कोर्ट ने माना कि वायुसेना में परफॉर्मेंस बेंचमार्क को जल्दबाजी में लागू किया गया, जिससे चयन प्रक्रिया दूषित हो गई।

  • वन-टाइम उपाय: जिन महिला अधिकारियों पर विचार किया गया था लेकिन चयन नहीं हुआ, उन्हें ‘एकमुश्त उपाय’ के रूप में पेंशन लाभ देने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने क्यों माना कि ‘सिस्टम’ भेदभावपूर्ण है?

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि महिलाओं के साथ पक्षपात गहरे स्तर पर था।
  • ACR में लापरवाही: कोर्ट ने नोट किया कि वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) इस धारणा के साथ लिखी गई थीं कि महिलाएं लंबे समय तक करियर नहीं बनाएंगी, जिससे उन्हें कैजुअल या अनुचित ग्रेडिंग दी गई।
  • अवसरों की कमी: महिलाओं को महत्वपूर्ण नियुक्तियों (Criteria Appointments) और करियर एनहांसमेंट कोर्स से इसलिए वंचित रखा गया क्योंकि वे PC के लिए पात्र नहीं थीं। बाद में जब वे पात्र हुईं, तो इसी अनुभव की कमी के कारण उनकी योग्यता (Merit) कम आंकी गई।
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