Tuesday, August 4, 2026
HomeHigh CourtAlimony Law: शराब और अयाशी पत्नी के पैसों पर, और मांग रहे...

Alimony Law: शराब और अयाशी पत्नी के पैसों पर, और मांग रहे गुजारा भत्ता?…हाईकोर्ट ने वकील पति को कहीं का नहीं छोड़ा!

Alimony Law: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में ‘सत्य की शुचिता’ (Purity of Truth) को बरकरार रखते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

यह मामला एक ऐसे पति का है जिसने खुद सक्षम और वकील होने के बावजूद अपनी पत्नी (जो हाई कोर्ट में एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी है) से गुजारा भत्ता (Maintenance) पाने के लिए झूठे हलफनामे दिए। अदालत ने तथ्यों को छिपाने और अपनी पत्नी का “व्यवस्थित शोषण” (Systemic Depletion) करने के लिए एक वकील पति पर ₹15 लाख का भारी हर्जाना लगाया है।

मामला क्या था? (The Deceptive Litigant)

  • शादी और करियर: दोनों की शादी 2019 में हुई। पत्नी को हाई कोर्ट में नौकरी मिल गई, जबकि पति (जो रजिस्टर्ड वकील है) बेरोजगार रहा।
  • धोखाधड़ी: पति ने जमीन खरीदने के बहाने पत्नी के सैलरी अकाउंट से दो बार में लगभग ₹25 लाख के पर्सनल लोन लिए।
  • दुरुपयोग: पत्नी ₹26,020 की भारी EMI भरती रही, जबकि पति ने उस पैसे को UPI के जरिए अपने खाते में ट्रांसफर किया और उसे “शराब, विलासिता और असामाजिक गतिविधियों” पर उड़ा दिया।

तथ्यों को छिपाना (Suppression of Facts)

  • पति ने फैमिली कोर्ट से महीने के ₹5,000 का अंतरिम गुजारा भत्ता भी प्राप्त कर लिया था। जब वह इस प्रक्रिया को तेज कराने के लिए हाई कोर्ट पहुँचा, तो उसकी पोल खुल गई।
  • झूठा हलफनामा: उसने हाई कोर्ट में दावा किया कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जबकि उसने पत्नी के लोन के लाखों रुपये अपने पास रखे थे।
  • अदालत की टिप्पणी: जस्टिस दिवाकर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न केवल सामग्री छिपाई, बल्कि वह एक “सक्षम शरीर वाला प्रैक्टिसिंग एडवोकेट” है, जो खुद कमाने की जगह पत्नी का शोषण कर रहा है।

हाई कोर्ट का कड़ा फैसला (The Stern Verdict)

  • अदालत ने पति की याचिका को तंग करने वाली (Vexatious) करार देते हुए खारिज कर दिया और निम्नलिखित आदेश दिए।
  • ₹15 लाख का हर्जाना: पति को 6 सप्ताह के भीतर अपनी पत्नी को मुआवजे के तौर पर ₹15 लाख देने होंगे।
  • वसूली के सख्त निर्देश: यदि पति पैसा नहीं देता, तो इटावा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को आदेश दिया गया है कि वह इसे “भू-राजस्व की बकाया राशि” (Arrears of Land Revenue) की तरह वसूल करें।
  • संपत्ति की जांच: कोर्ट ने DM को एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया है जो पति की चल-अचल संपत्ति की जांच करेगी ताकि हर्जाने की वसूली सुनिश्चित हो सके।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतइलाहाबाद हाई कोर्ट (जस्टिस विनोद दिवाकर)।
जुर्माना₹15,00,000 (मुआवजा राशि)।
कारणतथ्यों को छिपाना, धोखाधड़ी से लोन लेना और पत्नी का मानसिक/वित्तीय शोषण।
पेशेवर स्थितियाचिकाकर्ता खुद एक वकील है, जो कानून का दुरुपयोग कर रहा था।
समय सीमाहर्जाना भुगतान के लिए 6 सप्ताह का समय।

अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो वैवाहिक कानूनों (विशेषकर गुजारा भत्ता के प्रावधानों) का उपयोग ढाल के बजाय हथियार के रूप में करते हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि यदि कोई व्यक्ति (चाहे वह वकील ही क्यों न हो) अदालत को गुमराह करने की कोशिश करेगा, तो उसे न केवल राहत नहीं मिलेगी बल्कि भारी वित्तीय दंड भी भुगतना पड़ेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
32 ° C
32 °
32 °
63 %
2.6kmh
100 %
Tue
37 °
Wed
29 °
Thu
29 °
Fri
34 °
Sat
35 °