Wednesday, November 4, 2026
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Mother Over Foreign Decree: राम राजा थे, पर सीता ने ही पाले थे लव-कुश…क्यों अदालत में चला रामायण का प्रसंग, पढ़ें मां का महत्व

Mother Over Foreign Decree: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की बेंच ने रामायण और महाभारत का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि माँ का साथ बच्चे के लिए “स्वर्ग से भी बढ़कर” है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बाल अभिरक्षा (Child Custody) के एक मामले में आधुनिक कानून और भारतीय सभ्यता के मूल्यों (Civilizational Norms) का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। कोर्ट ने कनाडा की अदालत के आदेश के बावजूद, 9 साल की बच्ची को उसके पिता के पास कनाडा भेजने से इनकार कर दिया। यह मामला एक NRI पिता द्वारा दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (Habeas Corpus) याचिका से जुड़ा था। पिता का तर्क था कि कनाडा की अदालत ने उसे बच्ची की कस्टडी दी है, इसलिए बच्ची को भारत से वापस कनाडा भेजा जाए।

रामायण और महाभारत का न्यायिक संदर्भ

  • अदालत ने अपने फैसले में भारतीय महाकाव्यों के उदाहरणों का उपयोग करते हुए ‘मातृत्व’ की महत्ता बताई।
  • सीता और लव-कुश: कोर्ट ने कहा कि भगवान श्री राम अयोध्या के राजा और पिता थे, लेकिन माता सीता से अलग होने के बाद लव और कुश का पालन-पोषण महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में उनकी माँ ने ही किया। यह बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा और नैतिक परवरिश के लिए अनिवार्य था।
  • कुंती और कर्ण: महाभारत का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा कि कर्ण का पालन-पोषण राधा ने किया, लेकिन कुंती जीवनभर उनकी ‘नैतिक माँ’ बनी रहीं। मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है।
  • जननी जन्मभूमिश्च: वाल्मीकि रामायण का श्लोक उद्धृत करते हुए कोर्ट ने कहा— “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” (माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं)।

विदेशी आदेशों की ‘मैकेनिकल’ तामील नहीं

  • कनाडा की ‘ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट’ ने पिता को बच्ची की कस्टडी दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने कहा, कल्याण सर्वोपरि (Welfare is Paramount): भारतीय अदालतें विदेशी आदेशों को “मैकेनिकली” (बिना सोचे-समझे) लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं। यदि विदेशी आदेश बच्चे के कल्याण के विरुद्ध है, तो उसे नहीं माना जाएगा।
  • सर्वोत्तम हित: माता-पिता के कानूनी अधिकारों से कहीं ऊपर बच्चे का “सर्वोत्तम हित” (Best Interest) है।

बच्ची की वर्तमान स्थिति और इच्छा

  • सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बच्ची से व्यक्तिगत रूप से बात की।
  • भावनात्मक जुड़ाव: 9 साल की बच्ची पिछले 4 वर्षों से भारत में अपनी माँ के साथ रह रही है और वह यहाँ पूरी तरह से घुल-मिल गई है।
  • शैक्षणिक स्थिरता: वह इंदौर के एक अच्छे स्कूल में पढ़ रही है और वर्तमान परिवेश में खुश है।
  • निर्णय: इस उम्र में, विशेष रूप से विकास के शुरुआती चरणों में, माँ की देखभाल बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। केवल विदेशी डिक्री के आधार पर उसे यहाँ से उखाड़ना (Uproot) उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।

केस की पृष्ठभूमि: कनाडा से भारत तक का सफर

  • शादी: कपल की शादी 2014 में हुई, जिसके बाद वे अमेरिका और फिर कनाडा (टोरंटो) शिफ्ट हो गए।
  • विवाद: 2022 में मां बच्ची को लेकर भारत आई और वापस नहीं लौटी। पिता ने कनाडा की अदालत से एकतरफा कस्टडी हासिल कर ली और फिर भारत में याचिका दायर की।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
पक्षपिता (कनाडा निवासी) बनाम माँ (भारत निवासी)।
बच्ची की उम्र9 वर्ष (अमेरिकी नागरिक, कनाडा की स्थायी निवासी)।
मुख्य सिद्धांत‘Comity of Courts’ (अदालतों का सम्मान) महत्वपूर्ण है, लेकिन पूर्ण नहीं।
अंतिम आदेशकस्टडी माँ के पास ही रहेगी; कनाडा भेजने की अर्जी खारिज।

सभ्यता और कानून का संतुलन

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला संदेश देता है कि कानून केवल धाराओं और विदेशी कागजों से नहीं चलता, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा होता है। कोर्ट ने माना कि माँ केवल एक ‘लीगल कंस्ट्रक्ट’ (कानूनी निर्माण) नहीं है, बल्कि वह बच्चे की पहली गुरु और रक्षक है।

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