Sunday, August 16, 2026
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Coaching Comments: आज तक की लोकप्रिय एंकर अंजना ओम कश्यप ने खान सर व अन्य शिक्षकों पर किया ₹2 करोड़ का मानहानि केस…यहां पढ़ें केस

Coaching Comments: आज तक (Aaj Tak) चैनल की वरिष्ठ पत्रकार और मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) ने देश के बेहद लोकप्रिय ऑनलाइन शिक्षक फैसल खान, जिन्हें लोग ‘खान सर’ (Khan Sir) के नाम से जानते हैं, समेत कई अन्य चर्चित ऑनलाइन शिक्षकों और सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि (Defamation Suit) का मुकदमा दायर किया है।

याचिका में ₹2 करोड़ के हर्जाने (Damages) की मांग

यह मुकदमा वरिष्ठ अधिवक्ताओं ऋषिकेश बरुआ, उत्कर्ष द्विवेदी और प्रज्ञा अग्रवाल के माध्यम से दायर किया गया है। याचिका में ₹2 करोड़ के हर्जाने (Damages) की मांग की गई है। साथ ही कोर्ट से अपील की गई है कि वह सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से उनके खिलाफ डाली गई आपत्तिजनक सामग्रियों को तुरंत हटाने (Takedown) और आगे ऐसी पोस्ट करने पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी करे। यह मामला जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की वेकेशन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (Listed) हुआ है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई? (नीट विवाद और ‘स्टार टीचर्स’ पर टिप्पणी)

इस पूरे विवाद की जड़ें हाल ही में हुए नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा सिस्टम और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ी हैं।

29 मई 2026 की डिबेट: अंजना ओम कश्यप ने ‘आज तक’ पर एक लाइव डिबेट शो होस्ट किया था। इस दौरान उन्होंने देश में ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण (Commercialisation) और इंटरनेट पर उभरते ‘स्टार टीचर्स’ (Star Teachers) के बढ़ते प्रभाव पर तीखी आलोचनात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने कुछ यूट्यूब शिक्षकों को कथित तौर पर “धोखेबाज” (Frauds) और सिर्फ “व्यूज बटोरने वाले” कहा था।

पत्रकार का तर्क: अंजना कश्यप का कहना है कि उनकी टिप्पणियां पूरी तरह से निष्पक्ष पत्रकारिता (Fair Journalistic Commentary) के दायरे में थीं, जो राष्ट्रहित और छात्रों से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे पर की गई थीं।

प्रतिक्रिया में ‘ट्रोलिंग’ और बेटी की निजता का उल्लंघन

मुकदमे के अनुसार, अंजना की इस टिप्पणी के बाद इंटरनेट और यूट्यूब के बड़े शिक्षकों और उनके लाखों फॉलोअर्स ने ३० मई से ४ जून के बीच पत्रकार और उनके चैनल के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और सुनियोजित अभियान (Sustained Campaign) छेड़ दिया।

अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल: याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब वीडियो में अंजना ओम कश्यप और आज तक के लिए बिकाऊ पत्रकार, चाटुकार, दल्ली, दलाली और फेक न्यूज की दुकान जैसे बेहद अपमानजनक, असंसदीय और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

बेटी की स्कूलिंग और सुरक्षा से खिलवाड़: सबसे गंभीर आरोप ‘खान सर’ पर लगाया गया है। याचिका के मुताबिक, खान सर ने एक वीडियो में सार्वजनिक रूप से अंजना ओम कश्यप की बेटी के स्कूल और उसकी व्यक्तिगत जानकारियों का खुलासा कर दिया।

सुरक्षा को खतरा: अंजना कश्यप ने कोर्ट में दलील दी है कि इस विवाद से उनकी बेटी का कोई लेना-देना नहीं था। इस तरह उनकी बेटी की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने से उनके पूरे परिवार की सुरक्षा, गरिमा, निजता (Privacy) और मानसिक शांति को गंभीर खतरा पैदा हो गया है और उन्हें अनचाही और डरावनी अटेंशन का सामना करना पड़ रहा है।

कौन-कौन बना है इस केस में आरोपी?

अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने केवल खान सर ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोकप्रिय चेहरों और डिजिटल नेटवर्कों को भी इस मुकदमे में प्रतिवादी (Defendants) बनाया है। इसमें फैसल खान (खान सर – पटना), अभिनय शर्मा (Abhinay Maths), बबीता त्यागी (Babita Tyagi), अरविंद भदौरिया (Arvind Bhadauriya), 4PM न्यूज नेटवर्क (4PM News Network), कुछ अन्य विशिष्ट एक्स (ट्विटर) हैंडल्स और यूट्यूब चैनल।

डिजिटल विश्लेषण: इस हाई-प्रोफाइल कानूनी जंग के मायने

कानूनी और सामाजिक पहलूइसका सीधा प्रभाव
फेयर कमेंट्री बनाम व्यक्तिगत हमलाकानून के तहत किसी भी पत्रकार या नागरिक को सार्वजनिक नीतियों या प्रणालियों (जैसे शिक्षा व्यवस्था) की आलोचना का अधिकार है। लेकिन कोर्ट यह तय करेगा कि क्या शिक्षकों ने उस आलोचना का जवाब तर्कों से देने के बजाय ‘पर्सनल अटैक’ (Personal Attack) का रास्ता चुना।
‘डॉक्सिंग’ (Doxing) और बच्चों की सुरक्षाकिसी सार्वजनिक विवाद में किसी व्यक्ति के बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी (जैसे उनका स्कूल या कॉलेज) उजागर करना कानूनी और नैतिक रूप से बेहद गंभीर माना जाता है। खान सर के खिलाफ यह बिंदु कोर्ट में भारी पड़ सकता है।
ऑनलाइन कम्युनिटी का बढ़ता टकरावयह मामला दिखाता है कि देश में मुख्यधारा के मीडिया (Mainstream Media) और यूट्यूब/सोशल मीडिया के बड़े इन्फ्लुएंसर्स (डिजिटल इकोसिस्टम) के बीच की खाई और टकराव अब कानूनी मोर्चों पर आ चुका है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

आलोचना का जवाब कभी भी किसी के परिवार और बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालकर नहीं दिया जा सकता। यूट्यूब पर लाखों-करोड़ों छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की समाज के प्रति एक नैतिक जवाबदेही होती है। यदि ‘आज तक’ की डिबेट में कोई कमी थी, तो उसका विरोध तार्किक और कानूनी रूप से किया जाना चाहिए था, न कि अभद्र भाषा और “डॉक्सिंग” के जरिए। दिल्ली हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच अब यह तय करेगी कि सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो और हेट-कैंपेन पर क्या तुरंत रोक (Interim Injunction) लगाई जानी चाहिए।

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