Saturday, July 25, 2026
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Bollywood गपशप: दिलीप कुमार से एआर रहमान बनने और 29 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते के अंत की एक बेहद भावुक और अनसुनी दास्तान…यहां पढ़िए

Bollywood गपशप: ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) का जीवन हमेशा से किसी फिल्मी पटकथा की तरह रहस्यमयी, आध्यात्मिक और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।

संगीत की दुनिया में ‘मद्रास का मोजार्ट’ कहे जाने वाले रहमान का निजी जीवन जितना शांत रहा, उनकी जिंदगी के फैसले उतने ही हैरान करने वाले थे। चाहे वह छोटी उम्र में धर्म परिवर्तन का फैसला हो या 29 साल बाद अपनी पत्नी सायरा बानो (Saira Banu) से अलग होने का दुखद मोड़।

दिलीप कुमार से ‘ए.आर. रहमान’ बनने का आध्यात्मिक सफर

दुनिया जिसे ए.आर. रहमान के नाम से जानती है, उनका जन्म एक हिंदू मुदलियार परिवार में दिलीप कुमार के रूप में हुआ था। जब वे महज 9 साल के थे, तब उनके पिता आर.के. शेखर (जो खुद एक फिल्म कंपोजर थे) का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गुजारे के लिए पिता के वाद्य यंत्रों (Musical Instruments) को किराए पर देना पड़ा। रहमान के लिए संगीत शौक नहीं, बल्कि सर्वाइवल (जीवित रहने का जरिया) बन गया।

सूफी संत से जुड़ाव: साल 1986 में रहमान के परिवार की मुलाकात सूफी पीर करीमुल्लाह शाह कादरी से हुई। रहमान की मां ने बीमार पीर की निस्वार्थ सेवा की, जिससे पूरे परिवार का झुकाव सूफीवाद की तरफ हो गया।

23 साल की उम्र में इस्लाम कबूल किया: 23 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां और बहनों के साथ इस्लाम धर्म अपना लिया।

नाम के पीछे की कहानी: एक हिंदू ज्योतिषी ने उन्हें ‘अब्दुल रहमान’ या ‘अब्दुल रहीम’ नाम रखने का सुझाव दिया था। रहमान को ‘अब्दुल रहमान’ नाम पसंद आया। बाद में उनकी मां ने एक सपने के आधार पर इसके आगे ‘अल्लाह रक्खा’ (Allah Rakha) जोड़ दिया, और इस तरह वे ए.आर. रहमान बने।

रोजा फिल्म और मां की वो ऐतिहासिक जिद

साल 1992 में निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म ‘रोजा’ (Roja) से रहमान को पहला बड़ा ब्रेक मिला। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्म के क्रेडिट्स में उनका नया नाम आखिरी वक्त पर जोड़ा गया था। रहमान की मां करीमा बेगम ने मणिरत्नम के सामने शर्त रख दी थी कि या तो फिल्म के पोस्टर्स और क्रेडिट्स में उनके बेटे का नया मुस्लिम नाम (A.R. Rahman) छपेगा, या फिर वे उसका नाम फिल्म में न डालें। मणिरत्नम इसके लिए तैयार हो गए और ‘रोजा’ के संगीत ने भारतीय सिनेमा का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया।

शादी के लिए रखी थीं 3 अनूठी शर्तें

साल 1994 में, जब रहमान 27 साल के थे और सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, उन्होंने शादी करने का फैसला किया। बेहद शर्मीले स्वभाव के होने के कारण उन्होंने खुद लड़की ढूंढने के बजाय अपनी मां करीमा से एक दुल्हन खोजने को कहा। रहमान ने अपनी मां के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी थीं, इनमें लड़की पढ़ी-लिखी (Educated) होनी चाहिए। उसमें बेहतरीन संस्कार और शालीन व्यवहार (Decent Behaviour) होना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण वह संगीत से बेहद प्यार करने वाली होनी चाहिए।

चेन्नई के एक सूफी दरगाह पर सायरा के परिवार से हुई मां की मुलाकात

उनकी मां की मुलाकात चेन्नई के एक सूफी दरगाह पर सायरा के परिवार से हुई। रहमान और सायरा की पहली मुलाकात 6 जनवरी 1995 को रहमान के जन्मदिन पर हुई। रहमान ने शादी से पहले ही सायरा को अपने काम को लेकर आगाह कर दिया था कि, अगर हम डिनर पर जाने का प्लान कर रहे हैं और अचानक मेरे दिमाग में कोई धुन आ गई, तो हमें डिनर कैंसिल करना पड़ेगा। सायरा ने मुस्कुराकर इसे स्वीकार किया और 12 मार्च 1995 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए। दोनों के तीन बच्चे खतीजा, रहीमा और अमीन हुए ।

29 साल बाद क्यों टूटा यह खूबसूरत रिश्ता?

रहमान ने हमेशा अपने निजी जीवन को चकाचौंध से दूर रखा। लेकिन 19 नवंबर 2024 को अचानक आई एक खबर ने उनके प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया। सायरा की वकील वंदना शाह ने दोनों के अलग होने (Separation) का एक आधिकारिक संयुक्त बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि शादी के कई सालों के बाद, मिसेज सायरा और उनके पति ए.आर. रहमान ने एक-दूसरे से अलग होने का बेहद कठिन फैसला लिया है। यह फैसला उनके रिश्ते में आए भारी भावनात्मक तनाव (Emotional Strain) के बाद लिया गया है। एक-दूसरे के प्रति गहरे प्यार के बावजूद, दोनों ने पाया कि उनके बीच की दूरियां और मुश्किलें अब इस मोड़ पर आ चुकी हैं जिन्हें पाटना मुमकिन नहीं है।

ए.आर. रहमान: एक ऐतिहासिक संगीत सफरनामा

पुरस्कारविवरण
एकेडमी अवार्ड्स (Oscars)फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ (Slumdog Millionaire) के लिए दो ऑस्कर जीतने वाले पहले भारतीय संगीतकार।
अंतरराष्ट्रीय सम्मानएक ग्रैमी (Grammy), एक बाफ्टा (BAFTA) और एक गोल्डन ग्लोब (Golden Globe) पुरस्कार।
सदाबहार एल्बमबॉम्बे, दिल से, लगान, रंगीला, रंग दे बसंती, रॉकस्टार, जोधा अकबर।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

ए.आर. रहमान का जीवन यह सिखाता है कि शोहरत और कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद भी इंसान के जीवन में कुछ ऐसे खालीपन या भावनात्मक मोड़ आ सकते हैं, जिन्हें दुनिया की कोई भी दौलत या ऑस्कर नहीं भर सकता। सायरा और रहमान ने जिस गरिमा के साथ करीब तीन दशकों तक अपना घर चलाया, उसी गरिमा के साथ उन्होंने अपनी राहें अलग करने का फैसला भी किया। उनका संगीत हमेशा दुनिया को जोड़ता रहेगा, भले ही उनकी निजी जिंदगी के सुर इस मोड़ पर आकर बिखर गए हों।

(With Input from different Bollywood news Website)

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