Tuesday, August 4, 2026
HomeLatest NewsArgue in person: हाईकोर्ट जजों से क्यूं कहा, हालात जो भी हों,...

Argue in person: हाईकोर्ट जजों से क्यूं कहा, हालात जो भी हों, केस की सुनवाई से पीछे न हटें…3-4 सो-called सीनियर वकील कर रहे कोहराम

Argue in person: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कुछ वरिष्ठ वकीलों द्वारा जजों पर दबाव बनाकर बार-बार सुनवाई से हटने (Recusal) के लिए मजबूर करने की प्रवृत्ति पर उच्चतम न्यायालय ने बेहद गंभीर और कड़ा रुख अपनाया है।

एक बर्खास्त न्यायिक अधिकारी (पूर्व जज) की याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने एक बर्खास्त न्यायिक अधिकारी (पूर्व जज) की याचिका पर सुनवाई करते हुए चिंता व्यक्त की और कहा कि कुछ तथाकथित वरिष्ठ अधिवक्ता” (So-called Senior Advocates) अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए ‘कोहराम’ मचा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) से इस मामले की सुनवाई के लिए दो जजों की एक विशेष खंडपीठ (Division Bench) गठित करने का अनुरोध किया है। साथ ही, जजों को स्पष्ट विधिक सलाह दी है कि “चाहे कोई भी कैसी भी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश करे, वे इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recusal) न करें।”

यह रही सीजेआई सूर्य कांत की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता को किसी भी वरिष्ठ वकील को न करने और खुद अपनी पैरवी (Argue in person) करने की सलाह देते हुए कहा, मैं जानता हूं कि चार या पांच ऐसे वरिष्ठ वकील हैं जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं। मैं इन गतिविधियों पर बहुत करीब से नजर रख रहा हूं। राज्य में तीन या चार तथाकथित सीनियर एडवोकेट कोहराम मचा रहे हैं। आपके लिए यही बेहतर होगा कि आप अपने मामले की बहस खुद ही करें।”

मामला क्या है? (पूर्व न्यायिक अधिकारी का केस और 4 जजों का पैर पीछे खींचना)

यह पूरा विवाद एक पूर्व न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer) से जुड़ा है, जिसे सेवा से बर्खास्त (Dismiss from service) कर दिया गया था। उसने अपनी बर्खास्तगी, पेंशन और भविष्य निधि (GPF) को रोकने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन हाई कोर्ट में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई।

एक के बाद एक 4 जजों ने केस छोड़ा: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट की एक के बाद एक चार पीठ (Benches) इस मामले की सुनवाई से पीछे हट चुकी हैं।

इन जजों ने किया था रेक्युजल: याचिकाकर्ता के अनुसार, सबसे पहले जस्टिस लीजा गिल ने केस से खुद को अलग किया; उसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने मामले को सुरक्षित (Reserve) रखने के बाद खुद को अलग कर लिया; इसके बाद जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक सिबल ने भी मामले की सुनवाई से पैर पीछे खींच लिए।

तबादले की गुहार: बार-बार जजों के हटने से परेशान होकर पूर्व न्यायिक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में ‘ट्रान्सफर पिटीशन’ (Transfer Petition) दायर कर अपने मामले को किसी दूसरे राज्य के हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की विधिक गुहार लगाई थी।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा विधिक रुख: ‘हम यहां से मॉनिटर करेंगे’

सीजेआई सूर्य कांत ने मामले को दूसरे हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने से साफ इनकार कर दिया, क्योंकि ऐसा करना दबाव बनाने वाले तत्वों के आगे झुकने जैसा होता। इसके बजाय, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के प्रशासनिक और विधिक ढांचे को मजबूत करने के लिए सख्त आदेश जारी किए:

जजों को निडर रहने की विधिक सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित खंडपीठ इस मामले की सुनवाई डे-टू-डे (रोजाना आधार पर) करेगी। कोर्ट ने जजों को आश्वस्त और सचेत करते हुए कहा कि किसी भी बाहरी दबाव या माहौल के आगे झुककर केस न छोड़ें।

गड़बड़ी करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को खुद बहस करने की अनुमति देते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी भी दी: “अगर आपने भी इस दौरान कोई शरारत (Mischief) करने की कोशिश की, तो इसके बहुत गंभीर विधिक परिणाम होंगे। हम इस पूरे मामले की निगरानी (Monitor) सीधे सुप्रीम कोर्ट से कर रहे हैं।”

समय-सीमा तय और अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) तलब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अंतिम विधिक सुनवाई के लिए 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह की समय-सीमा तय की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद, हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) सीधे सुप्रीम कोर्ट को इसकी अनुपालन रिपोर्ट भेजेंगे।

विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)

विधिक बिंदुउच्चतम न्यायालय का कड़ा विधिक निर्देश (जून 2026)
याचिकाकर्ताएक बर्खास्त पूर्व न्यायिक अधिकारी (स्वयं पैरवीकर्ता)।
मूल विधिक मंचपंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय।
पीठ (Coram)भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना।
मुख्य विवादवकीलों के कथित दबाव के कारण हाई कोर्ट के 4 जजों द्वारा केस की सुनवाई से बार-बार हटना (Recusal)।
अदालत का अंतिम आदेशट्रांसफर याचिका खारिज; हाई कोर्ट में विशेष बेंच गठित कर 13 जुलाई 2026 से रोजाना सुनवाई करने और रिपोर्ट सौंपने का आदेश।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
moderate rain
32 ° C
32 °
32 °
63 %
2.6kmh
100 %
Tue
37 °
Wed
29 °
Thu
29 °
Fri
34 °
Sat
35 °