Monday, June 22, 2026
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Child Welfare: अमेरिका से नाबालिग को छुट्टी मेें आने की अनुमति…अंतरराष्ट्रीय बाल अभिरक्षा व वीजा जटिलताओं का यह केस जरूर सभी पढ़िए

Child Welfare: दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय बाल अभिरक्षा (International Child Custody) और वीजा जटिलताओं से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

अभिभावक का वीजा स्टेटस बदलाव के दौर से गुजर रहा: अदालत

हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट (पारिवारिक न्यायालय) के उस आदेश में बड़ा संशोधन कर दिया, जिसमें पिता को छुट्टियों के दौरान नाबालिग बच्चे को अमेरिका से भारत लाने की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चा छुट्टियों के दौरान अमेरिका में ही पिता के साथ रहेगा और उसे भारत नहीं लाया जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि किसी अभिभावक का वीजा स्टेटस बदलाव (Transition) के दौर से गुजर रहा हो, तो ऐसी स्थिति में बच्चे को विदेश (अमेरिका) से भारत लाने की अनुमति देना उसके हित में नहीं होगा, क्योंकि इससे बच्चे के वापस अमेरिका लौटने पर कानूनी संकट खड़ा हो सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि: शिक्षा से रोजगार में बदलाव और वीजा का पेंच

यह कानूनी विवाद एक अप्रवासी भारतीय दंपत्ति के बीच बच्चे की कस्टडी और मुलाकाती अधिकारों (Visitation Rights) को लेकर है।

फैमिली कोर्ट का आदेश: फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 26 के तहत पिता के आवेदन को स्वीकार करते हुए बच्चे को छुट्टियों में भारत लाने की अनुमति दी थी। फैमिली कोर्ट का मानना था कि वीजा प्रक्रियाओं की अनिश्चितता के कारण पिता-पुत्र के संबंधों को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता। इस आदेश के खिलाफ मां ने फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 19 के तहत हाई कोर्ट में अपील दायर की।

मां (अपीलकर्ता) की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी के माध्यम से मां ने अदालत को बताया कि उनका शैक्षणिक कार्यक्रम (Academic Program) समाप्त हो चुका है और अब वह अमेरिका में नौकरी (Employment) शुरू कर रही हैं। इस वजह से उनका वीजा स्टेटस वर्तमान में ‘ट्रांजिशन’ (बदलाव) के दौर में है। चूंकि बच्चे का वीजा स्टेटस भी मां के स्टेटस से जुड़ा हुआ है, इसलिए यदि बच्चा एक बार अमेरिका से बाहर गया, तो मौजूदा कड़े नियमों के कारण उसका वापस लौटना बेहद मुश्किल हो सकता है।

पिता (उत्तरदाता) का पक्ष: एडवोकेट सोमनाथ भारती के माध्यम से पिता ने दलील दी कि वे बच्चे के साथ छुट्टियां बिताने अमेरिका जा चुके हैं, लेकिन उन्हें काम के सिलसिले में 22 जून 2026 तक भारत लौटना है, इसलिए वे बच्चे को साथ लाना चाहते हैं।

हाई कोर्ट का कानूनी दृष्टिकोण: ‘बच्चे का कल्याण सर्वोपरि’ (Welfare of the Child)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों के वीजा संबंधी हलफनामों का अवलोकन करने के बाद फैमिली कोर्ट के रुख को पूरी तरह सटीक नहीं माना और विधिक सिद्धांत सामने रखे।

इमिग्रेशन रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट इस बात को गहराई से समझने में विफल रहा कि मां के वीजा स्टेटस में बदलाव का बच्चे के अमेरिका में रहने और उसके इमिग्रेशन स्टेटस पर क्या गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कहा, “वर्तमान में नाबालिग बच्चे की कस्टडी मां के पास है। ऐसे में इमिग्रेशन से जुड़ी समस्याएं बच्चे के भारत आने और उसके बाद वापस अमेरिका लौटने की क्षमता पर एक गंभीर चिंता पैदा करती हैं। विशेषकर तब, जब बच्चे का वीजा स्टेटस सीधे तौर पर मां से जुड़ा हुआ है।”

वापस न लौट पाने की स्थिति बच्चे के हित में नहीं

खंडपीठ ने बच्चे के सर्वोत्तम हितों (Best Interests of the Child) को प्राथमिकता देते हुए कहा, यदि नाबालिग बच्चा इस आदेश के तहत भारत आ जाता है और बाद में वीजा/इमिग्रेशन की जटिलताओं के कारण उसे अमेरिका लौटने की अनुमति नहीं मिलती है, तो यह स्थिति बच्चे के कल्याण और उसके सर्वोत्तम हित के अनुकूल नहीं होगी।

पिता के काम से ज्यादा बच्चे को प्राथमिकता (Work Remotely)

पिता की इस दलील पर कि उन्हें नौकरी के लिए भारत लौटना जरूरी है, अदालत ने एक व्यावहारिक और मानवीय सुझाव देते हुए कहा, यह हमेशा संभव है कि पिता वहां से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work Remotely) करके या अपनी छुट्टियां बढ़ाकर अमेरिका में ही बच्चे को प्राथमिकता दें। यदि पिता बच्चे के साथ भारत आए बिना अमेरिका में ही पूरी गर्मियों की छुट्टियां बिताते हैं, तो इससे उनके अधिकारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix)

कानूनी बिंदु / श्रेणियांदिल्ली उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस तेजस कारिया और जस्टिस मधु जैन (खंडपीठ)
प्रतिनिधित्वअपीलकर्ता (मां) के लिए सीनियर एडवोकेट प्रिया हिंगोरानी; उत्तरदाता (पिता) के लिए एडवोकेट सोमनाथ भारती
संबंधित वैधानिक कानूनफैमिली कोर्ट्स एक्ट, 1984 (धारा 19) और हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 (धारा 26)
मूल कानूनी प्रश्नक्या कस्टडी धारक अभिभावक के वीजा ट्रांजिशन के दौरान बच्चे को अंतरराष्ट्रीय यात्रा (भारत आने) की अनुमति दी जानी चाहिए?
अदालत का अंतिम आदेशफैमिली कोर्ट का आदेश संशोधित; बच्चा अमेरिका में ही पिता के साथ छुट्टियां बिताएगा। स्कूल खुलने से 3 दिन पहले पिता बच्चे को वापस मां को सौंपेंगे।
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