नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS), पत्राचार (Correspondence) या डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद रेगुलर लॉ डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के लिए तेलंगाना में वकील के रूप में नामांकित (Enroll) होना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) द्वारा ऐसे कोर्सेज को वैध माने जाने के बार-बार दिए गए स्पष्टीकरणों के बावजूद, बार काउंसिल ऑफ तेलंगाना (BCT) ने करीब 80 लॉ ग्रेजुएट्स के नामांकन आवेदनों को रोक रखा है। अब तक केवल चार उम्मीदवार ही अदालती हस्तक्षेप (Judicial Intervention) के बाद अपना रजिस्ट्रेशन कराने में सफल रहे हैं, जबकि बाकी छात्र अधर में लटके हैं।
क्या कहता है भारतीय बार काउंसिल (BCI) का नियम?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008′ के नियम 5(a) और 5(b) के तहत वकालत की पढ़ाई और नामांकन के लिए पात्रता (Eligibility) तय की गई है।
नियमों में मान्यता: बीसीआई के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि ओपन स्कूलिंग, डिस्टेंस या पत्राचार माध्यम से प्राप्त की गई 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन की डिग्री कानूनी शिक्षा के लिए पूरी तरह मान्य है। शर्त केवल इतनी है कि छात्र ने बुनियादी शैक्षणिक क्रम (Educational Progression) का पालन किया हो और किसी भी स्तर को ‘बायपास’ (छोड़ा) न किया हो।
BCI का स्पष्टीकरण (2017 और 2025): इस संबंध में किसी भी संशय को दूर करने के लिए बीसीआई की कानूनी शिक्षा समिति ने 2017 में और फिर दोबारा 2025 में साफ किया था कि इग्नू (IGNOU) या एनआईओएस (NIOS) जैसे मान्यता प्राप्त संस्थानों से की गई पढ़ाई पूरी तरह वैध है।
रोक किस पर है?: बार काउंसिल केवल उन डिग्रियों पर रोक लगाती है जो बिना पिछली आवश्यक योग्यता के सीधे ‘ओपन यूनिवर्सिटी’ से (जैसे बिना १२वीं किए सीधे ग्रेजुएशन या सिंगल-सिटिंग डिग्री) हासिल की गई हों।
विवाद की वजह: तेलंगाना हाई कोर्ट का 2021 का फैसला
तेलंगाना बार काउंसिल (BCT) द्वारा इन 80 आवेदनों को रोकने के पीछे ‘एम. नवीन कुमार बनाम तेलंगाना राज्य (2021)’ मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय की खंडपीठ का एक फैसला है। बार काउंसिल इसी फैसले का हवाला देकर रजिस्ट्रेशन रोक रही है।
विशेषज्ञों का तर्क: हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और प्रभावित छात्रों का कहना है कि 2021 का वह फैसला ‘सिंगल-सिटिंग’ (एक ही बार में परीक्षा देकर ली गई अनधिकृत डिग्री) या गैर-मान्यता प्राप्त डिग्रियों से संबंधित था, न कि उन छात्रों के बारे में जिन्होंने मान्यता प्राप्त एनआईओएस या डिस्टेंस मोड से पूरी समयसीमा में पढ़ाई की है।
एम. नवनीत चौधरी का मामला: एक प्रभावित छात्र एम. नवनीत चौधरी ने एनआईओएस (NIOS) से 10वीं और 12 वीं करने के बाद एक प्रतिष्ठित संस्थान से 5 साल की रेगुलर इंटीग्रेटेड लॉ डिग्री हासिल की। जब बीसीटी ने उनका नामांकन नहीं किया, तो उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। यह मामला वर्तमान में हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष लंबित है, जो यह तय करेगी कि क्या एनआईओएस के छात्र नियम 5 के तहत वकालत के हकदार हैं या नहीं।
अन्य राज्यों के हाई कोर्ट का रुख बिल्कुल अलग
दिलचस्प बात यह है कि इस विषय पर देश की अन्य अदालतों का रुख तेलंगाना बार काउंसिल से बिल्कुल विपरीत और छात्रों के पक्ष में रहा है।
मद्रास उच्च न्यायालय और कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बीसीआई के 2017 के स्पष्टीकरण और वैधानिक ढांचे पर भरोसा करते हुए एनआईओएस (NIOS) के छात्रों को 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स और बार नामांकन के लिए पूरी तरह पात्र माना है।
छात्रों की चिंता: इस अनिश्चितता के कारण भविष्य में कानून की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी चिंता है। एनआईओएस से स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले छात्र शुभकर रेड्डी सामा का कहना है कि छात्रों को कानून की पढ़ाई में अपने जीवन के कीमती साल और पैसा निवेश करने से पहले ही इस पात्रता पर स्पष्टता मिलनी चाहिए, न कि डिग्री हाथ में आने के बाद उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़ें।
केस मैट्रिक्स और विधिक स्थिति (Case Overview)
| श्रेणियां | बार काउंसिल ऑफ तेलंगाना (BCT) बनाम ओपन स्कूलिंग छात्र |
| संबंधित संस्थान | बार काउंसिल ऑफ तेलंगाना (BCT) और भारतीय बार काउंसिल (BCI) |
| विवाद का मुख्य कारण | NIOS (ओपन स्कूल) या डिस्टेंस से 10वीं/12वीं करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के रूप में नामांकन रोकना। |
| लंबित मामलों की संख्या | लगभग ८० लॉ ग्रेजुएट्स के आवेदन पेंडिंग; केवल ४ को कोर्ट के आदेश पर मिला नामांकन। |
| BCI का आधिकारिक स्टैंड | यदि छात्र ने बिना किसी क्लास को छोड़े (No Bypassing) क्रमिक रूप से मान्यता प्राप्त ओपन स्कूल (जैसे NIOS) से पढ़ाई की है, तो वह पूरी तरह पात्र है। |
| BCT का आधार | तेलंगाना हाई कोर्ट का २०२१ का ‘एम. नवीन कुमार’ फैसला (जो कि वास्तव में सिंगल-सिटिंग डिग्रियों पर था)। |
| अन्य अदालतों की नजीर | मद्रास और कर्नाटक हाई कोर्ट ऐसे छात्रों को नामांकन के लिए वैध और योग्य मान चुके हैं। |

