Friday, July 3, 2026
HomeConsumer NewsFabricated Invoices: बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएमसी हेल्थ धोखाधड़ी विवाद को सुलझाने...

Fabricated Invoices: बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएमसी हेल्थ धोखाधड़ी विवाद को सुलझाने के लिए क्यों चुकाए 600 मिलियन डॉलर…यह केस पढ़िए

Fabricated Invoices: बैंक ऑफ बड़ौदा ने लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी, अनिश्चितता और कानूनी खर्चों से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर चल रहे एक बड़े कानूनी विवाद का अंत कर दिया है।

अबू धाबी और लंदन में चल रही दो समानांतर दिवाला कार्यवाही हो जाएगी समाप्त

भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सबसे बड़े स्वास्थ्य सेवा संकट एनएमसी हेल्थ (NMC Health) समूह के पतन से जुड़े हाई-स्टेक मुकदमों को निपटाने के लिए 600 मिलियन डॉलर (लगभग ₹5,700 करोड़) का आउट-ऑफ-कोर्ट (अदालत के बाहर) समझौता किया है। बैंक ने भारतीय शेयर बाजारों को दी गई विनियामक फाइलिंग (Regulatory Filing) में इस बात की पुष्टि की है कि यह भुगतान उसकी अबू धाबी शाखा द्वारा किया गया है। इस समझौते के साथ ही अबू धाबी और लंदन में चल रही दो समानांतर दिवाला (Insolvency) कार्यवाही अब पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

मामला क्या है?: कैसे डूबा एनएमसी हेल्थ का साम्राज्य?

लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) में लिस्टेड रही दिग्गज कंपनी एनएमसी हेल्थ का पतन भारतीय और वैश्विक बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घोटालों में से एक है:

शॉर्ट सेलर की रिपोर्ट से खुलासा: दिसंबर 2019 में प्रसिद्ध शॉर्ट सेलर कंपनी ‘मडी वाटर्स’ (Muddy Waters) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें आरोप लगाया गया कि एनएमसी हेल्थ ने अपनी संपत्तियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है और कई गुप्त लेनदेन किए हैं।

अरबों डॉलर का कर्ज छिपाया: जब प्रशासकों (Administrators) ने कंपनी की जांच की, तो पता चला कि ऑडिटेड वित्तीय बयानों में केवल 2.1 बिलियन डॉलर का कर्ज दिखाया गया था, जबकि वास्तव में कंपनी पर 6.6 बिलियन डॉलर (करीब ₹55,000 करोड़ से अधिक) का कुल कर्ज बकाया था।

बैंक ऑफ बड़ौदा पर क्या थे आरोप?: साल 2022 में अबू धाबी और लंदन की अदालतों में बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। प्रशासकों का आरोप था कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने फर्जी चालानों (Fabricated Invoices) के आधार पर क्रेडिट प्रोसेसिंग की और काल्पनिक वित्तपोषण (Fictitious Financing) की व्यवस्था में मदद की, जिससे एनएमसी के तत्कालीन प्रबंधन को अपना वास्तविक कर्ज छिपाने में मदद मिली।

समझौते की शर्तें: बिना गलती माने चुकाई भारी रकम

बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों को 2 जुलाई को दी गई जानकारी के अनुसार, इस समझौते के मुख्य विधिक पहलू इस प्रकार हैं।

गलती या दायित्व को स्वीकार नहीं किया (No Admission of Liability): बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस समझौते के तहत किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, गड़बड़ी या विधिक दायित्व को स्वीकार नहीं किया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल मुकदमेबाजी के खर्च और अनिश्चितता को खत्म करने के लिए किया गया है।

दायित्व की सीमा तय (Capping the Exposure): इस 600 मिलियन डॉलर (₹5,700 करोड़) के भुगतान के साथ ही इस पूरे विवाद में बैंक ऑफ बड़ौदा का वित्तीय जोखिम और दायित्व हमेशा के लिए समाप्त और सीमित हो गया है। इसके बाद बैंक पर कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकेगा।

मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू: समझौते के बाद अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस में चल रही कार्यवाही को बंद कर दिया गया है, जबकि इंग्लैंड एंड वेल्स के हाई कोर्ट में लंबित समानांतर कार्यवाही को वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।

भारत और यूके के दिग्गज वकीलों का पैनल

इस हाई-प्रोफाइल इंटरनेशनल केस में बैंक ऑफ बड़ौदा का प्रतिनिधित्व दुनिया के सबसे महंगे और दिग्गज वकीलों की टीम कर रही थी।

अबू धाबी कोर्ट में विधिक टीम: भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे KC और विक्टोरिया विंडले KC (ब्लैकस्टोन चैंबर्स) ने बैंक का पक्ष रखा।

कानूनी फर्में: भारत से पूवैया एंड कंपनी (साझेदार धर्मेंद्र चतुर के नेतृत्व में) और यूके की लॉ फर्म बेकर एंड मैकेन्ज़ी (ह्यूग लियोन और हेनरी गारफील्ड के नेतृत्व में) शामिल थीं।

दावेदार (प्रशासक) की टीम: बैंकम थैंकी KC और हेनरी किंग KC (फाउंटेन कोर्ट चैंबर्स) के साथ प्रसिद्ध लॉ फर्म क्वीन इमैनुएल ने पैरवी की।

केस मैट्रिक्स: बैंक ऑफ बड़ौदा – एनएमसी हेल्थ सेटलमेंट (जुलाई 2026)

विधिक और कॉर्पोरेट श्रेणियांबैंक ऑफ बड़ौदा की विधिक स्थिति
समझौता राशि600 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹5,700 करोड़)
संबंधित अदालतेंADGM कोर्ट (अबू धाबी) और हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस (इंग्लैंड और वेल्स)
विवाद का विषयएनएमसी हेल्थ पतन (2019 घोटाला) में काल्पनिक फंडिंग की सुविधा देने का आरोप।
मुख्य सह-प्रतिवादीएनएमसी के संस्थापक डॉ. बी.आर. शेट्टी और पूर्व सीईओ प्रशांत मंगात
विधिक स्टैंडबिना किसी लायबिलिटी या गलती को स्वीकार किए आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट किया गया।
बैंक के मुख्य वकीलहरीश साल्वे KC, विक्टोरिया विंडले KC
अंतिम विधिक स्थितिदोनों देशों में चल रहे मुकदमे बंद (Discontinued) किए जा रहे हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
36.5 ° C
36.5 °
36.5 °
41 %
4.3kmh
98 %
Fri
37 °
Sat
40 °
Sun
39 °
Mon
38 °
Tue
39 °

Recent Comments