Monday, August 24, 2026
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Dal Lake: श्रीनगर की डल झील के संरक्षण से जुड़ी जनहिता याचिका 24 साल से लंबित क्यों है….एमिकस क्यूरी को क्या दिया टास्क, पढ़ें

Dal Lake: श्रीनगर की विश्व प्रसिद्ध डल झील (Dal Lake) के लगातार बिगड़ते पर्यावरण और संरक्षण में हो रही देरी को लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है।

Dal Lake को लेकर एमिकस क्यूरी से अब तक की जानकारी का अपडेट देने के निर्देश दिए

हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने साल 2002 से लंबित पड़ी एक बेहद पुरानी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता जेड. ए. शाह से एक “संक्षिप्त तथ्यात्मक नोट” (Brief Factual Note) तलब किया है। अदालत ने एमिकस क्यूरी से इस पूरे मामले की अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। यह जनहित याचिका (PIL) इस अदालत में पिछले 24 वर्षों से लंबित है और इस दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं। डल झील की स्थिति में सुधार करने और इसके संरक्षण को लेकर समय-समय पर अदालत द्वारा कई निर्देश और आदेश पारित किए जा चुके हैं। मुकदमेबाजी के इस लंबे सफर को पूरी तरह से समझने और अब आगे क्या किए जाने की आवश्यकता है, इसका एक स्पष्ट खाका तैयार करने के लिए अदालत को वर्तमान स्थिति की सटीक जानकारी चाहिए।

मामला क्या है?: 2002 से चल रही है ‘डल’ को बचाने की कानूनी जंग

यह मामला कश्मीर घाटी की जीवनरेखा और पर्यटन के सबसे बड़े केंद्र, डल झील के अस्तित्व को बचाने से जुड़ा है।

याचिका की शुरुआत: यह ऐतिहासिक जनहित याचिका साल 2002 में सैयद इकबाल ताहिर गीलानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में श्रीनगर की डल झील में बढ़ते प्रदूषण, अवैध निर्माण, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ अदालत से न्यायिक हस्तक्षेप (Judicial Intervention) की मांग की गई थी।

24 साल का लंबा सफर: 2 जुलाई, 2026 को पारित अपने आदेश में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रेखांकित किया कि यह मामला लगभग 24 वर्षों से अदालत के सामने चल रहा है। इस दौरान सैकड़ों बार सुनवाई हुई, कई विशेषज्ञ समितियां बनीं और झील के उद्धार के लिए करोड़ों के प्रोजेक्ट्स पर निर्देश दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

हाई कोर्ट का निर्देश: 31 अगस्त तक देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

अदालत ने डल झील के संरक्षण से जुड़े इस महा-मुकदमे को एक तार्किक परिणति तक पहुंचाने और चल रहे कार्यों की वास्तविक समीक्षा करने के लिए एमिकस क्यूरी को जिम्मेदारी सौंपी है। कहा, इस मुकदमेबाजी का एक संपूर्ण और स्पष्ट दृष्टिकोण (Complete Perspective) प्राप्त करने के उद्देश्य से, हम विद्वान एमिकस क्यूरी से अनुरोध करते हैं कि वे एक संक्षिप्त तथ्यात्मक नोट प्रस्तुत करें। इस नोट में स्पष्ट होना चाहिए कि यह जनहित याचिका अब तक कैसे आगे बढ़ी है, पिछले आदेशों पर क्या काम हुआ है और डल झील के पूर्ण जीर्णोद्धार के लिए इस मामले में अभी और क्या किया जाना बाकी है। अदालत ने एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता जेड. ए. शाह को यह तथ्यात्मक रिपोर्ट 31 अगस्त, 2026 से पहले अदालत के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई में शामिल विधिक प्रतिनिधि

इस महत्वपूर्ण पर्यावरण मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कई वरिष्ठ वकीलों ने विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व किया। कोर्ट की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जेड. ए. शाह के साथ अधिवक्ता अहरा सैयद उपस्थित हुईं। एक जुड़े हुए (Connected) मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अल्ताफ नाइक और अधिवक्ता जिया अहमद ने पैरवी की। मामले में शामिल एक अन्य आवेदक की ओर से अधिवक्ता इफरा मिलाद भी अदालत के समक्ष पेश हुईं।

केस शीट: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट निर्देश (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्देश
संबंधित अदालतजम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (श्रीनगर बेंच)
आदेश की तारीख2 जुलाई, 2026
माननीय न्यायाधीशकार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी
मामले का शीर्षकसैयद इकबाल ताहिर गीलानी बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य
याचिका का वर्ष2002 (पिछले 24 वर्षों से अदालत में लंबित)
नियुक्त न्याय मित्र (Amicus)वरिष्ठ अधिवक्ता जेड. ए. शाह
अदालत का अंतिम निर्देशडल झील की वर्तमान स्थिति पर तथ्यात्मक नोट पेश करने का आदेश; रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त, 2026।
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