Tuesday, September 1, 2026
HomeHigh CourtElectronic Evidence: बिना सहमति पत्नी की कॉल रिकॉर्ड करना प्राइवेसी का हनन…यह...

Electronic Evidence: बिना सहमति पत्नी की कॉल रिकॉर्ड करना प्राइवेसी का हनन…यह गलत है, वहीं तलाक के केस में सबूत के तौर पर अमान्य

Electronic Evidence: पारिवारिक और वैवाहिक विवादों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की स्वीकार्यता को लेकर तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक बेहद दूरगामी और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस नमावरपु राजेश्वर राव की एकल पीठ ने साफ किया है कि कोई दस्तावेज़ या रिकॉर्डिंग केवल इसलिए अदालत में पेश नहीं की जा सकती क्योंकि वह इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में उपलब्ध है; उसका केस के मुख्य विवाद से सीधा संबंध (Clear Nexus) होना भी अनिवार्य है। हाई कोर्ट ने एक पति की उन दो सिविल पुनरीक्षण याचिकाओं (Civil Revision Petitions) को खारिज कर दिया, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट द्वारा उसकी कॉल रिकॉर्डिंग्स और अन्य दस्तावेजों को ऑन-रिकॉर्ड लेने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी थी।

जीवनसाथी के टेलीफोनिक बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया: अदालत

अदालत ने कहा, “एक जीवनसाथी (Spouse) द्वारा दूसरे की मर्जी या जानकारी के बिना उसकी टेलीफोनिक बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त प्राइवेसी के मौलिक अधिकार (Right to Privacy) का सीधा उल्लंघन है। बिना सहमति के तैयार की गई ऐसी किसी भी ऑडियो रिकॉर्डिंग को वैवाहिक मुकदमों में सबूत के तौर पर स्वीकार (Inadmissible) नहीं किया जा सकता।”

मामला क्या है?: क्रूरता का आरोप, पर सबूत में ‘खुशहाल शादी’ के टिकट

यह मामला एक पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ ‘क्रूरता’ (Cruelty) के आधार पर दायर की गई तलाक की याचिका से जुड़ा है।

पति की पैंतरेबाज़ी: पति ने कोर्ट में अपनी पत्नी की कुछ गुप्त रूप से रिकॉर्ड की गई कॉल रिकॉर्डिंग्स, ‘ट्रुथ लैब्स’ (Truth Labs) की फॉरेंसिक रिपोर्ट, हवाई टिकट, मेडिकल रिकॉर्ड्स, क्रेडिट कार्ड और बैंक पेमेंट्स के स्क्रीनशॉट्स को प्राइमरी और सेकेंडरी एविडेंस के रूप में शामिल करने की अर्जी लगाई थी।

ट्रायल कोर्ट का इनकार: निचली अदालत ने इन दस्तावेजों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि गुप्त कॉल रिकॉर्डिंग प्राइवेसी का हनन है। इसके अलावा, पति ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की तत्कालीन धारा 65-B (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम/बीएसए के तहत इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट) का अनिवार्य प्रमाण पत्र भी पेश नहीं किया था।

पति का तर्क: पति ने हाई कोर्ट में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट को शुरुआत में ही सबूत खारिज नहीं करने चाहिए थे, बल्कि उनकी सत्यता और स्वीकार्यता का फैसला अंतिम बहस (Final Adjudication) के समय करना चाहिए था। उसने यह भी कहा कि वह कोर्ट रूम में लाइव अपना बैंक अकाउंट लॉग-इन करके दस्तावेजों की प्रमाणिकता साबित करने को तैयार है।

Also Read; Hefty Settlements: तलाक के बाद रेप का आरोप, समझ में आ रहा कि मकसद सिर्फ भारी वसूली हैं…जेठ-देवर पर जबरन दुष्कर्म का केस, पढ़ें मामला

हाई कोर्ट का कड़ा रुख: ‘खर्च उठाना पति की जिम्मेदारी, क्रूरता नहीं’

जस्टिस नमावरपु राजेश्वर राव ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए पति की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार थीं:

गुप्त रिकॉर्डिंग और प्राइवेसी का अधिकार

अदालत ने कहा कि शादी का मतलब यह नहीं है कि कोई अपने पार्टनर की प्राइवेसी को पूरी तरह खत्म कर दे। जहां तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग का सवाल है, ट्रायल कोर्ट ने बिल्कुल सही माना कि दूसरी पार्टी की सहमति के बिना कॉल रिकॉर्ड करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए, सहमति के अभाव में, ऐसी रिकॉर्डिंग को साक्ष्य में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले का विरोधाभास (A Notable Conflict)

इस विधिक बिंदु पर कानून की एक बेहद दिलचस्प स्थिति भी सामने आई। तेलंगाना हाई कोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2025 में ‘विभोर गर्ग बनाम नेहा’ मामले में दिए गए फैसले के विपरीत नजर आता है। सर्वोच्च न्यायालय ने तब माना था कि पत्नी की गुप्त कॉल रिकॉर्डिंग प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं करती और वह साक्ष्य अधिनियम के तहत स्वीकार्य है। हालांकि, तेलंगाना हाई कोर्ट ने प्राइवेसी के संवैधानिक अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए इस मामले में रिकॉर्डिंग को खारिज कर दिया।

‘क्रूरता’ के सबूत में पेश कर दिए ‘रोमांटिक ट्रिप’ के बिल

कोर्ट ने जब पति द्वारा पेश किए गए अन्य दस्तावेजों (जैसे अमेरिका से भारत के हवाई टिकट, छुट्टियों के खर्च, तस्वीरें और मनी ट्रांसफर) की जांच की, तो जज साहब भी हैरान रह गए। कोर्ट ने टिप्पणी की, हमें यह समझ नहीं आ रहा कि ये दस्तावेज़ पति को ‘क्रूरता’ का आरोप साबित करने में कैसे मदद करेंगे। इसके विपरीत, ये कागजात तो यह दिखाते हैं कि दोनों ने एक बेहद सौहार्दपूर्ण, खुशहाल और सफल वैवाहिक जीवन (Cordial and Successful Marital Life) साझा किया था। एक पति होने के नाते, अपनी पत्नी के दौरों और सामान्य जीवन की जरूरतों पर खर्च करना उसकी कानूनी जिम्मेदारी है, इसे क्रूरता का आधार नहीं बनाया जा सकता।”

केस शीट: तेलंगाना हाई कोर्ट विधिक समीक्षा (2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और निर्णय
संबंधित अदालततेलंगाना उच्च न्यायालय, हैदराबाद
माननीय न्यायाधीशजस्टिस नमावरपु राजेश्वर राव (एकल पीठ)
साइटेशन (Citation)XXX Vs XXX
प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधानअनुच्छेद 21 (Right to Privacy – जीने और प्राइवेसी का अधिकार)
विवाद का मुख्य विषयक्या पार्टनर की मर्जी के बिना रिकॉर्ड की गई कॉल तलाक के केस में सबूत बन सकती है?
अदालत का अंतिम निर्णयपति की दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज; बिना सहमति की कॉल रिकॉर्डिंग पूरी तरह अमान्य।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
31 ° C
31 °
31 °
74 %
4.1kmh
94 %
Tue
32 °
Wed
27 °
Thu
33 °
Fri
32 °
Sat
32 °

Recent Comments