RTI Act: सूचना के अधिकार (RTI Act) और उम्मीदवारों की निजता के बीच संतुलन बनाते हुए सिक्किम हाईकोर्ट ने एक बेहद अनूठा और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।
किसी व्यक्ति की ‘गोपनीयता का हनन’ मानकर छिपाया नहीं जा सकता: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट के जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की एकल पीठ ने सिक्किम लोक सेवा आयोग (SPSC) को निर्देश दिया है कि वह सिक्किम सेवा (संयुक्त भर्ती) परीक्षा, 2022 के साक्षात्कार (Interview) में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट और अंक आरटीआई आवेदक को सौंपे। लेकिन साथ ही, कोर्ट ने आवेदक से यह लिखित वचन (Undertaking) लिया है कि वह इन जानकारियों को किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित नहीं करेगा। अदालत ने कहा, किसी भी सार्वजनिक भर्ती परीक्षा (Public Recruitment Exam) की समेकित मेरिट लिस्ट (Consolidated Merit List) और इंटरव्यू के अंक आरटीआई (RTI) के तहत सार्वजनिक सूचना के दायरे में आते हैं। इसे किसी व्यक्ति की ‘गोपनीयता का हनन’ मानकर छिपाया नहीं जा सकता। हालांकि, इस सूचना का उपयोग केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए होना चाहिए, न कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्मीदवारों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने या उनका दुरुपयोग करने के लिए।
मामला क्या है?: परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता बनाम गोपनीयता का तर्क
यह मामला फरवरी 2025 में दायर एक आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ था।
आरटीआई की मांग: आवेदक ने सिक्किम लोक सेवा आयोग (SPSC) द्वारा आयोजित संयुक्त भर्ती मुख्य परीक्षा, 2022 के माध्यम से एकाउंट्स ऑफिसर (Accounts Officer), अंडर सेक्रेटरी (Under Secretary) और डिप्टी एसपी (DSP) के पदों पर भर्ती से जुड़ी जानकारियां मांगी थीं। उसने सफल उम्मीदवारों की सूची, रोल नंबर, मार्क्स और दिव्यांगजन (PWD) श्रेणी के उम्मीदवारों से संबंधित विवरण मांगा था।
SPSC का आंशिक इनकार: जब आयोग ने केवल अधूरी जानकारी दी, तो आवेदक ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (First Appellate Authority) का रुख किया। प्राधिकारी ने एक अजीब आदेश देते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 11(1) के तहत केवल उन्हीं उम्मीदवारों के अंक दिए जा सकते हैं जिन्होंने अपनी सहमति (Consent) दी है। जिन उम्मीदवारों ने मना कर दिया है, उनके अंक धारा 8(1)(j) (व्यक्तिगत गोपनीयता की छूट) के तहत गुप्त रखे जाएंगे।
सूचना आयोग का हस्तक्षेप: इसके खिलाफ आवेदक ने सिक्किम सूचना आयोग (Sikkim Information Commission) में दूसरी अपील दायर की। सूचना आयोग ने SPSC के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक सार्वजनिक परीक्षा के अंक किसी की व्यक्तिगत निजता का उल्लंघन नहीं करते। आयोग ने SPSC को पूरी समेकित मेरिट लिस्ट और मार्क्स जारी करने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट का विधिक रुख: सोशल मीडिया के दौर में निजता की सुरक्षा
सिक्किम लोक सेवा आयोग (SPSC) सूचना आयोग के आदेश का पालन करने के लिए तैयार था, लेकिन उसे यह आशंका थी कि आरटीआई आवेदक इन अंकों और रोल नंबरों को सोशल मीडिया पर डालकर उम्मीदवारों को मानसिक रूप से परेशान या ट्रोल कर सकता है। SPSC ने इसी शर्त के साथ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए एक बीच का व्यावहारिक रास्ता निकाला।
पारदर्शिता का विधिक अधिकार: कोर्ट ने माना कि लोक सेवा आयोगों जैसी संस्थाओं की परीक्षाओं में पारदर्शिता (Transparency) बनाए रखने के लिए मेरिट लिस्ट और प्राप्तांकों का खुलासा होना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर नो-पब्लिकेशन का आदेश
अदालत ने राज्य लोक सूचना अधिकारी (SPIO) को आरटीआई आवेदक द्वारा मांगी गई पूरी जानकारी तुरंत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने आवेदक को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उसने अपने वचन का उल्लंघन किया और इस जानकारी को किसी भी सोशल मीडिया (जैसे Facebook, X, Instagram आदि) पर पब्लिश किया, तो उसके खिलाफ ‘कड़े विधिक कदम’ (Necessary Steps) उठाए जाएंगे।
विधिक फैक्ट शीट: सिक्किम हाई कोर्ट बनाम आरटीआई परीक्षा अंक विवाद (2026)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और अंतिम निर्णय |
| संबंधित न्यायालय | सिक्किम उच्च न्यायालय (Sikkim High Court), गंगटोक |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस मीनाक्षी मदन राय (एकल पीठ) |
| संबंधित परीक्षा | सिक्किम सेवा (संयुक्त भर्ती) मुख्य परीक्षा, 2022 |
| पदों के नाम | एकाउंट्स ऑफिसर, अंडर सेक्रेटरी और डिप्टी एसपी (DSP) |
| आरटीआई अधिनियम की धाराएं | धारा 8(1)(j) (गोपनीयता छूट) बनाम धारा 11(1) (तृतीय पक्ष सहमति) |
| अदालत की मुख्य शर्त | सूचना प्राप्त होगी, लेकिन सोशल मीडिया पर शेयर करने पर पूर्ण प्रतिबंध |
अदालत ने बहुत ही संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है उसने सिस्टम की पारदर्शिता के लिए आवेदक को सूचना पाने का हकदार तो माना, लेकिन सोशल मीडिया पर उसके प्रकाशन को रोककर उन सैकड़ों उम्मीदवारों की गरिमा की भी रक्षा की जो इस विधिक लड़ाई का हिस्सा नहीं थे। यह आदेश ‘राइट टू इंफॉर्मेशन’ और ‘राइट टू प्राइवेसी’ का एक सुंदर समन्वय है।

