Wednesday, October 28, 2026
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Show Cause Notice: AI का उपयोग कर GST कारण बताओ नोटिस बनाया…हाई कोर्ट ने कहा- यह कोई कानूनी अधिकार व प्रावधान नहीं, पढ़िए

Show Cause Notice: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर में जीएसटी (GST) कर अधिकारियों द्वारा जारी एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice – Form DRC-01A) को रद्द (Quash) कर दिया।

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कानून में टैक्स अधिकारियों द्वारा अपना स्वतंत्र विवेक (Independent Application of Mind) लागू करना अनिवार्य है और कारण बताओ नोटिस जारी करने में AI टूल्स के उपयोग का कोई कानूनी अधिकार/प्रावधान नहीं है। दरअसल, यह जीएसटी कारण बताओ नोटिस को तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का सहारा लिया गया था।

मामला क्या है?: AI के ‘प्रॉम्प्ट्स’ और सुझाव अनजाने में पोर्टल पर अपलोड

याचिकाकर्ता: मैसर्स एसआरओ इंडिया (M/s SRO India v. State of Punjab and Others)।

विवाद का कारण: जीएसटी विभाग ने कंपनी को unpaid taxes/penalties के संबंध में फॉर्म DRC-01A में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

AI का उपयोग खुलासा: नोटिस के साथ संलग्नक (Annexure) के रूप में पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज़ों में AI टूल द्वारा दिए गए ड्राफ्टिंग सुझाव और प्रॉम्प्ट्स भी शामिल हो गए थे।

AI टूल्स में “इसे और सख्त/मारक बनाएं” (“make it lethal”), “Order-in-Original में बदलें” (“add OIO version”), और कानूनी तर्कों तथा केस लॉ को जोड़ने के ड्राफ्टिंग प्रॉम्प्ट्स दर्ज थे।

हाई कोर्ट के प्रमुख कानूनी निष्कर्ष (Legal Principles)

वैधानिक शक्तियों को AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता (No Statutory Sanction)

अदालत ने स्पष्ट किया कि जीएसटी कानून (GST Law) के तहत सक्षम प्राधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह खुद मामले के तथ्यों की समीक्षा करे और अपना स्वतंत्र विवेक लगाए। कानून में AI टूल द्वारा कारण बताओ नोटिस तैयार कराने का कोई प्रावधान या वैधानिक स्वीकृति नहीं है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणी: चूंकि हम पाते हैं कि कारण बताओ नोटिस मुख्य रूप से AI टूल पर भरोसा करके जारी किया गया है, जिसकी कानून में कोई मंजूरी नहीं है, इसलिए 02.02.2025 का उक्त कारण बताओ नोटिस और उसकी परिणामी कार्यवाही कानूनन टिकाऊ नहीं है और उन्हें निरस्त किया जाता है।”

विभाग की ‘भूलवश अपलोड होने’ की सफाई खारिज

राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि AI से जुड़े संदर्भ और सुझाव गलती या अनजाने में पोर्टल पर अपलोड हो गए थे। लेकिन पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया और माना कि नोटिस के स्वरूप से स्पष्ट है कि अधिकारी ने खुद दिमाग लगाने के बजाय यांत्रिक रूप से AI की सलाह पर काम किया है।

अदालत का अंतिम आदेश

नोटिस रद्द: अदालत ने 2 फरवरी 2025 के कारण बताओ नोटिस (DRC-01A) और उससे जुड़ी सभी आगे की कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।

दोबारा नोटिस जारी करने की छूट: हाई कोर्ट ने विभाग को स्वतंत्रता दी है कि सक्षम अधिकारी मामले के तथ्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कर और स्वयं का विवेक लागू करके कानून के अनुसार नया नोटिस जारी कर सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट मुस्कान गुप्ता व विवेक शर्मा और पंजाब राज्य की ओर से अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल समदिशा कौर पेश हुईं।

केस मैट्रिक्स: SRO India v. State of Punjab

विधिक एवं प्रक्रियात्मक बिंदुविवरण / अदालत का रुख
मामले का शीर्षकमैसर्स एसआरओ इंडिया बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य
संबंधित अदालतपंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Division Bench)
माननीय पीठकार्यवाहक CJI अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर
मुख्य मुद्दाक्या न्यायिक/कर कार्यवाही में AI द्वारा तैयार नोटिस कानूनी रूप से वैध है?
अदालत का निर्णयनोटिस रद्द; कर अधिकारियों द्वारा AI पर निर्भरता बिना स्वतंत्र विवेक के असंवैधानिक व अवैध है।
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