Friday, October 30, 2026
HomeHigh CourtCouncillor Behind Bar: जनमत का कत्लेआम नहीं किया जा सकता? केरल के...

Councillor Behind Bar: जनमत का कत्लेआम नहीं किया जा सकता? केरल के एक पार्षद को जेल के भीतर शपथ लेने की अनुमति क्यों दी, जानिए

Councillor Behind Bar: केरल हाईकोर्ट ने कहा, लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है और किसी प्रक्रियात्मक औपचारिकता या तकनीकी खामी के कारण जनमत को विफल नहीं होने दिया जा सकता।

हाईकोर्ट के जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम के निवारक हिरासत (Preventive Detention) के तहत बंद एक नवनिर्वाचित पार्षद को वियूर सेंट्रल जेल (Central Prison, Viyyur) के भीतर से ही पद और गोपनीयता की शपथ लेने की अनुमति प्रदान की।

मामला क्या था?: KAAPA के तहत हिरासत और शपथ का विवाद

पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता सुगथन आर. तिरुवनंतपुरम नगर निगम के वार्ड नंबर 20 (वाज़ोट्टुकोणम) से निर्वाचित पार्षद हैं।

पुराना घटनाक्रम: उन्होंने 21 दिसंबर 2025 को शपथ ली थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने 24 जून 2026 के एक फैसले में पाया कि उनकी और कुछ अन्य पार्षदों की शपथ केरल नगरपालिका अधिनियम के नियमों के अनुरूप नहीं थी। कोर्ट ने 4 सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया था।

अड़चन: अन्य पार्षदों ने तो दोबारा शपथ ले ली, लेकिन याचिकाकर्ता को इसी बीच केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2007 (‘KAAPA’) के तहत निवारक हिरासत में ले लिया गया।

नई तिथि: जब नगर निगम ने 14 जुलाई 2026 को शपथ ग्रहण समारोह तय किया, तो जेल में बंद होने के कारण याचिकाकर्ता ने कोर्ट का रुख किया ताकि उन्हें शपथ लेने की अनुमति या व्यवस्था दी जा सके।

राज्य सरकार का पक्ष और हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

राज्य सरकार का रुख

अभियोजन महानिदेशक (DGP) ने तर्क दिया कि निवारक हिरासत के तहत बंद व्यक्ति को जेल से बाहर लाकर सार्वजनिक समारोह में शामिल होने का निर्देश नहीं दिया जा सकता (संविधान के अनुच्छेद 22(3) का हवाला देते हुए)। हालांकि, राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि यदि कोर्ट निर्देश दे, तो जेल परिसर के भीतर ही शपथ ग्रहण की व्यवस्था की जा सकती है।

लोकतंत्र और जनमत पर हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी

जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता शपथ नहीं ले पाता है, तो इससे नगर निगम में सत्ताधारी दल का बहुमत तक प्रभावित हो सकता है।

अदालत का मुख्य अवलोकन: पूर्व के फैसले में निर्देश देते समय इस अदालत की मंशा लोकतंत्र का कत्लेआम करने की कभी नहीं थी; बल्कि वे निर्देश कानून के शासन को बनाए रखने और मजबूत करने के उद्देश्य से दिए गए थे। प्रक्रियात्मक चूक के कारण जनमत का कत्लेआम (Massacred) नहीं किया जा सकता। जब असाधारण स्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो इस अदालत को लोकतांत्रिक सिद्धांतों और जनता के जनादेश की रक्षा के लिए असाधारण निर्णय लेने ही चाहिए।

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

जेल के भीतर शपथ: वियूर सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वे 14 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे जेल के भीतर ही याचिकाकर्ता के शपथ ग्रहण समारोह की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करें।

अधिकारियों की उपस्थिति: तिरुवनंतपुरम नगर निगम की मेयर और न्यूनतम आवश्यक अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई।

मीडिया कवरेज: चूंकि पार्षद का शपथ ग्रहण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए अदालत ने मान्यता प्राप्त मीडियाकर्मियों (Accredited Media) को भी इस समारोह को कवर करने की अनुमति दी।

केस मैट्रिक्स: Kerala High Court Order

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतकेरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन
याचिकाकर्तासुगथन आर. (पार्षद, वार्ड 20, तिरुवनंतपुरम)
हिरासत का कानूनKAAPA (केरल असामाजिक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 2007)
मुख्य विधिक सिद्धांतप्रक्रियात्मक चूक से लोकतांत्रिक जनादेश खत्म नहीं हो सकता; असाधारण स्थिति में असाधारण न्यायिक उपाय आवश्यक।
अदालत का अंतिम आदेशजेल परिसर के भीतर ही मेयर की उपस्थिति में शपथ ग्रहण कराने के निर्देश।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
21 ° C
21 °
21 °
94 %
5kmh
100 %
Fri
21 °
Sat
27 °
Sun
30 °
Mon
30 °
Tue
31 °

Recent Comments